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कानपुर के कार्डियोलॉजी अस्पताल में बड़ी लापरवाही:फेल हो चुका था फायर सेफ्टी सिस्टम, प्रमुख सचिव ने लिया जायजा, बोले- दोषियों पर होगी कार्रवाई

कानपुर3 महीने पहले
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चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार। - Dainik Bhaskar
चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार।

कानपुर के हृदय रोग संस्थान में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा था। इसका खुलासा चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार की जांच से हुआ। मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद प्रमुख सचिव ने रविवार की शाम कानपुर पहुंचे। उन्होंने बताया कि हादसे के वक्त फायर अलार्म सिस्टम ने काम नहीं किया। जब डॉक्टर राहुल ने धुआं देखा तो तब हादसे की जानकारी हुई। अगर हमारा फायर अलार्म सिस्टम एक्टिव होता तो पहले ही बचाव कार्य कर सकते थे।

प्रमुख सचिव ने अस्पताल प्रशासन के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की और पूरे हादसे की जानकारी एकत्र करते हुए मरीजों के भी हाल-चाल लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन व फायर विभाग की तत्परता के चलते किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। जांच में जो कमियां पाई गई हैं। उनमें सुधार करवाया जाएगा और जो भी दोषी हैं, उन पर जो कार्रवाई बनती होगी नियमानुसार की जाएगी। यह रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

मरीजों को सुरक्षित किया गया शिफ्ट

प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने कहा कि आग लगने के ठीक 15 मिनट के बाद से ही मरीजों को बाहर निकाल कर सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। जो मरीज ज्यादा गंभीर नहीं थे उन्हें न्यू ओपीडी बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया था और जो गंभीर थे उन्हें तत्काल प्रभाव सेे जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो डिपार्टमेंट में शिफ्ट किया गया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन व फायर विभाग की तत्परता के चलते हमने कोई भी जिंदगी खोई नहीं है और सभी सुरक्षित हैं।

स्मोक व फायर अलार्म सिस्टम ने नहीं किया काम

प्रमुख सचिव ने कहा कि कहां पर कमियां है, इसकी जांच की जा रही है। इलेक्ट्रिकल सेफ्टी के डिप्टी डायरेक्टर एलपी गुप्ता जांच कर रहे हैं। अभी तक की जांच में जो बात सामने निकल कर आई है उसके अनुसार स्मोक व फायर अलार्म सिस्टम ने काम नहीं किया और जब डॉक्टर राहुल ने धुआं को देखा तब जानकारी हुई। अगर हमारा फायर अलार्म सिस्टम एक्टिवेट होता तो शायद हम पहले से ही बचाव कार्य कर सकते थे। दूसरा हाईड्रेन्ट सिस्टम हमारा जो है, उसके टैंक में कुछ प्रॉब्लम है। जिसके चलते वह भी काम नहीं कर रहा था। इस हादसे में फायर नहीं था, लेकिन स्मोक ज्यादा था। लेकिन फायर अलार्म सिस्टम क्यों नहीं चला दूसरा हाईड्रेन्ट सिस्टम हमारा जो है उसके टैंक में कुछ प्रॉब्लम थी जिसको लेकर अस्पताल प्रशासन ने लिखा भी था। उसके बाद भी कार्रवाई नहीं की गई, यह देखने की बात है इसमें जो लोग भी जिम्मेदार है इसकी जांच की जा रही है और जो भी कार्रवाई बनती होगी वह कार्रवाई की जाएगी।

40 बेड के अस्पताल को बनाया गया 150 बेड का अस्पताल

प्रमुख सचिव ने कहा यह एक पुरानी बिल्डिंग है। जिसको रीमॉडल करके दोबारा से तैयार किया गया था। 40 बेड का अस्पताल था, लेकिन इसे भी रीमॉडल करके 150 बेड का बनाया गया है। जब पुरानी बिल्डिंग को एयर कंडीशन किया गया तो मोटे-मोटे ग्लास से बिल्डिंग को सील कर दिया गया। जिससे की धुआं बाहर निकल नहीं पा रहा था और आगे बढ़ रहा था। जिसे तोड़ने में भी फायर विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी है भविष्य में ऐसी दिक्कत ना हो इसके लिए रीमॉडलिंग की जरूरत है जो करवाया जाएगा और ज्यादातर जगहों पर ग्लास को स्लाइडिंग का रूप दिया जाएगा ताकि उन्हें खोला जा सके। उन्होंने कहा कि अभी जांच चल रही है जो भी कमियां पाई जाएंंगी उन्हें दूर किया जाएगा।

2 मरीजों की मौत, 147 पेशेंट रेस्क्यू किए गए

दरअसल, हृदयरोग संस्थान के फर्स्ट फ्लोर पर रविवार सुबह आग लग गई। इस फ्लोर पर ICU और जनरल वार्ड हैं। हादसे के वक्त ICU में 9 और जनरल वार्ड में 140 मरीजों का इलाज चल रहा था। रेस्क्यू के दौरान जनरल वार्ड के 2 मरीजों इमाम अली व टेकचंद्र की मौत हो गई। दोनों वार्डों के बाकी 147 मरीजों को दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया गया। कमिश्नर डॉ. राजशेखर का कहना है कि ये मौतें हादसे की वजह नहीं हुईं। राजशेखर ने कहा, 'जैसा कि मुझे जानकारी मिल रही है। एक कैजुअल्टी हादसे से पहले 6 बजकर 55 मिनट पर हो चुकी थी और दूसरी कैजुअल्टी 9 बजकर 21 पर जो हुई। इस मरीज को हार्ट की प्रॉब्लम थी और उनको पेसमेकर लगाया गया था। अभी मामले की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सही जानकारी दी जाएगी।' मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबंधित अफसरों से अस्पताल में आग लगने की घटना की रिपोर्ट मांगी है।

जिस जगह आग लगी थी, वहां सबकुछ जलकर नष्ट हो गया।
जिस जगह आग लगी थी, वहां सबकुछ जलकर नष्ट हो गया।
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