इंडो-पाक युद्ध में शहीद बच्चूलाल का मनाया गया शहादत दिवस:कौशांबी में इंदिरा गांधी ने दी थी 10 बीघा जमीन, जिसे प्रशासन कर रहा है कब्जा

कौशांबीएक महीने पहले
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कौशांबी में शहीद बच्चूलाल की समाधी पर मनाया गया शहीद दिवस। - Dainik Bhaskar
कौशांबी में शहीद बच्चूलाल की समाधी पर मनाया गया शहीद दिवस।

कौशांबी में 1971 के इंडो-पाक युद्ध शहीद लांस नायक बच्चूलाल का शहादत दिवस मनाया गया। उनकी 50वीं पुण्य तिथि पर गांव ने समाधी स्थल पर श्रद्धा के पुष्प चढ़ाए। हालांकि, इस मौके पर कोई प्रशासनिक अफसर नहीं पंहुचा। परिजनों ने बताया कि समाधी स्थल तोड़ने के फैसले को अफसर वापस ले लें। शहीद के सम्मान में तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने 10 बीघे जमीन दी थी। जिस पर चकबंदी कर तहसील प्रशासन कब्जा कर रहा है।

बड़ा बेटा पांच साल का था जब हुए थे शहीद

जिले के चायल तहसील के महराज का पुरा मजरा जलालपुर शाना के रहने वाले बच्चूलाल भारतीय सेना मे लांस नायक के पद पर तैनात थे। 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान के युद्ध में वह शहीद हो गए थे। बच्चूलाल जब शहीद हुए थे, तो उनका बड़ा लड़का राजेंद्र कुमार पांच साल, मझला लड़का कृष्ण कुमार यादव और सबसे छोटे बेटे राजकुमार यादव की उम्र एक साल थी।

तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने दी थी 10 बीघा जमीन

शहीद बच्चू लाल को तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने बतौर सम्मान 10 बीघे जमीन दी थी। जिसको राजस्व अधिकारियों ने चकबंदी के दौरान अपने कब्जे मे लेने की कार्यवाही शुरू कर दी है। इतना ही नहीं तहसील अफसरो ने शहीद परिवार को भूमि के लिए अपात्र होने की रिपोर्ट लगा दी। शहीद का परिवार अब जमीन वापस पाने के लिए अफसरो के चौखट के चक्कर लगा रहा है। शहीद के बेटे राजेंद्र कुमार व कृष्ण कुमार फौज में भर्ती हो गए। शहादत के सम्मान मे मिली भूमि पर छोटा बेटा राजकुमार खेती-किसानी करता है। जमीन की भूमिधरी हो चुकी है। 47 साल बाद प्रशासन ने शहीद समाधि स्थल सहित अन्य भूमि को श्मशान व तालाब की बताकर बेदखली की कार्यवाही शुरू कर दी।

कार्यक्रम में नहीं पहुंचा कोई प्रशासनिक अधिकारी

इंडो-पाक युद्ध मे अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले बच्चू लाल की मंगलवार को 50 वीं पुण्य तिथि मनाई गई। चायल तहसील के महाराज का पूरा गांव के ग्रामीणों ने शहीद के परिजनों संग मिल शहीद समाधी स्थल पर शहादत दिवस कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में स्थानीय लोगों ने शहीद के चित्र पर पुष्प चढ़ाकर अपनी कृतघ्नता व्यक्त की। हालांकि इस दौरान कोई भी प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारी कार्यक्रम में नहीं पंहुचा। कार्यक्रम में दौरान ग्रामीणों ने एक बार फिर शहीद के सम्मान में मिली 10 बीघे जमीन प्रशासन से वापस दिए जाने की मांग उठाई।

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