कानपुर में अंजान बुखार से अब तक 8 की मौत:सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए थे, 380 अस्पतालों में अब तक 1 हजार से ज्यादा बच्चे भर्ती

कानपुर5 महीने पहले
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डॉक्टरों ने एक की मौत की वजह एक्यूट रेस्पीरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम बताया है। - Dainik Bhaskar
डॉक्टरों ने एक की मौत की वजह एक्यूट रेस्पीरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम बताया है।

कानपुर में वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है है। अंजान बुखार से अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें से चार मरीज हैलट में भर्ती थे। निमोनिया और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत पर इन्हें भर्ती कराया गया था।

डॉक्टरों ने एक की मौत की वजह एक्यूट रेस्पीरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम बताया है। जो आमतौर पर कोरोना की दूसरी लहर में कोविड के मरीजों में देखने को मिला था।

बुखार से न केवल बड़े लोग बल्कि छोटे बच्चे भी पीड़ित हैं। गुरुवार तक शहर के 380 पंजीकृत अस्पतालों और नर्सिंग होमों में बुखार से पीड़ित करीब एक हजार से ज्यादा बच्चे भर्ती हो चुके हैं।

वायरल से हुई मौतों की बताई जा रही अलग-अलग वजह

कल्याणपुर के कुरसौली गांव निवासी लक्ष्मी प्रजापति (38) की बुखार की चपेट में आने के बाद सांसें थम गईं। बिल्हौर के अनूपपुरवा की रहने वाली नेहा को डेंगू के बाद प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कई दिनों तक उसका इलाज चला। गुरुवार को उसने भी दम तोड़ दिया। वहीं 38 साल के शंकर लाल की मौत एआरडीएस से हुई है। यानी कि उसके दोनों फेफड़ों में निमोनिया हो गया था।

कोविड की जांच रिपोर्ट आ रही निगेटिव

जिन लोगों की मौतों हुई है। उनकी कोरोना की जांच भी की गई थी लेकिन जांच में किसी को कोरोना नहीं निकला था। पिछले 24 घंटे के भीतर आठ मौतों से स्वास्थ्य महकमा भी हैरान है। हैलट के सीनियर डॉक्टर एसके गौतम ने बताया, बुखार वाले मरीजों में कोविड जांच निगेटिव मिल रही है। फ्लू का वायरस काफी जटिल है। इन मरीजों की जांचों में वायरल के वायरस बहुत जल्दी अपना रूप बदल रहे है, इसी वजह से समझ नहीं आ पा रहा है कि मरीजों पर किस बीमारी की दवाई चलाई जाए।

हैलट के प्रमुख अधीक्षक प्रो आरके मौर्या का कहना है कि वायरल फीवर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अस्पताल में तक़रीबन 300 से अधिक बेड पर सिर्फ वायरल के मरीजों का ही इलाज किया जा रहा है। हालात भयावह हैं और ऐसे में बेड और बढ़ाने की तैयारी भी की जा रही है।

उमस भरी गर्मी से बढ़ रहा है संक्रमण

हैलट के एक सीनियर डॉक्टर ने बताया, पिछले करीब दो सप्ताह से लोग कभी उमस भरी गर्मी- कभी बारिश फिर एक दम तेज धूप से बेहाल हैं। यही कारण है कि मौसम के बदलाव के चलते लोग वायरल के शिकार हो रहे है। सरकारी अस्पताल के साथ निजी क्लीनिकों पर मरीजों की लंबी-लंबी लाइनें लगी देखने को मिल रही हैं। गुरुवार को हैलट में करीब 2400 ओपीडी के परचे बनाये गए, इनमे से 1400 से अधिक लोगों को वायरल, उल्टी दस्त बुखार और निमोनिया के मरीज अधिक है।

उर्सला की ओपीडी में बढ़े मरीज

उर्सला अस्पताल का भी यही हाल है। पर्चा काउंटर पर सुबह 8 बजे से ही लंबी कतारें लगी हुई थी। ओपीडी कक्षों के बाहर भी मरीजों की अच्छी खासी भीड़ नजर आई। कोई उल्टी दस्त का इलाज कराता दिखाई दिया तो कोई बुखार की दवा लेता नजर आया। सबसे ज्यादा बच्चों को इस समय बीमारी का शिकार होना पड़ रहा है।

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