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84 साल के पिता के साथ बेटा भी करेगा एलएलबी:कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक ने दी दाखिले की अनुमति, पत्नी के लिए लड़ी लड़ाई के बाद मिली वकालत करने की प्रेरणा, पिता बेटा एक साथ करेगें वकालत

कानपुर3 महीने पहले
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छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय फाइल फोटो

पुत्र संग पिता भी एलएलबी की पढ़ाई करेंगे। पिता के बाद पुत्र भी सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। पिता-पुत्र ने एलएलबी की पढ़ाई के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक से अनुमति मांगी थी। कुलपति ने पिता-पुत्र के पढ़ाई के जज्बे को देखते हुए दाखिले की अनुमति प्रदान कर दी है। पिता पुत्र दोनों वीएसएसडी कॉलेज में दाखिले के लिए आवेदन कर रहे हैं।

84 साल के पिता के साथ पुत्र भी पढ़ेगा...
नवाबगंज निवासी ललित कुमार मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में कार्यरत हैं। वे कुछ समय में ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं। वहीं उनके 84 वर्षीय पिता सीताराम भी पीएफ ऑफिस से सेवानिवृत्त हैं। सीताराम ने कुछ दिन पहले विवि के कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक से एलएलबी करने की इच्छा जताते हुए दाखिला देने की अनुमति मांगी थी। कुलपति की अनुमति के बाद सीताराम सोमवार को धन्यवाद देने कुलपति के पास पहुंचे थे। तभी पुत्र ललित कुमार ने भी पिता के साथ एलएलबी करने के लिए अनुमति मांगी। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि पढ़ाई करने की कोई उम्र नहीं होती है। उन्होंने अनुमति देने के साथ दाखिले में किसी तरह की दिक्कत आने पर समाधान करने का भी आश्वासन दिया।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के वीसी विनय पाठक के साथ सीताराम श्रीवास्तव और उनका बेटा ललित कुमार
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के वीसी विनय पाठक के साथ सीताराम श्रीवास्तव और उनका बेटा ललित कुमार

बहुत जल्द अटेंड करेंगे क्लास...
आपको बता दें सीताराम ने पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती है, इस बात को सही साबित कर दिया है, पीएफ ऑफिस से इनफोर्समेंट ऑफिसर पद से सेवानिवृत्त है। उन्होंने वर्ष 1960 में बीए और 1962 में एमए की पढ़ाई की थी। इसके बाद पीएफ में नौकरी की और 1995 में इंफोर्समेंट ऑफिसर के पद से रिटायर हुए। बेटा ललित डिफेंस मिनिस्ट्री में कार्यरत है। सीताराम ने बताया कि वर्ष 1998 में पत्नी की मौत हो गई थी। एसजीपीजीआई में चिकित्सीय लापरवाही के कारण पत्नी की मौत हुई थी। न्याय के लिए इसकी उपभोक्ता फोरम से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी। वर्ष 2018 में जीत मिली। इस 20 साल की लड़ाई में कानून को लेकर काफी क्रेज आया। किताबों के शौकीन सीताराम ने कहा कि लगा घर में बैठने से अच्छा है कि एलएलबी की पढ़ाई कर लूं। इसको लेकर विवि के कुलपति से मुलाकात की थी, उन्होंने सहर्ष अनुमति प्रदान कर दी है। सीताराम होम्योपैथी किताब पढ़ने के भी शौकीन हैं।

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