छठे इंडिया वाटर इम्पैक्ट में हुये अहम मुद्दों पर फैसले:बड़ी नदियों में मिलने वाली नहरों की होगी मैपिंग, तभी हो पायेगी गंगा निर्मल

कानपुरएक महीने पहले
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छठे इंडिया वाटर इम्पैक्ट समिट में निर्णय लिया गया समर्थ गंगा का प्रोजेक्ट चलाया जाएगा। साथ ही देश के सभी राज्यों में नदियों का मैप बनाया जाएगा जिसके बाद सहायक नदियों की सफाई शुरू की जाएगी। ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड पर चल रहे इस समिट में सी गंगा के संस्थापक प्रो गंगा तारे ने कहा कि गंगा को साफ करने, लोगों को इसके प्रति जागरूक करने, गंगा की सफाई में लोगों का सहयोग लेने और अर्थ गंगा को बढ़ावा देने के लिए समर्थ गंगा की शुरुआत की है।

प्रदेश की नदियों का बनेगा मैप...
प्रो तारे ने समिट में स्पष्ट बताया कि, इस मिशन में गंगा का तात्पर्य सभी छोटी, बड़ी नदियों से हैं। इस समिट में मनरेगा कमिश्नर भी शामिल थे, उन्होंने कहा कि गंगा की सफाई के लिए तकनीक की मांग की है। इस पर उन्होंने कहा कि हर प्रदेश की नदियों का मैप बनाया जाएगा। उस मैप के आधार पर नदियों की स्थिति को देखकर प्लान उनकी सफाई की परियोजना बनाई जाएगी।

यूके, यमुना बेसिन का बना गया है मैप...
प्रो तारे ने बताया कि उत्तराखंड और यमुना बेसिन का मैप बनाया जा चुका है। उत्तराखंड में 13 जिले हैं, वहां, करीब 22 छोटी बड़ी नदियां हैं, जिनकी लंबाई 11 हजार किलोमीटर है। वहीं यमुना बेसिन में सात प्रदेश आते हैं, इसमें 101 डिस्ट्रिक्ट हैं और 314 नदियां हैं, जिनकी लंबाई 26000 किलोमीटर है। उन्होंने कहा कि ऐसे ही मैप बनाकर दिया जाएगा, इसके बाद आगे काम शुरू होगा।

कई जिलों में नदियों की जमीन पर खेती होती है...
उन्होंने आगे कहा, यूपी के कई ऐसे जिले हैं जहां नदियों की जमीन पर खेती हो रही है। बीच से नदी पर अतिक्रमण किया गया है, उसे भी दूर कर नदी को जोड़ा जाएगा। सहायक नदियों के उद्धार से निर्मल होगी गंगा प्रो तारे ने कहा कि गंगा को निर्मल करने के लिए सहायक नदियों का साफ होना जरूरी है।इसलिए अब हर जिले की सहायक नदी को साफ करने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें हर जिले के जिलाधिकारी से सहयोग लिया जाएगा। सी गंगा प्रोजेक्ट की ओर से तकनीकी सपोर्ट मिलेगा।

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