पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

आतंकी पाठशाला:2020 में उमर हलमंडी ने किया था कानपुर दौरा, रक्षा प्रतिष्ठानों में थी धमाके की रणनीति, पुराने सिम के इस्तेमाल से पकड़ा गया मिन्हाज

कानपुर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो

एटीएस सूत्रों के मुताबिक मिनहाज ने बताया कि उसके साथ कानपुर, लखनऊ, अयोध्या और वाराणसी में कमाण्डर उमर हलमंडी ने दौरा किया था। तीन दिन कानपुर रहने के दौरान उमर ने मिनहाज को कानपुर में मानव बम और स्लीपर सेल बनाने टारगेट दिया था। बताया जाता है कि 2020 से इनकी सक्रियता तेज हो गयी है। एटीएस सूत्रों के मुताबिक धमाके का ताना बाना बुन लिया गया था। इसी दौरान मिनहाज ने एक पुराने सिम का इस्तेमाल कर लिया। इसी गलती से वह एनआईए और आर्ईबी की गिरफ्त में आया। धमाके के प्लान की जानकारी मिलते ही एजेंसियां अलर्ट हो गईं और लखनऊ में दोनों की घेराबंदी कर गिरफ्तारी कर ली।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान जा चुका उमर हलमंडी आखिर है कौन?

मिनहाज और मसरुद्दीन के हैंडलर उमर हलमंडी का असली नाम सैयद अख्तर है। संभल निवासी सैयद अख्तर उर्फ उमर हलमंडी 23 साल पहले आसिम उमर व दो अन्य युवकों के साथ देश छोडक़र आतंक के रास्ते पर चला गया था। इन युवकों ने सीमा पार पाकिस्तान में जाकर आतंक की ट्रेनिंग ली थी। आठ साल पहले आसिम उमर के बारे में पता चला कि वह अफगानिस्तान में है और अलकायदा कमांडर अल जवाहिरी का बेहद करीबी है।

मानव बम बनाने के लिए पनकी में तीन महिलाओं को दी थी रकम

ATS सूत्रों के मुताबिक़ पूछताछ में दोनों ने बताया कि पनकी के स्लम एरिया में रहने वाली तीन महिलाओं को लाखों रुपये दिए थे। उन्हें मानव बम की जैकेट देकर धमाका कराने का प्लान था। जिस दिन मिनहाज और मसरुद्दीन को पकड़ा गया। उसी शाम एक टीम इन महिलाओं को तलाशती हुई कानपुर पहुंची थी। तीनों महिलाएं बताई हुई जगह पर नहीं मिलीं। एटीएस सूत्रों की माने तो जिस दिन मिनहाज का पुराना फोन सुना गया, उसी दिन उसी नंबर से महिलाओं की बात हुई थी। इसके पुख्ता सुबूत सीडीआर में भी मिल गए हैैं।

एटीएस ने पहले पर्चे में किया ऑनलाइन जेहादी बनाने की बात दर्ज

मिनहाज को जम्मू के बारामूला में आतंकी कैंप में ट्रेनिंग देने के दौरान सोशल मीडिया की बारीकियां भी सिखाई गई थीं। साथ ही जमीन पर बारूदी लाइन बिछाने में मिनहाज को महारत हासिल थी। इस मामले में इंट्रोगेशन कर रही एटीएस ने पहला पर्चा मंडे को कोर्ट में दाखिल किया। जिसमें दर्ज किया गया है कि कानपुर में गजवातुल हिंद को मजबूत करने का काम किया जा रहा था। जिन लोगों से मिनहाज और मसरुद्दीन के संपर्क थे, उनका इलेक्ट्रॉनिक इविडेंस भी दिया गया। कानपुर के 8 लोगों का जिक्र किया गया है।

ऑन लाइन ट्रेनिंग के दौरान पढ़ाये आतंकी पाठ

एटीएस ने अपनी लिखा-पढ़ी में बताया कि पहले मिनहाज नकाब पहनकर मिलता था। तब तक वह नकाब में रहता था। विश्वास जमने पर अपनी पहचान ओपन करता था। कानपुर से उन्नाव जाने के दौरान लगभग 10 साल पहले एक धर्म स्थल का निर्माण कराया गया। यहां मंडे देर शाम एटीएस की टीम पहुंची थी। एटीएस सूत्रों की माने तो यहीं पर मिनहाज अपने संगठन से जुड़े कानपुर, फतेहपुर और औरैया के लोगों के साथ अपने प्लान बनाता था।

खबरें और भी हैं...