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तकनीकी शिक्षा में बेटियां पीछे:राष्ट्रपति ने कहा- यह संतोषजनक नहीं; जैमर की वजह से कैप्सूल नहीं जा पाया जमीन के अंदर

कानपुर2 महीने पहले
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कानपुर की हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में कहा कि एमटेक और बीटेक करने में बेटियां पीछे रहती हैं। यह संतोषजनक नहीं है। - Dainik Bhaskar
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कानपुर की हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में कहा कि एमटेक और बीटेक करने में बेटियां पीछे रहती हैं। यह संतोषजनक नहीं है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के कानपुर दौरे के दूसरे दिन गुरुवार को हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में थे। समारोह में अपने संबोधन में बेटियों को लेकर बड़ी बात कही। कहा कि तकनीकी शिक्षा लेने में बेटियां पीछे हैं। डॉक्टरेट करने में बेटियों की भागीदारी बराबरी की है। लेकिन एमटेक और बीटेक करने में बेटियां पीछे रहती हैं। ये संतोषजनक नहीं है। जबकि बेटियों को प्रदर्शन प्रभावशाली है।

एचबीटीयू के शताब्दी वर्ष के मौके पर डाक टिकट और सिक्का जारी हुआ।
एचबीटीयू के शताब्दी वर्ष के मौके पर डाक टिकट और सिक्का जारी हुआ।

राष्ट्रपति के हाथों नहीं जा सका कैप्सूल
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एचबीटीयू के 100 वर्षों के इतिहास को संजोकर 400 किलो कैप्सूल में रखे गए रिमोट दबाकर जमीन के अंदर भेजना था। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। कार्यक्रम में कैप्सूल को लेकर न तो कोई घोषणा की गई और न ही राष्ट्रपति ने इस पर कोई बात की। मामले में रजिस्ट्रार नीरज सिंह ने बताया कि राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल में इसे शामिल नहीं किया गया।

शताब्दी स्तंभ बनाया गया।
शताब्दी स्तंभ बनाया गया।

जैमर बना बड़ी वजह
रजिस्ट्रार ने बताया कि जैमर की वजह से सभी सिग्नल जाम हो जाते हैं। क्योंकि वेस्ट कैंपस में प्रोग्राम था और शताब्दी स्तंभ कार्यक्रम स्थल से 2 किमी दूर ईस्ट कैंपस में बनाया गया है। रिमोट दबाकर कैप्सूल को जमीन के अंदर भेजने की तैयारियां भी पूरी की गई थीं। लेकिन तकनीकी समस्या की वजह से इसे कार्यक्रम लिस्ट से कुछ समय पहले हटा दिया गया।

100 रुपए का सिक्का जारी
राज्यपाल ने इतिहास पुस्तक का विमोचन किया और प्रथम पुस्तक राष्ट्रपति को भेंट की। इसके बाद राष्ट्रपति ने डाक टिकट, विशेष आवरण और सौ रुपए मूल्य के स्मारक सिक्का का विमोचन किया तो सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इससे पहले राष्ट्रपति ने दीप प्रज्ज्वलित करके शताब्दी वर्ष समारोह का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद, औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना और प्राविधिक शिक्षा मंत्री नीलिमा कटियार भी मौजूद रहीं।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पुस्तक भेंट की।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पुस्तक भेंट की।

राष्ट्रपति के संबोधन की बड़ी बातें

  • तकनीकी शिक्षा और शोध को बढ़ावा देते हुए देश को नॉलेज सुपर पावर बनाएं।
  • देश को अग्रणी बनाने के लिए इनोवेशन व टेक्नोलॉजी के जरिए सशक्त बनाया जा सकता है।
  • छात्रों से मेरी अपेक्षा है कि जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब देने वाला बने।
  • देश में सेल्फ मेड उद्यमियों का प्रतिशत लगभग 65 परसेंट हो चुका है।
  • एचबीटीयू की एल्युमिनी एसोसिएशन शोषित, वंचित और दलित वर्ग के लिए काम करें।
  • कभी-कभी ध्यान से सुनते हुए आंखे झपक जाती हैं और मीडिया के मित्र फोटो कैद कर लेते हैं।
  • शिक्षा कानपुर में हुई तो यहां आकर विद्यार्थी जीवन याद आने लगता है।
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