कुशीनगर में कुम्हारों के घरों में है अंधेरा:बिजली, शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की है किल्लत, विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

कुशीनगर7 महीने पहले
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कुशीनगर में कुम्हारों की जिंदगी में सरकारी सुविधाओं के न होने से छाया आर्थिक संकट। - Dainik Bhaskar
कुशीनगर में कुम्हारों की जिंदगी में सरकारी सुविधाओं के न होने से छाया आर्थिक संकट।

कुशीनगर में दीवाली के पहले कुम्हार मिट्टी लकड़ी आदि चीजों की व्यवस्था करके मिट्टी के दिये, खिलौने बनाते हैं। इन कुम्हारों की जिंदगी में अंधेरा रहता है। क्योंकि इनके घरों में न तो बिजली आती है। न ही अन्य मूलभूत सुविधाओं का इंतजाम है। यहां तक की कप्तानगंज नगर पंचायत के नगर पंचायत अध्यक्ष के घर के पीछे ही रहने वालों के घर में मूलभूत सुविधाओं के न होने से दोनों के घरों में अंधेरा छाया है।

तहसील के ठीक पीछे रहने वालों को नहीं मिल रही सुविधाएं
जिले के नगर पंचायत कप्तानगंज वार्ड नंबर सात में रहने वाले जगरोपन प्रजापति एक बुजुर्ग कुम्हार है। जिनके तीन बेटे हैं। जो सभी अपना हिस्सा लेकर अलग रहकर चाक पर मिट्टी के बर्तन बनातो हैं। सरकार लोगों को ग्रामीण इलाकों में सभी परिवारों तक आवास , शौचालय और अन्य सरकारी योजनाओं को पहुंचाने का दावा करती है। इतना ही नहीं लोगों को मिलने वाला कैरोसिन तेल भी इस तर्क के साथ सरकार ने बन्द कर दिया कि हर परिवार को मुफ्त बिजली कनेक्शन उपलब्ध करा दिया गया है। नगरपंचायत में तहसील के ठीक पीछे में रहने वाले जगरोपन और उनके तीन बेटों के लगभग 17 लोगों का परिवार आवास , शौचालय एव विधुत जैसी मूलभूत सुविधाओं से ही वंचित है।

मिट्टी लेने जाने पर खानी पड़ती है मार व गाली
जगरोपन प्रजापति ने बताया कि मैं मिट्टी का सामान बनाने वाला कारीगर हुं। नगर पंचायत में घर होने के बाद भी कोई सुविधा नहीं मिली। किसी तरह गुजर बसर हो रहा है। मिट्टी लेने जाता हूं तो लोग गाली देते हैं। कभी-कभी तो मार भी खानी पड़ जाती है पर हम गरीबों की सुनने वाला है। हम लोगों के लिए कारीगरी भी ऐसी हो गई कि मजदूरी भी निकाल पाना बहुत मुश्किल है। लागत निकल जाए वही बहुत है। मौसम शुरू में खराब था और यही कारण रहा है कि घर भी इतना ज्यादा नहीं है की उसमें काम कर सकूं। इसलिए जब मौसम सही हुआ है तो मिट्टी के लिए बना रहे सरकार अगर सुविधाएं देती तो हमारा भी गुजारा हो सकता।