भाजपा ने जीता गोला उपचुनाव:​​​​​​​ सपा को 34 हजार वोट से हराया; पढ़िए क्यों इसे जीतने के लिए झोंकी ताकत

लखीमपुर-खीरीएक महीने पहले

लखीमपुर खीरी की गोला गोकर्णनाथ सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी अमन गिरी ने बड़ी जीत हासिल की है। उन्होंने सपा प्रत्याशी विनय तिवारी को 34,298 वोट के अंतर से हराया है। जीत मार्जिन में उन्होंने अपने पिता अरविंद गिरी का रिकार्ड भी तोड़ दिया है। अरविंद गिरी ने 2022 में विनय तिवारी को 29,294 वोटों के मार्जिन से हराया था।

जीत के बाद अमन गिरी ने पिता अरविंद के सपनों को आगे बढ़ाने का वादा किया है। वहीं, हार के बाद विनय तिवारी ने इस चुनाव को "सरकार बनाम विनय तिवारी" होने की बात कही। उन्होंने कहा कि उधर से पूरा सिस्टम और प्रशासन था। इधर अकेला मैं।

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अमन गिरी को 1 लाख 24 हजार वोट मिले
अमन गिरी को 1,24,810 वोट मिले। जबकि सपा के विनय तिवारी को 90,512 वोट मिले हैं। कुल 2,23,352 वोट काउंट किए गए हैं। जबकि इसमें 1,771 वोट नोटा को पड़े हैं। अमन गिरी ने पहले ही राउंड से बढ़त बना ली थी। पहले राउंड में उन्हें 3877 वोट मिले। जबकि विनय तिवारी को 2231 वोट मिले।

बढ़त का यह सिलसिला 32वें यानी आखिरी राउंड की काउंटिंग तक चला। एक बार भी अमन पीछे नहीं हुए, हर राउंड में सपा पर उनकी बढ़त बढ़ती चली गई।

भाजपाई जीत की जश्न में होली खेल रहे हैं।
भाजपाई जीत की जश्न में होली खेल रहे हैं।
जीत का जश्न मनाते भाजपाई।
जीत का जश्न मनाते भाजपाई।
वोटों की गिनती लगातार जारी है। 32 राउंड तक वोटों की गिनती चलेगी।
वोटों की गिनती लगातार जारी है। 32 राउंड तक वोटों की गिनती चलेगी।

भाजपा के लिए इस जीत के मायने?
गोला गोकर्णनाथ विधानसभा सीट पर जीत के बड़े मायने हैं। पहले तो योगी 2.0 सरकार में हुए उपचुनावों में यह लगातार भाजपा की तीसरी जीत है। आगे मैनपुरी लोकसभा सीट जोकि मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद खाली हुई है। रामपुर विधानसभा सीट जोकि आजम खान की विधानसभा सदस्यता रद्द होने के बाद खाली हुई। इन दोनों ही सीटों पर अगले महीने चुनाव होने हैं। ऐसे में गोला सीट पर जीत से कार्यकताओं का मनोबल बढ़ा है।

यूपी में कहा जाता है कि उपचुनाव सत्ता पक्ष का होता है। इसके बावजूद भाजपा ने इस सीट पर कड़ी मशक्कत की। गोला सीट पर अरविंद गिरी की मौत के बाद सहानुभूति की लहर तो थी ही। साथ ही भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में 39 स्टार प्रचारक भी चुनाव प्रचार करने गोला पहुंचे। इसमें खुद सीएम योगी भी शामिल थे। जबकि सपा मुखिया अखिलेश यादव ने गोला में प्रचार नहीं किया। सपा के बड़े नेताओं में सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ही गोला में रहे। जिसका खामियाजा सपा को भुगतना पड़ा।

मतगणना कर्मी वोटों की गिनती करते हुए।
मतगणना कर्मी वोटों की गिनती करते हुए।

मुलायम के निधन के बाद पहला चुनाव हारे अखिलेश
गोला सीट पर होने वाला उपचुनाव अखिलेश यादव के लिए भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। वजह- मुलायम के निधन के बाद यह पहला चुनाव था। जानकारों का मानना है कि पिता की मौत की वजह से अखिलेश यादव गोला सीट पर प्रचार में समय नहीं दे पाए। लेकिन यह उनकी रणनीति और उनके रणनीतिकारों की परीक्षा जरूर थी।

अभी तक के रुझान में भाजपा आगे चल रही है।
अभी तक के रुझान में भाजपा आगे चल रही है।

प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भूपेंद्र चौधरी पहला चुनाव जीते
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भूपेंद्र चौधरी का यह पहला चुनाव था। इस चुनाव के लिए उन्होंने पूरी मेहनत भी की। 27 अक्टूबर से ही भूपेंद्र चौधरी ने गोला गोकर्णनाथ में डेरा डाल दिया था। वह चुनाव से एक दिन पहले तक वहां रहे। इस दौरान उन्होंने वहां रैलियां की और कार्यकर्ताओं से मिलकर उनमें जोश भरा।

मतगणना शुरू होने से पहले शिव मंदिर पूजा करते भाजपा भाजपा प्रत्याशी अमन गिरी।
मतगणना शुरू होने से पहले शिव मंदिर पूजा करते भाजपा भाजपा प्रत्याशी अमन गिरी।

परसेप्शन की लड़ाई भाजपा ने जीती
अब भाजपा के सामने निकाय चुनाव है साथ ही 2024 का लोकसभा चुनाव है। इन चुनावों के लिए राजनीतिक दल इस चुनाव को सेमीफाइनल मान कर चल रही थी। इस चुनाव को बड़े अंतर से जीतने के बाद परसेप्शन की लड़ाई में आगे हो गई है। जानकार मानते हैं कि इस चुनाव में अगर भाजपा की हार होती तो मनोवैज्ञानिक लाभ सपा को मिल जाता। यही वजह रही कि भाजपा ने अपने स्टार प्रचारकों की पूरी फौज गोला उपचुनाव में उतार दी। जिसका फायदा मिला और अमन गिरी रिकार्ड मार्जिन से जीते।

मतगणना शुरू होने से पहले शिव मंदिर पूजा करते सपा प्रत्याशी विनय तिवारी।
मतगणना शुरू होने से पहले शिव मंदिर पूजा करते सपा प्रत्याशी विनय तिवारी।

लगातार तीसरा चुनाव हारे विनय तिवारी
विनय तिवारी लगातार तीसरा चुनाव हार गए हैं। परिसीमन के बाद गोला सीट 2012 में अस्तित्व में आई थी। जिसके बाद से इस सीट पर सपा के विनय तिवारी ने कब्जा जमाया था। तब कुल 64.7% वोटिंग हुई थी। तब विनय तिवारी को 37% वोट शेयर के साथ 82439 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर बसपा कैंडीडेट था।

2022 में अरविंद गिरी फिर जीते। उनके निधन के बाद यह सीट खाली हो गई थी।
2022 में अरविंद गिरी फिर जीते। उनके निधन के बाद यह सीट खाली हो गई थी।

मुस्लिम वोटों का भी नहीं मिला फायदा
गोला विधानसभा सीट पर मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका में माना जाता है। यहां 3 लाख 95 हजार 433 की आबादी में मुस्लिम 80 हजार के आसपास हैं तो पिछड़ी जातियां भी 1.25 लाख से ज्यादा हैं। जबकि दलितों की संख्या भी यहां अच्छी खासी है। दलितों की आबादी 1.20 लाख के आसपास है। बाकी यहां ब्राहमण मतदाताओं का प्रभाव भी माना जाता है। हालांकि, इसके बावजूद मुस्लिम वोटों का फायदा सपा को नहीं मिल पाया।

बसपा-कांग्रेस के चुनाव न लड़ने का भी सपा को फायदा नहीं मिला
इस चुनाव में बसपा और कांग्रेस नहीं लड़ रही थी। ऐसे में सपा निश्चिंत थी कि उन पार्टियों का वोट उनकी तरफ शिफ्ट हो सकता है। हालांकि, रिजल्ट के बाद यह अंदाजा भी गलत साबित हुआ। बीते तीन बार की तरह इस बार भी विनय तिवारी को हार का सामना करना पड़ा।

अरविंद गिरी के बेटे हैं अमन गिरि
भाजपा प्रत्याशी अमन गिरि दिवंगत भाजपा विधायक अरविंद गिरी के बेटे हैं। 26 साल के अमन ने हैदराबाद में रहकर लॉ की पढ़ाई की है। अमन गिरि की मां का नाम सुधा गिरि है। अमन का जन्म 1 जून, 1996 में हुआ था। उन्होंने बीबीए और एलएलबी ऑनर्स तक पढ़ाई की है। वह अभी बैचलर हैं। अमन की दो बहनें भी हैं।

ये फोटो भाजपा प्रत्याशी अमन गिरी की है।
ये फोटो भाजपा प्रत्याशी अमन गिरी की है।

पिता के सामने ही एक्टिव थे अमन
अमन ने 2022 के चुनाव में पिता अरविंद गिरि के साथ चुनावी कमान संभाली थी। पिता की सारी सभाओं, रैलियों की तैयारियां वो खुद करते थे। अमन के पिता अरविंद गिरि साल 1996, 2002, 2007 में हैदराबाद खीरी विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। बाद में हैदराबाद खीरी विधानसभा सीट का नाम गोला गोकर्ण नाथ सीट कर दिया गया। जहां से 2017 और 2022 में भाजपा के टिकट पर अरविंद विधायक चुने गए थे।​​​​​​​

जीत के बाद अमन गिरी को कार्यकर्ताओं ने फूल मालाओं से लाद दिया।
जीत के बाद अमन गिरी को कार्यकर्ताओं ने फूल मालाओं से लाद दिया।

कार में हार्ट अटैक से हुई थी अरविंद गिरि की मौत
बता दें, अरविंद गिरी ही गोला गोकर्ण नाथ सीट से भाजपा विधायक थे। उनकी मौत के बाद उपचुनाव हो रहा है। इस सीट से पांचवी बार विधायक बने अरविंद गिरि की मौत हार्ट अटैक से हुई थी। 6 सितंबर को कार में हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई थी।