हरियाणा में मुक्केबाजी में दम दिखाएंगी UP की बेटियां:गांव की बॉक्सर बेटियों की कहानी, किराए के मैरिज हॉल में प्रैक्टिस कर पहुंची नेशनल चैंपियनशिप में

कुशीनगर3 महीने पहले

हरियाणा के हिसार में 7 दिवसीय (21-27 अक्टूबर) 5वें नेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में कुशीनगर की दो बेटियां अपराजिता और शिल्पा उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। वह हरियाणा में आज से शुरू हो रहे 5वें सीनियर नेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में दम दिखाएंगी।कोच राजेश गुप्ता बताते हैं कि वे अपने बेटे को बॉक्सिंग सिखा रहे थे। लड़कियां भी आने लगीं। फिर, उन्होंने किराए का मैरिज हॉल लेकर वहां सिखाना शुरू किया।

अपराजिता मणि और शिल्पा के संघर्षों की कहानी साधारण नहीं है। निम्न वर्ग के परिवार से संबंध रखने वालीं यह दोनों बेटियां कुशीनगर जैसे जिले की पिछड़े गांव हाटा से आती हैं। गांव तो छोड़िए जिले तक में बॉक्सिंग को लेकर कोई सुविधा नहीं है। इसके बावजूद ये जीत का परचम लहराते हुए आगे बढ़ी हैं। दोनों ही अपने-अपने भारवर्ग में प्रतिनिधित्व करने पहुचीं हैं। अब तक प्रदेश लेवल तक के बड़े टूर्नामेंट में शिल्पा ने 6 और अपराजिता ने 5 मेडल के साथ उत्तरप्रदेश की बेस्ट महिला बॉक्सर में अपना नाम दर्ज कराया है।

कोच राजेश गुप्ता बताते हैं कि बिना किसी सरकारी सुविधा के इन बच्चियों ने अपनी मेहनत की बदौलत यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने 2008 में अपने बेटे को बॉक्सिंग सिखाने के लिए ट्रेनिंग शुरू की थी। लड़कियां भी आगे आईं। अपने दोस्त से मैरिज हॉल कुछ दिनों के लिए मांगा, खेल ग्राउंड नहीं था। दोनों बेटियां विश्वास है कि बेहतर खेलेंगी और मेडल लेकर आएंगी।
कोच राजेश गुप्ता बताते हैं कि बिना किसी सरकारी सुविधा के इन बच्चियों ने अपनी मेहनत की बदौलत यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने 2008 में अपने बेटे को बॉक्सिंग सिखाने के लिए ट्रेनिंग शुरू की थी। लड़कियां भी आगे आईं। अपने दोस्त से मैरिज हॉल कुछ दिनों के लिए मांगा, खेल ग्राउंड नहीं था। दोनों बेटियां विश्वास है कि बेहतर खेलेंगी और मेडल लेकर आएंगी।

ऐसे आया खेल के लिए जुनून
शिल्पा बताती हैं कि छोटा भाई सुनील प्रदेश स्तर तक का बॉक्सिंग खिलाड़ी है। उसे देख वह भी घरवालों से जिद करती थीं कि खेल में करियर बनाएगी। पहले घरवालों ने बात नहीं सुनी। एक दिन भाई साथ ले गया। उत्साह देख कोच ने शिल्पा को रोज लाने के लिए कहा। इसके बाद भाई ने घरवालों को किसी तरह मना लिया। आर्थिक संकट आड़े न आए इसलिए भाई ने अपना करियर छोड़ दिया और पैसे कमाने लगा।

भाई सुनील ने अपना करियर सिर्फ इसलिए छोड़ दिया ताकि शिल्पा को खेल में पैसे की कमी नहीं आए। वह नौकरी करने चले गए।
भाई सुनील ने अपना करियर सिर्फ इसलिए छोड़ दिया ताकि शिल्पा को खेल में पैसे की कमी नहीं आए। वह नौकरी करने चले गए।

शिल्पा की उपलब्धियां

  • साल 2012 में बॉक्सिंग की दुनिया में कदम रखा। 2014 में आयोजित झांसी में सब जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोरखपुर मंडल की तरफ से खेलते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया।
  • साल 2019 में बनारस यूथ बॉक्सिंग चैंपियनशिप में अपने भारवर्ग की प्रदेश में बेस्ट बॉक्सर चुनी गईं।
  • अब तक बड़े टूर्नामेंट में 6 मेडल अपने नाम कर चुकी हैं।
  • हिसार के टूर्नामेंट में 48 किलो भार वर्ग में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहीं हैं।

मां ने दिया साथ, तो अपराजिता बन सकीं खिलाड़ी
5वें सीनियर नेशनल टूर्नामेंट में 57 किलो भार वर्ग में अपराजिता मणि उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उनके पिता भुवनेश्वर मणि हाटा से 3 किमी दूर पटनी गांव के किसान हैं। अपराजिता दो भाइयों में इकलौती बहन हैं। एक भाई बड़े हैं, और एक छोटा। अपराजिता का शुरू से ही पढ़ाई में कम खेल में ज्यादा मन लगता था। 2014 में हाटा इलाके की लड़कियों ने बॉक्सिंग में अच्छा प्रदर्शन किया। बात अपराजिता तक भी पहुंची तो उनमें भी इच्छा जागी और अपनी मां के सामने खिलाड़ी बनने की बात रखी। दरअसल, अपराजिता की मां भी अपने स्कूल के समय से ही खिलाड़ी बनने का सपना देखती आई हैं। इसलिए उन्होंने बेटी की बात को समझा। मां-बेटी दोनों ने मिलकर पूरे घर को तैयार कर लिया। फिर क्या था, अपराजिता की उड़ानें हिलोरें मारने लगीं। 2015 में अपराजिता ने बॉक्सिंग की दुनिया में कदम रखा।

अपराजिता की मां भी अपने स्कूल के समय से ही खिलाड़ी बनने का सपना देखती आई हैं। इसलिए उन्होंने बेटी की बात को समझा। मां-बेटी दोनों ने मिलकर पूरे घर को तैयार कर लिया।
अपराजिता की मां भी अपने स्कूल के समय से ही खिलाड़ी बनने का सपना देखती आई हैं। इसलिए उन्होंने बेटी की बात को समझा। मां-बेटी दोनों ने मिलकर पूरे घर को तैयार कर लिया।

अपराजिता की भी मुश्किलें कम नहीं थीं
अपराजिता के घर की कमाई का मुख्य स्रोत किसानी ही है। जब वह ट्रेनिंग के लिए घर जाती थी तो काफी देर हो जाती थी। शाम होने की वजह से दादा टोकने लगे, लेकिन मां किसी तरह से समझा लेती थीं। इसके बाद जब अपराजिता को मेडल मिलने लगे तो घर में खुशियां छा गईं।

शिल्पा यादव का कहना है कि मैं संघर्षों से नेशनल तक का सफर कर पाई हूं। मेरा भी सपना था कि मैं नेशनल खेलूं। अब पूरा हो रहा है। मैं पूरी कोशिश करुंगी कि गोल्ड लेकर ही वापस लौटूं।
शिल्पा यादव का कहना है कि मैं संघर्षों से नेशनल तक का सफर कर पाई हूं। मेरा भी सपना था कि मैं नेशनल खेलूं। अब पूरा हो रहा है। मैं पूरी कोशिश करुंगी कि गोल्ड लेकर ही वापस लौटूं।

अपराजिता की उपलब्धियां

  • 2016 में पहली बार बॉक्सिंग में बेहतर प्रदर्शन करते हुए 5 गोल्ड मेडल अपने नाम किए।
  • 2019 में मिर्जापुर में आयोजित यूथ बॉक्सिंग टूर्नामेंट में प्रदेश की बेस्ट बॉक्सर का खिताब अपने नाम किया।
  • 2019-20 में गोरखपुर विश्वविद्यालय की तरफ से ऑल इंडिया इंटरनेशनल बॉक्सिंग कॉन्टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन करते हुए उड़ीसा में आयोजित फर्स्ट खेलो इंडिया चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल जीता।
  • हरियाणआ के हिसार में 5वें सीनियर नेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में 57 किलो भार वर्ग में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगी।

अपराजिता बताती हैं कि उन्होंने बॉक्सिंग का करियर 2015 में चुना। स्टेट में 5 गोल्ड मेडल जीते। इसके अलावा बेस्ट बॉक्सर मिर्जापुर चुनी गईं। 3 नेशनल भी खेल चुकी हूं। उड़ीसा में आयोजित फर्स्ट खेलो इंडिया में ब्रांज मेडल जीता। अब सीनियर खिलाड़ियों के साथ खेलूंगी, हालांकि कोरोना ने एक साल बर्बाद कर दिया। लेकिन इरादे मजबूत हैं। हिसार के 5th नेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में मेडल लाने की कोशिश करुंगी।

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