सिराथू में शुरू हुआ अषाढ़ मेला:10 तस्वीरों में देखिए मेले की धूम

सिराथू2 महीने पहले
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मां शीतला देवी को पूर्वांचल की इष्ट देवी माना जाता है। - Dainik Bhaskar
मां शीतला देवी को पूर्वांचल की इष्ट देवी माना जाता है।

कौशाम्बी के सिराथू में मां शीतला के दरबार में लगने वाले अषाढ़ मेले की शुरुआत हो गई है। यहां सैकड़ों वर्षो से मेला लगता चला आ रहा है। कृष्ण पक्ष की षष्ठी से नवमी तक लगने वाले इस तीन दिवसीय मेले में दूरदराज से लाखों भक्त पहुंचते हैं। पूर्वांचल की ईष्ट देवी होने के कारण यहां लोगों का तांता लगा रहता है। ऐसी मान्यता है कि आषाढ़ माह की नवमी के दिन मां शीतला ने कड़ा धाम में ही कालकोटल नामक दैत्य का संहार किया था जिसके बाद से ही यहां आषाढ़ का मेला लगता है।

आषाढ़ मेले में मिर्जापुर,वाराणसी, जौनपुर अमेठी रायबरेली सोनभद्र, फतेहपुर,प्रतापगढ़ और प्रयागराज से भारी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।
आषाढ़ मेले में मिर्जापुर,वाराणसी, जौनपुर अमेठी रायबरेली सोनभद्र, फतेहपुर,प्रतापगढ़ और प्रयागराज से भारी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।
मेले में आने वाले लोग मां शीतला का विधि-विधान से पूजन अर्चन कर परिवार के लिए मंगल कामना करते हैं।
मेले में आने वाले लोग मां शीतला का विधि-विधान से पूजन अर्चन कर परिवार के लिए मंगल कामना करते हैं।
मां शीतला में मंदिर में मुख्य रूप से कोकाबेली को बर्फी व चंदिया मिठाई का भोग लगता है।
मां शीतला में मंदिर में मुख्य रूप से कोकाबेली को बर्फी व चंदिया मिठाई का भोग लगता है।
मिर्जापुर समेत पूर्वांचल के दर्जनों जिलों से नंगे पांव पालना लेकर मां शीलता देवी के मंदिर पहुंचते हैं।
मिर्जापुर समेत पूर्वांचल के दर्जनों जिलों से नंगे पांव पालना लेकर मां शीलता देवी के मंदिर पहुंचते हैं।
अषाढ़ मेले में घरेलू सामानों की दुकानें भी लगती हैं। जिसमें दूरदराज से आईं महिलाएं जमकर खरीदारी भी करती हैं। इसके अलावा यहां बूढ़े बुजुर्ग मुख्य रूप से लाठी की खरीददारी करते है।
अषाढ़ मेले में घरेलू सामानों की दुकानें भी लगती हैं। जिसमें दूरदराज से आईं महिलाएं जमकर खरीदारी भी करती हैं। इसके अलावा यहां बूढ़े बुजुर्ग मुख्य रूप से लाठी की खरीददारी करते है।
मेले में आए लोगों के लिए भजन व गीत के प्रोगाम का भी आयोजन किया जता है।
मेले में आए लोगों के लिए भजन व गीत के प्रोगाम का भी आयोजन किया जता है।
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