आईआईटी ने मनाया दिव्यांग उत्सव:आत्मनिर्भर बनाने की दिखाई गई राह

कानपुर6 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
आईआईटी में वर्चुअल दिव्यांग उ� - Dainik Bhaskar
आईआईटी में वर्चुअल दिव्यांग उ�

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर दिव्यांग प्रकोष्ठ का वार्षिक उत्सव मनाया गया। कोरोना संक्रमण के चलते कार्यक्रम को वर्चुअल ही मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विकलांगता के मुद्दों की समझ को बढ़ावा देना था इसके साथ ही दिव्यांगों गरिमा पूर्ण जीवन अधिकार और का कल्याण करना भी शामिल था।

कैप सारथी एप के सहारे रोजगार संबंधी जानकारी दी गई

समारोह में दिव्यांगों को विभिन्न रोजगार और आत्मनिर्भर बनाने के बारे में बताया गया। डॉ अग्रवाल ने अपने संगठन सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट की गतिविधियों से दिव्यांगों को रूबरू कराया। संगठन के प्रशिक्षण कार्य के बारे में जानकारी दी गई। संगठन किस तरह से दिव्यांगों को रोजगार के काबिल बनाता है इस पर विशेष चर्चा की गई। इसके साथ ही बीते वर्ष लांच ऐप कैप सारथी का उल्लेख किया गया। उन्होंने बताया इस पर रोजगार से संबंधित सारी जानकारी उपलब्ध रहती है। उन्होंने जानकारी दी की सार्थक ट्रस्ट आईआईटी एनआईडी जैसे संस्थानों में पढ़ रहे दिव्यांग विद्यार्थियों को कैसे रोजगार उपलब्ध करा रहा है।

कार्यक्रम में कई पूर्व पदाधिकारी और छात्र रहे मौजूद

कार्यक्रम में प्रकोष्ठ के सदस्य प्रोफेसर वेंकटेश ने संस्थान की पुरानी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र प्रोफेसर अतुल भार्गव ने भी अपने विचार रखें। रिटायर्ड प्रोफेसर सुधीर कामले ने अपना नो साझा किया प्रकोष्ठ की पूर्व समन्वयक अनुभव प्रकोष्ठ की गतिविधियों का विस्तार से वर्णन किया।

दिव्यांगों को सशक्त करने पर रहा फोकस

वर्चुअल समारोह का शुभारंभ प्रकोष्ठ के समन्वयक प्रोफेसर कौशिक भट्टाचार्य द्वारा किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि डॉ जीतेंद्र अग्रवाल (संस्थापक तथा सीईओ सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट) थे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जितेंद्र कुमार की सफलताओं को बता कर दिव्यांगों उत्साह भरा गया। दिव्यांगों को यह संदेश देने का प्रयास हुआ कि एक निशक्त व्यक्ति भी बड़े मुकाम पर पहुंच सकता है। यदि मन में हौसला हो तो शारीरिक अपंगता कुछ नहीं है।

खबरें और भी हैं...