बिकरू कांड...गैंगस्टर के पिता को डकैत बताने में फंसी पुलिस:20 साल पुरानी डकैती में विकास दुबे के 85 साल के पिता को बना दिया था आरोपी, परिजन जमानत लेने को तैयार नहीं; पुलिस ही ढूंढ रही जमानतदार

कानपुरएक महीने पहलेलेखक: आदित्य द्विवेदी
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बिकरू कांड के बाद गैंगस्टर विकास दुबे के पिता पर डकैती की एफआईआर करना अब कानपुर पुलिस के लिए गले की फांस बन गया है। गैंगस्टर के बीमार पिता रामकुमार को जेल में डालने की हिम्मत पुलिस जुटा नहीं पा रही है। उधर, परिजनों ने भी 85 साल के रामकुमार की जमानत लेने से इंकार कर दिया है। पुलिस उनकी जमानत के लिए खुद जमानतदार की तलाश कर रही है।

राम कुमार की उम्र 85 साल है। बीमारी के चलते वे ठीक से चल फिर नहीं सकते हैं। वे 24 घंटे चारपाई पर ही पड़े रहते हैं। इन दिनों रामकुमार शिवली में विकास की मां और परिवार की एक छोटी बेटी के साथ रहते हैं।

20 साल पुराना है डकैती का मामला

2001 में शिवली में डकैती पड़ी थी। इसमें तत्कालीन एसओ राजुल गर्ग ने मुकदमा दर्ज कराया था। इसकी मुकदमा संख्या 144/2001 है। डकैती के इस मुकदमे में विकास दुबे, अनुराग, अतुल, संतोष, आशीष, आलोपी, शिव सिंह और विकास दुबे के साले राजू भुल्लर को नामजद किया गया था। इस मामले में दो अज्ञात लोगों को भी रखा गया था।

डकैती के इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को अरेस्ट कर चार्जशीट 2002 में लगा दी थी। कुछ लोगों ने अपनी जमानत करा ली थी। उसके बाद गैंगेस्टर विकास दुबे की दबंगई की वजह से डकैती की ये फाइल दबवा दी गई थी।

बिकरू कांड के बाद गैंगेस्टर के पिता का डकैती में जोड़ा नाम
2 जुलाई 2020 को बिकरू गांव में भीषण नरसंहार हुआ था। इसमें सीओ समेत 8 पुलिस कर्मी शहीद हुए। इस सनसनीखेज मामले में कई पुलिस कर्मी जख्मी हुए थे। 10 जुलाई को गाड़ी पलटने के बाद विकास दुबे एनकाउंटर में मारा गया था। उसके बाद पुलिस ने जो घेराबंदी शुरू की थी, उसमें परिवार के सदस्यों और दुबे के मिलने वालों को पुराने मुकदमों में नामजद करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। दुबे के पिता रामकुमार पर भी पुलिस का शिकंजा कसा गया और 85 साल के रामकुमार को 20 साल पुराने मुक़दमे में दो अज्ञात में से एक में नामजद कर दिया गया।

बिकरू कांड के बाद पुलिस ने विकास के घर को इस तरह नेस्तनाबूत कर दिया था।
बिकरू कांड के बाद पुलिस ने विकास के घर को इस तरह नेस्तनाबूत कर दिया था।

अज्ञात में रामकुमार का नाम खोला गया
फाइलों को खंगालने में पुलिस के सामने 144/2001 की फाइल भी आ गई। इसमें दो अज्ञात का नाम बीस साल से चल रहा था और फाइल दबी हुई थी। रामकुमार का नाम अज्ञात में खोल दिया गया। रामकुमार के नाम अभी तक कोई केस नहीं था लेकिन पुलिस अधिकारियों ने जब थाना पुुलिस को कुछ करने को कहा तो थाना पुलिस ने डकैती के इस मामले में रामकुमार का नाम शामिल कर दिया। अब पुलिस के लिए ये गले की फांस बन गया है। पुलिस ने केस दर्ज कर कागज कोर्ट मे दाखिल किए तो कोर्ट ने इस मामले का रिव्यू किया।

पुलिस ने जब रामकुमार को फरार बताया तो कोर्ट ने थाना पुलिस को जमकर फटकारा और कहा कि 85 साल का वृद्ध कैसे फरार हो सकता है?

पुलिस तलाश रही रामकुमार के लिए जमानतगीर

विकास दुबे की पत्नी ने जमानत लेने से न सिर्फ इनकार कर दिया बल्कि साफ लहजे में परिवार से किसी भी तरह का संबंध होने से भी मना किया। चलने, फिरने और याददाश्त खो चुके रामकुमार को अब पुलिस कोर्ट कैसे ले जाए और जमानत कराए? ये पुलिस के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है।

बिकरू कांड के बाद आज तक विकास के घर की तस्वीर वैसी ही है। यहां विकास की पत्नी रिचा भी नहीं जाती।
बिकरू कांड के बाद आज तक विकास के घर की तस्वीर वैसी ही है। यहां विकास की पत्नी रिचा भी नहीं जाती।

गांव में मौजूद लोगों ने जमानत लेने से किया इनकार

बिकरू गांव के कई लोगों को पुलिस ने जेल भेज दिया। जिसमें से कुछ लोग लोग अभी भी जेल में हैं। बचे हुए लोग गांव छोडक़र भाग गए हैं। बिकरू में केवल महिलाएं ही घरों में दिखाई देती है। जिन परिवारों से दुर्दांत के कोई संबंध नहीं थे और जो परिवार दुर्दांत के खौफ से पीडि़त थे, वे रामकुमार की जमानत लेने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। अब पुलिस शिवली जाती है और रामकुमार के हाल देखकर वापस चली आती है।

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