कैमरों को दी जा रही दंगाईयों को पहचानने की ट्रेनिंग:कानपुर में देश में पहली बार इंटेलिजेंट कैमरे; भीड़ में हथियार हुआ तो पुलिस को मिलेगा अलर्ट, रिकार्डिंग होगी; एक किमी दूरी तक रखेंगे निगरानी

कानपुर7 महीने पहलेलेखक: रवि पाल
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  • कानपुर में 400 लोकेशन पर इन कैमरों की टेस्टिंग शुरू हो गई है

कानपुर में अब दंगा या बवाल करने वालों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा। यही नहीं अगर बवाल की आशंका से बढ़ रही भीड़ की पहचान कर पहले ही अलर्ट जारी किया जा सकेगा। कानपुर में बीते दिसंबर-2019 में पहले सीएए और एनआरसी कानून को लेकर बड़े पैमाने पर दंगे भड़क गए थे। अचानक गलियों से निकली भीड़ ने पुलिस और प्रशासन को भागने पर मजबूर कर दिया था। इन गंभीर परिस्थितियों को कंट्रोल करने के लिए स्मार्ट सिटी ने टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है। स्पेशल पीटीजेड कैमरों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस लर्निंग दी जा रही है। जिससे दंगाई की शक्ल में बढ़ रही भीड़ की पहचान की जा सके। शहर में 400 लोकेशन पर इनकी टेस्टिंग शुरू कर दी गई है।

कंट्रोल एंड कमांड सेंटर में कैमरे करते हैं अलर्ट।
कंट्रोल एंड कमांड सेंटर में कैमरे करते हैं अलर्ट।

हेड काउंट कर पहचान
कानपुर स्मार्ट सिटी के आईटी मैनेजर राहुल सब्बरवाल ने बताया कि सिटी के चौराहों और घनी आबादी की गलियों में बहुत भीड़ होती है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के जरिए गलत मंशा से बढ़ रही भीड़ को आइडेंटिफाई कर सकेंगे। पैन टिल्ट जूम (पीटीजेड) कैमरा तत्काल हेड काउंट कर लोगों की पहचान करेगा। यही नहीं भीड़ के पास हथियार, पोस्टर और बैनर को भी आइडेंटिफाई करेगा। अगर कहीं कोई संदिग्ध सामान 10 मिनट तक लावारिस हालात में पड़ा है, तो उसकी रिकॉर्ड कर कंट्रोल एंड कमांड सेंटर को अलर्ट जारी करेगा। 450 करोड़ से इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जा रहा है।

स्मार्ट सिटी के इंजीनियर्स की मानें तो अभी तक इस टेक्नोलॉजी का यूज देश की किसी भी स्मार्ट सिटी में नहीं किया है। इसकी टेस्टिंग शुरू कर दी गई है। कोरोना की वजह से प्रोजेक्ट में कुछ देर हो गई है। 450 लोकेशन की जानकारी पुलिस डिपार्टमेंट को दी गई है। पुलिस सेंसटिव एरियाज की लिस्ट देगी, उसे वहां भी लागू किया जाएगा। एआई के थ्रू कैमरों को 20 से ज्यादा लर्निंग दी गई हैं।
एक किलोमीटर दूर तक रेंज
ये कैमरे इतने एडवांस है कि किसी भी मौसम और किसी भी वक्त काम करने में सक्षम है। इनकी रेंज 1 किमी. से भी अधिक है। एआई टेक्नोलॉजी का यूज मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में खास तौर पर किया जाएगा। यह इलाके काफी संवेदनशील होते हैं।
एक्सीडेंट भी खुद सेंस करेंगे
आईटी मैनेजर ने बताया कि पीटीजेड कैमरे हर 5 सेकेंड में मूव करते हैं। अगर किसी चौराहे पर कोई एक्सीडेंट हो गया है तो ये उसे सेंस कर पूरी घटना की ऑटोमैटिक रिकॉर्डिंग भी करने लगेंगे। इसके साथ ही कंट्रोल एंड कमांड को अलर्ट करेंगे। कंट्रोल रूम में बैठे पुलिस कर्मी संबंधित थाना पुलिस और मदद मुहैया कराएंगे।
इन चौराहों पर लगे कैमरे
जरीबचौकी, रावतपुर, परेड, बड़ा चौराहा, सद्भावना चौकी चौराहा, ईदगाह चौराहा, टाटमिल चौराहा, अफीमकोठी, फूलबाग, लालइमली, चुन्नीगंज, गोल चौराहा, वीआईपी रोड, हलीम कॉलेज चौराहा, विजय नगर, नवाबगंज, फजलगंज, रावतपुर गांव समेत अन्य।
ऐसे काम करता है आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस
खास सॉफ्टवेयर के जरिए किसी भी कैमरे या मशीन को ऐसे प्रोग्राम किया जाता है, जिससे वे इंसानी दिमाग की तरह सोच सकें। इसके 3 मुख्य प्रोसेस होते हैं।
1. लर्निंग
इसमें इंफॉर्मेशन डाली जाती है। इसके कुछ रूल्स भी बनाए जाते हैं। इससे कैमरे उन रूल्स को फॉलो करते हुए कार्य करते हैं।
2. रिसनिंग
इसके तहत कैमरों को ये इंस्ट्रक्शन दी जाती हैं कि वो उनके बनाए सभी रूल्स का पालन करें और 100 परसेंट रिजल्ट दें।
3. सेल्फ करेक्शन
कैमरों को दी गई कई तरह की लर्निंग के बाद सॉफ्टवेयर के जरिए खुद फैसले लेते है। लर्निंग के बाद इंसानों की तरह सोचकर रिजल्ट के रूप में अलर्ट जारी करते हैं।

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