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भारत-न्यूजीलैंड टेस्ट मैच के लिए ग्रीन पार्क स्टेडियम तैयार:उन्नाव के बीघापुर की काली मिट्टी से तैयार होता है ग्रीन पार्क का विकेट, अब अधिक बारिश होने पर भी मैदान में नहीं भरेगा पानी

कानपुर4 महीने पहले
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टीम इंडिया और न्यूजीलैंड के मुकाबले के लिए तैयार है ग्रीन पार्क स्टेडियम की पिच। - Dainik Bhaskar
टीम इंडिया और न्यूजीलैंड के मुकाबले के लिए तैयार है ग्रीन पार्क स्टेडियम की पिच।

कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में 25 से 29 नवंबर के बीच भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले टेस्ट मैच को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। कई सालों से समस्या बनी जंगली घास को साफ कर दिया गया है। खिलाड़ियों को अभ्यास सत्र के लिए 10 काली मिट्टी की पिचें उपलब्ध कराई जाएंगी, जबकि मुख्य मैदान में नौ पिचों को तैयार किया जाएगा। इन पिचों को तैयार करने में उन्नाव जिले के बीघापुर गांव से काली मिट्टी लाई गई है।

ग्रीन पार्क को टेस्ट मैच की मेजबानी मिलते ही वाटर लॉगिंग, सेंड बेस के साथ मुख्य पिच व अभ्यास पिचों के रेनोवेशन का काम तेजी से शुरू कर दिया गया है। पिच क्यूरेटर और उनके असिस्टेंट यह काम जल्द ही पूरा कर लेंगे।

अब अधिक बारिश होने के बावजूद नहीं भरेगा पानी

सेंट्रल जोन और ग्रीन पार्क के सीनियर पिच क्यूरेटर शिव कुमार ने बताया कि कोरोना काल में हुए लॉकडाउन में खेल की गतिविधियां पूरी तरह से बंद थीं। इसके चलते मैदान पर बड़े स्तर पर मेंटेनेंस का काम किया गया। मैदान को ज्योमेट्री करेक्शन से तैयार किया गया है। पिछले सीजन में बारिश का पानी भर जाने के कारण मुसीबत झेलने वाले ग्रीन पार्क में ड्रेनेज सिस्टम का काम पूरा हो चुका है। अब अधिक बारिश होने के बावजूद मैदान के किसी भी छोर पर पानी नहीं भरेगा। हाल ही हुई चैलेंजर ट्रॉफी में बारिश के कुछ ही घंटों बाद मैदान फिर से खेलने लायक तैयार हो गया था।

पिच क्यूरेटर ने कहा-कुछ पिचों को बल्लेबाजों के अनुरूप बनाया जा रहा है।
पिच क्यूरेटर ने कहा-कुछ पिचों को बल्लेबाजों के अनुरूप बनाया जा रहा है।

उन्नाव के बीघापुर की काली मिट्टी से तैयार होती है पिच

शिव कुमार ने बताया कि स्टेडियम की 9 पिचों के साथ 10 अभ्यास विकेट पर टॉप ड्रेसिंग का काम किया जा रहा है। इन पिचों को तैयार करने में उन्नाव जिले के बीघापुर गांव में बने तालाब की काली मिट्टी का इस्तेमाल किया गया है। बारिश के मौसम में मिट्टी मिल रही है। उसकी क्वालिटी भी ज्यादा अच्छी है। क्योंकि पानी के निचले हिस्से में जमी मिट्टी बारिश में ऊपर की तरफ आ जाती है। इस मिट्टी का प्रयोग वह कई सालों से कर रहे हैं।

पहले स्लो था ग्रीन पार्क का विकेट

उन्होंने बताया कि ग्रीन पार्क के विकेट पर 2002 से पहले जितने भी टेस्ट मैच हुए हैं, उनका रिजल्ट ड्रा ही निकलता था। लेकिन 2002 में जब इसका विकेट मेरे पास आया, तो उसके बाद से यहां के हर टेस्ट मैच का रिजल्ट निकला है। आने वाले अगले मैच में भी यही होगा।

पूरे स्टेडियम को सेंड बेस कर दिया गया

पिच क्यूरेटर ने कहा कि पूरे स्टेडियम को सेंड बेस कर दिया गया है। इससे बारिश में कीचड़ होने की संभावना भी खत्म हो जाएगी। इसके साथ मुख्य व अभ्यास पिच का भी रेनोवेशन कर दिया गया है। कुछ पिचों को बल्लेबाजों के अनुरूप बनाया जा रहा है। इसका फायदा खिलाड़ियों को अभ्यास के दौरान मिलेगा। इससे पहले मैदानकर्मी कई ग्रुप में जंगली घास के क्षेत्र को खोदकर उसके स्थान पर नई घास लगा चुके हैं। इसका फायदा खिलाड़ियों को मैच के दौरान क्षेत्ररक्षण में मिलेगा। खिलाड़ियों को चोट नहीं लगेगी।

खराब घास की जगह होगी नई घास

मैदान में सूखी और खराब हो चुकी घास को पूरी तरह से हटा दिया गया है। उसकी जगह नई घास को लगाया दिया गया है। यह घास ग्रीन पार्क को और नया लुक देगी। इसमें घास की लेबलिंग, कटिंग का काम भी किया जाएगा।

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