उत्साह के साथ मनाई जाती है जैनों में मकर संक्रांति:कौशांबी में भगवान पदम प्रभु की जन्म और तप स्थली पर लगता है विशाल मेला

कौशांबी7 महीने पहले
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भगवान पदम प्रभु की जन्म स्थली पर लगा मेला। - Dainik Bhaskar
भगवान पदम प्रभु की जन्म स्थली पर लगा मेला।

सूर्य की उपासना का पर्व यानी ‘मकर संक्रांति’ जितने उल्लास और उमंग के साथ हिन्दू धर्म में मनाते हैं, वैसे ही जैन समुदाय के दिगम्बर अनुयायी भी आस्था और संकल्प के साथ सूर्य पर्व को मनाते हैं। जैनों के तीर्थ पभोसा पर्वत में मकर-संक्रांति के दिन ऐसा ही सुर्योत्सव देखने को मिलता है। सूर्य की किरणों की लालिमा के साथ जैन तीर्थ पर लगने वाले इस मेले की अनुपम छटा देखते ही बनती है। जिसे देखने दूर-दूर से लोग इकठ्ठा होते हैं।

तप और प्रकृति का दिखता है अनोखा संगम

दिगंबर जैन धर्म के छठे तीर्थंकर भगवान पदम प्रभु के जन्म और तप की स्थली प्रभास गिरी पर्वत (पभोसा) में मकर-संक्रांति के दिन विशाल मेला लगता है। जहां पर लोग यमुना नदी में डुबकी लगा कर आस्था, तप और प्रकृति का अनोखा संगम देखते हैं। ये स्थान वो है, जहां पदम प्रभु ने तपस्या करने के बाद अपने अनुयायियों को दीक्षा दिया था।

विदेशों से आते हैं लोग

पदम प्रभु के गो-लोकवासी होने के बाद उनके अनुयाइयों ने पभोसा में एक बड़ा सा मन्दिर बनवा दिया। मकर संक्रांति के दिन लगने वाले हर साल मेले में देश भर से जैन समुदाय के लोगो के अलावा दूसरे धर्म के लोगों की भीड़ जुटती है। जैन समुदाय के लोग इसे ‘जिनालय’ कहते हैं। साल भर यहां आने वाले दूर दराज के लोग प्रभु के दर्शन करके उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प दोहराते हैं। मकर संक्रांति के दिन लगाने वाले मेले में देश ही नहीं विदेशों से जैन अनुयाई यहां आते हैं।

पर्वत पर बना है जिनालय

अनुपम छटा समेटे हुए इस प्रभास गिरी पर्वत पर अलग-अलग स्थानों पर दो मन्दिर बने हैं। जहां पदम प्रभु के वचनों के सार दर्शाए गए हैं। पदम प्रभु बचपन में ही अनेक विधाओं से सुशोभित हो गए थे। आयु के एक चौथाई समय बीतने पर उन्होंने एक छत्र राज्य प्राप्त कर लिया था। इसके बाद वो संसार, शरीर और भोगों से मुक्त होकर ‘जिन दीक्षा’ ग्रहण कर तप करने लगे।

ग्रामीण जनता को रहता है हर साल इंतजार

मकर संक्रांति के दिन प्रभास गिरी में बड़ा मेला लगता है। इस मेले में देश के विभिन्न जगहों के साथ आस-पास के जिलों से हजारों लोग आते हैं। मेले में मनोरंजन के साथ ही पदम प्रभु के दर्शन करके लोग अपने को धन्य मानते हैं। मेले में पहुंचने वालों का कहना है कि मकर संक्रांति के दिन ऐसा मेला और कही नहीं लगता है। साल भर ग्रामीण जनता इस मेले का इंतजार करती है।

पुलिस बल को हटाया गया

कोविड काल में तीसरी लहर के संभावित खतरे में प्रभास गिरी का ये मेला सुपर स्प्रेडर साबित हो सकता है। प्रशासनिक गौर पर मेले को संचालित करने की अनुमति नहीं दी गई है। बावजूद इसके आयोजक मेले में आने वाले लोगों को नहीं रोक पा रहे हैं। दिन चढ़ने के साथ लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल तैनात किया गया था, लेकिन कोविड नियमों का हवाला देकर पुलिस सुरक्षा हटा दी गई है।

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