जैविक खाद ने बदली किसान की तकदीर:कौशांबी के उद्धो सिंह हर साल कमाते हैं 10 लाख का मुनाफा, मिल चुका है बेस्ट फार्मर का अवॉर्ड

कौशांबी2 महीने पहले

देश में उत्पादन बढ़ाने की होड़ ने खेती योग्य जमीनों को बंजर बना दिया है। अब इन जमीनों से अनाज पैदा नहीं होता, बल्कि कटीली झाड़ियां उगने लगी हैं। बंजर जमीनों को बचाने के लिए कौशांबी के किसान उद्धो सिंह ने वर्मी कल्चर फार्मूले पर आधारित जैविक खाद तैयार कर खेतों को संजीवनी देने का काम शुरू किया है। नतीजे पॉजिटिव आए। अब वह अपने फायदे को एक पाठशाला के जरिए किसान भाइयों तक पहुंचा रहे हैं। वह अब तक हजारों किसानों को वर्मी कल्चर खेती का हुनर सिखा चुके हैं। अब यह जैविक किसान सरकार से जनपद को जैविक जिला घोषित किए जाने की मांग कर रहा है। आइए जानते है क्यों...

नेवादा विकासखंड के छोटे से गांव गोविंदपुर में रहने वाले उद्धो सिंह 20 साल पहले रासायनिक खाद का प्रयोग शुरू किया। इससे खेत की उर्वरता और उपज का स्वाद बदलता चला गया। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। इसी बीच उनकी मुलाकात किसान मेले में कृषि वैज्ञानिकों से हुई। यहां उन्हें जैविक खाद वर्मी कल्चर के बारे में जानने और समझने का मौका मिला। उन्होंने खेतों में वर्मी कल्चर खाद के प्रयोग की ठानी। पहले साल उन्हें कुछ ख़ास नतीजे नहीं मिले, लेकिन दूसरे साल उन्हें वर्मी कल्चर खाद के चौंकाने वाले नतीजे देखने को मिले। खेत को संजीवनी और उपज में नया स्वाद उन्हें मिला। जिसके बाद किसान उद्धो सिंह ने खुद का वर्मी कल्चर बेड बनाना शुरू किया। आज वह द्वारिका जैविक कृषि सेवा संस्थान के नाम से फार्म चलाकर किसान भाइयों को खाद मुहैया करा रहे हैं।

90 दिन में बनकर तैयार होती है खाद
किसान उद्धो सिंह ने बताया, सबसे पहले हम वर्मी बेड बनाते हैं। उसमें गोबर डालते हैं। गोबर ठंडा होने के बाद इसमें केंचुए डालते हैं। तकरीबन 90 दिन में यह खाद बनकर तैयार हो जाती है। इस खाद में 16 पोषक तत्व होते हैं। जो मिट्टी को संजीवनी प्रदान करते हैं। इसके प्रयोग के बाद से उपज का स्वाद एवं पैदावार बढ़ जाती है।

उद्धो सिंह को मिला चुका है बेस्ट फार्मर का अवार्ड।
उद्धो सिंह को मिला चुका है बेस्ट फार्मर का अवार्ड।
यह तस्वीर उद्धों सिंह के घर की है, जहां वो रासायनिक खाद तैयार कर रहे हैं।
यह तस्वीर उद्धों सिंह के घर की है, जहां वो रासायनिक खाद तैयार कर रहे हैं।

हर साल 8-10 लाख रुपये कमा रहे मुनाफा
किसान उद्धो सिंह ने बताया, उद्यान विभाग के मिली मदद के अनुसार उन्होंने 22 साल पहले 25 हजार रुपये लागत लगाकर जैविक खाद बनाने का काम शुरू किया। मौजूदा समय में वह खाद किसान भाइयों को बेचकर 8 से 10 लाख रुपये सालाना कमाते हैं। खाद की कीमत उन्होंने 30 रुपये प्रति किलो निर्धारित की है। जिले के करीब 10 हज़ार से अधिक किसान भाई उनके ग्राहक हैं। जो वर्मी कल्चर से बनी जैविक खाद का प्रयोग नियमित रूप से करते हैं।

उद्धों सिंह ने द्वारिका जैविक कृषि संस्थान खोला।
उद्धों सिंह ने द्वारिका जैविक कृषि संस्थान खोला।

किसानों को देते हैं टिप्स
खेती के साथ जैविक खाद का बिजनेस शुरू करने वाले किसान उद्धो सिंह पिछले 22 सालों में अपने जैसे सैकड़ों किसानों को जैविक खाद के फायदे को सिखा चुके हैं। इसके लिए वह खुद अपने द्वारिका जैविक कृषि सेवा संस्थान में किसान पाठशाला चलाते हैं। जहां किसान भाई व युवा खेती किसानी में प्रकृति प्रदत्त चीजों की जानकारी लेते हैं।

जनपद को जैविक जिला घोषित किया जाए
उद्धो सिंह ने सरकार से मांग की है, जनपद को जैविक जिला घोषित किया जाए। जिसके लिए उन्होंने काफी अर्से से प्रयास शुरू कर रखा है। वह प्रधान के माध्यम से लोगों को एकजुट करते हैं। उनको वर्मी कम्पोस्ट खाद के इस्तेमाल व उसके फायदे समझाते हैं। जिसमें वह बताते हैं कि कैसे वर्मी बेड बनाया जाए, कैसे उसमें केंचुए डाले जाए, कितने दिन में खाद तैयार हो जाएगी। अब तक जनपद में हजारों की संख्या के किसान भाई जैविक खाद का प्रयोग कर अपने खेतों को रासायनिक खाद से मुक्ति दिला चुके हैं।

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