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उन्नाव के बबुरहा से ग्राउंड रिपोर्ट:दलित लड़कियों की मौत के बाद गांव में पुलिस और नेताओं का जमघट; आंसुओं-दिलासों के बीच नारेबाजी भी होती है

उन्नाव18 दिन पहलेलेखक: रवि श्रीवास्तव
यह फोटो उन्नाव की है। बबुरहा गांव जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस का सख्त पहरा है।

UP की राजधानी लखनऊ से लगभग 100 KM दूर उन्नाव जिले के आखिरी छोर पर बसा बबुरहा गांव अचानक सुर्खियों में आ गया है। बीते बुधवार की रात यहां एक दलित परिवार की दो नाबालिग लड़कियों के शव खेत में मिले थे, जबकि तीसरी लड़की की हालत बेहद नाजुक है। वह कानपुर के रीजेंसी अस्पताल में मौत से जंग लड़ रही है। ये लड़कियां रिश्ते में बुआ-भतीजी थीं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पॉइजनिंग की पुष्टि हुई है, लेकिन तीनों ने खुद जहर खाया या खिलाया गया, यह अभी भी एक बड़ा सवाल है।

इस घटना के बाद देश के तमाम दलित नेताओं, सोशल एक्टिविस्ट और विपक्षी दलों के नेताओं ने UP की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। वहीं, बबुरहा गांव में पुलिस फोर्स और प्रशासनिक अफसरों की आमद बढ़ गई है। राजनेताओं का भी गांव में आना-जाना लगा हुआ है। बबुरहा गांव से भास्कर की रिपोर्ट...

बबुरहा मुड़ने वाले रास्ते पर पुलिस का बैरियर और इस गांव में मीडिया का जमावड़ा

बबुरहा गांव में काजल, कोमल और रोशनी संदेहास्पद परिस्थितियों में खेत में मिली थीं। काजल और कोमल की मौत हो गई है। रोशनी की हालत नाजुक है। काजल के पिता ने घटना के 18 घंटे बाद असोहा थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। उन्नाव की असोहा पुलिस अब पहले से ज्यादा एक्टिव नजर आ रही है। थाने से 1 किमी दूर बबुरहा गांव की ओर मुड़ने वाले रास्ते पर 6 से ज्यादा पुलिस वाले बैरियर के पास खड़े हैं और आने-जाने वाले से पूछताछ कर रहे हैं। यहीं से एक किलोमीटर दूर बबुरहा गांव में बाहर से पुलिस और मीडिया का जमावड़ा दिखाई पड़ता है। करीब 100 मीटर अंदर वो परिवार है, जिसने दो लड़कियों को खो दिया। यहां पुलिस बैरिकेडिंग तो है, पर आने-जाने पर रोक-टोक नहीं है।

मृतक काजल के घर के बाहर खड़ी फोर्स।
मृतक काजल के घर के बाहर खड़ी फोर्स।

बेटी भी चली गई, पुलिस वालों ने बेटे को अब तक नहीं छोड़ा

काजल के घर के सामने 12-15 पुलिसकर्मी अपने असलहों और डंडों के साथ तैनात हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बना यह एक कमरे का घर है। बगल में कच्चे मकान पर झोपड़ी बनी हुई है। काजल की मां बिटौल बेसुध अवस्था में अपनी किसी रिश्तेदार की गोद में पड़ी हुई हैं। बात-बात पर फफक कर रो पड़ती हैं। कहती हैं कि मेरी बिटिया चली गई और मेरे बेटे कल्लू (25) को भी पुलिस वाले थाने ले गए हैं। उसके साथ दस साल के ललित को भी पुलिस ले गई है। ये बातें होते ही महिला पुलिस सब इंस्पेक्टर बीच में टोकते हुए बोलती है कि पंचनामा के लिए ले गए हैं, पर जब ये सवाल होता है कि रात में ही क्यों ले गए तो पुलिस अफसर चुप हो जाती हैं।

अपने रिश्तेदार की गोद में काजल की मां।
अपने रिश्तेदार की गोद में काजल की मां।

पीड़ित परिवार किससे क्या कह रहा है, इस पर पुलिस की पैनी नजर

काजल के घर से 100 मीटर दूर ही कोमल का घर है। कोमल की मां घर के बाहर रिश्तेदारों के साथ बैठी हैं। कुछ नेता भी उन्हें दिलासा दे रहे हैं। वो कहती हैं ना जाने लड़कियों के साथ क्या हुआ? पर पुलिस वाले हमारे ही घरवालों को थाने लेकर चले गए हैं। हम चाहते हैं कि उन्हें छोड़ दिया जाए। कोमल की बुआ कहती हैं घर में फोन नहीं है। जब मुझे रात में खबर मिली तो हम सुबह पहुंचे। इस घर पर भी पुलिस वालों का पहरा है। परिजनों से क्या बात हो रही है, इस पर भी नजर रख रहे हैं। घरवालों को इस बात पर ऐतराज है।

मृतक कोमल की मां (पीली साड़ी में)। पास में नेताजी हैं, जो दिलासा देने आए हैं।
मृतक कोमल की मां (पीली साड़ी में)। पास में नेताजी हैं, जो दिलासा देने आए हैं।

रोशनी की मां बोलीं- बिटिया से मिलने कानपुर जा रहे हैं, कल से कोई खबर नहीं मिली

जीवित बची रोशनी का इलाज कानपुर के रीजेंसी अस्पताल में चल रहा है, लेकिन उसकी हालत इतनी खराब है कि वह कुछ भी बता पाने में असमर्थ है। मायूसी भरे माहौल में उसकी मां अपने घर से कहीं बाहर जाने की तैयारी में हैं। सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि कानपुर जा रही हैं। उनके साथ उनकी बहू भी अपने दुधमुंहे बच्चे को गोद में लेकर जाने को तैयार है। चलते-चलते रोशनी की मां ने कहा कि बिटिया कल से हॉस्पिटल में एडमिट है। कुछ पता नहीं चल पा रहा है कि उसे क्या हुआ है? ना कोई खबर मिल रही है। मेरा बेटा है, लेकिन उसे बीपी की बीमारी है। पता नहीं किस हाल में होगा।

रोशनी का घर। लाल साड़ी में उसकी मां कानपुर जाने को तैयार थीं।
रोशनी का घर। लाल साड़ी में उसकी मां कानपुर जाने को तैयार थीं।

नेताओं के आने का सिलसिला जारी, बीच-बीच में गूंजते हैं नारे

बबुरहा में नीला गमछा डाले हुए भीम आर्मी के कार्यकर्ता भी घूम रहे हैं तो कांग्रेस के नेता भी पहुंचे हैं। कह रहे हैं कि जल्द ही प्रियंका गांधी मिलने आएंगी। इस बीच, काजल के घर के सामने कभी-कभी प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी हो रही है। एक बार पुलिस से धक्कामुक्की भी हुई। IG लक्ष्मी सिंह ने एक बार फिर पीड़ित परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान घर में आए रिश्तेदारों को भी अलग हटा दिया गया।

पीड़ित परिवार से मुलाकात कर बाहर निकलतीं IG लक्ष्मी सिंह।
पीड़ित परिवार से मुलाकात कर बाहर निकलतीं IG लक्ष्मी सिंह।

क्या कहती है पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट? पुलिस किन बिंदुओं पर कर रही जांच?

दोनों लड़कियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहरीला पदार्थ मिलने की बात कही गई है। डॉक्टर्स ने शरीर से मिले जहरीले पदार्थ के सैंपल को जांच के लिए लैब भेजा है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद अब पूरी घटना की जांच तीन बिंदुओं पर की जा रही है।

  • ऑनर किलिंग: सूत्रों का कहना है कि पुलिस की जांच का सबसे पहला बिंदु ऑनर किलिंग है। इस बारे में हर जानकारी जुटाने के लिए पुलिस परिजनों और उनके परिचितों से पूछताछ कर रही है।
  • प्रेम प्रसंग: इस एंगल पर भी पुलिस बारीकी से ध्यान दे रही है। इसके लिए लड़कियों की सहेलियों से भी बातचीत की गई है। जानकारी यह भी मिल रही है कि दो संदिग्ध लड़कों को भी गांव से उठाया गया है।
  • आत्महत्या: लड़कियों ने खुद जहर खाया या जबरदस्ती खिलाया गया। इस बिंदु को लेकर भी पुलिस बारीकी से जानकारी एकत्र कर रही है। हालांकि घटनास्थल के आसपास से जहर से संबंधित कोई भी चीज पुलिस को बरामद नहीं हुई है।
गांव में जुटे लोग।
गांव में जुटे लोग।

घटना पर खड़े हो रहे ये अहम सवाल

  • गांव से खेतों की दूरी ज्यादा अधिक नहीं है। फिर भी इतनी बड़ी घटना हो गई, लेकिन जानकारी किसी को क्यों नहीं हुई?
  • अगर किसी को आत्महत्या करनी होगी तो वो अपने हाथ-पैर क्यों बांधेगा?
  • परिजनों का कहना है कि गांव में किसी से दुश्मनी नहीं है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी न ही दुष्कर्म हुआ बताया गया, न ही मारपीट के निशान शरीर पर हैं। ऐसे में किसी जानने वाले ने तो घटना को अंजाम नहीं दिया। अगर गांव में किसी से दुश्मनी नहीं है तो बाहर का व्यक्ति इतनी बड़ी घटना को अंजाम क्यों देगा। इसके पीछे कोई अपना तो नहीं?
  • असली वजह कहीं प्रेम प्रसंग तो नहीं, जो दो लड़कियों की मौत का कारण बना?
सरसों के खेत में इसी जगह मिली थीं तीनों लड़कियां।
सरसों के खेत में इसी जगह मिली थीं तीनों लड़कियां।
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