कासगंज के किसान की कहानी, जिससे PM ने की बात:13 साल पहले 65 हजार की नौकरी छोड़ शुरू की थी खेती, 500 किसानों को जोड़ बनाई कंपनी; 280 हेक्टेयर खेती से 36 लाख का टर्नओवर

कासगंज4 महीने पहले
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प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि की आज 9वीं किश्त पीएम मोदी ने जारी की है। यह किश्त जारी करने से पहले पीएम मोदी ने उत्तर प्रदेश के कासगंज के किसान श्यामा चरण उपाध्याय से बात की। इन्होंने 2008 में खेती शुरू की थी। तमाम परेशानियों से गुजरते हुए 13 साल बाद अब वह एक सफल किसान है। उपाध्याय ने 65 हजार की नौकरी छोड़ 517 किसानों के साथ मिलकर एक मेडी एरोमा एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड कंपनी बनाई। इस कंपनी का पिछले साल का टर्नओवर 36 लाख रुपए था।

65 हजार की नौकरी छोड़ शुरू की थी खेती

कासगंज के पटियाली ब्लॉक के गांव बहोरा में रहने वाले श्यामा चरण उपाध्याय ने 1988 में बायोलॉजी से Bsc किया था। जबकि 1991 में बीएड करने के बाद उन्होंने एमआर के रूप में एक आयुर्वेदिक मेडिसिन कंपनी ज्वाइन की। इसके बाद 2004 में एक निजी इंश्योरेंस कंपनी में सीईओ के पद पर नौकरी की। 2008 तक कंपनी से जुड़े रहे। कंपनी छोड़ने से पहले इनकी सैलरी 65 हजार थी।

5 एकड़ से खेती शुरू की

श्यामा चरण उपाध्याय कहते हैं कि जब नौकरी छोड़ने का मन बनाया तो यह बहुत कठिन था। हालांकि, जीवन में एक ऐसा समय आता है कि जब हमें बड़े फैसले लेने होते हैं। चूंकि मेरा परिवार भी मेरे पीछे था तो हमने सबसे राय मशविरा कर खेती का फैसला किया। मेरे घर में पिता जी खेती करते थे तो गांव और खेतों से मेरा जुड़ाव तो था। ऐसे में मुझे खेती शुरू करने में कोई बहुत दिक्कत नहीं हुई। 2008 में 5 एकड़ से हमने खेती शुरू की और पारंपरिक फसलों के साथ एक एकड़ में शतावर लगाया। जिसके बाद उस एक एकड़ से मुझे साढ़े 4 लाख का फायदा हुआ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में साथियों के साथ बीच में बैठे किसान श्यामा चरण उपाध्याय।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में साथियों के साथ बीच में बैठे किसान श्यामा चरण उपाध्याय।

500 किसानो को मिलाकर बना दी कंपनी

खेती में आने के 10 साल बाद 24 जुलाई 2018 में को मैंने फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी मेडी एरोमा एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड बनाई। कंपनी से पूरे यूपी में 517 किसानों को बीते 2 साल में जोड़ा है। अब सबकी जमीन मिलाकर 280 हेक्टेयर में शतावर, लैमन ग्रास, पामारोजा, खस, ग्रेनियम, अश्वगंधा, कैमोमाइल, सफेद मूसली, तुलसी, स्टीविया, सहजन आदि फसलें लगी हुई हैं। किसान अपनी जमीन पर औषधीय फसल और पारंपरिक खेती भी करते है। औषधीय फसल के साथ साथ हम जैविक प्रोडक्ट भी तैयार करते हैं।

हालांकि, कंपनी से किसानो को जोड़ना बहुत कठिन था लेकिन मैं किसानों के लिए कुछ करना चाहता था। शुरुआत मैंने कासगंज से ही। यहां से शुरुआती दौर में मैंने कुछ किसानो को जोड़ा जोकि लगातार बढ़ते गए। अब पूरे प्रदेश में 517 किसान कंपनी से जुड़े हैं। 2020 में कंपनी का टर्नओवर 36 लाख पहुंचा था। इस बार उम्मीद है कि यह टर्नओवर ज्यादा होगा।

ऑनलाइन तरीके से होती है औषधीय खेती

औषधीय खेती करने से पहले मैं आयुर्वेदिक फार्मा कंपनी से जुड़ा हुआ था। ऐसे में मुझे इसको बेचने के लिए मार्केट जानने की जरूरत नहीं पड़ी थी। हम सभी किसान अपनी कंपनी के जरिए ही औषधियों और जैविक प्रोडक्ट की सप्लाई करते हैं। अब हाल यह है कि देश भर से फसलों के खरीददार आ रहे हैं। यही नहीं हम अपने प्रोडक्ट ऑनलाइन भी बेच रहे हैं।

श्यामा चरण अपने लेमन ग्रास के खेत में। तकरीबन 18 औषधीय फसलों की खेती होती है।
श्यामा चरण अपने लेमन ग्रास के खेत में। तकरीबन 18 औषधीय फसलों की खेती होती है।
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