ग्राउंड रिपोर्टलखीमपुर में बेटी की हत्या के बाद मां की आपबीती:बोली- मेरे सामने मेरी बेटी को लात से मार रहे थे, पुलिस ने केस बदल दिया

लखीमपुर-खीरी7 दिन पहले

लखीमपुर में दो दलित बेटियों की रेप और हत्या के बाद एक और बेटी को मार दिया गया। लखीमपुर का यह दूसरा मामला 12 सितंबर से शुरू होता है और 16 सितंबर को पीड़िता की मौत के साथ खत्म होता है। पुलिस ने इसको मारपीट से जुड़ा मामला बताया है।

उधर, पीड़िता की मां ने गांव के दो दबंग युवकों सलीमुद्दीन और आरिफ पर रेप के बाद मारपीट का आरोप लगाया है। मां ने कहा, ''मेरी बेटी की दो महीने बाद शादी थी। घर में तैयारियां चल रही थीं। लेकिन अब तो हमारी बेटी ही नहीं रही।'' वहीं गांव के लोगों ने बताया कि आरोपी युवक पहले भी लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करते रहे हैं।

12 सितंबर को हुई थी लड़की के साथ हैवानियत
12 सितंबर की दोपहर लड़की के साथ घर के अंदर घुसकर दो युवकों सलीमुद्दीन और आरिफ ने मारपीट की। घायल लड़की की 16 सितंबर को CHC में इलाज के दौरान मौत हो गई। मामले में पुलिस की थ्योरी घरवालों के बयान से बिल्कुल अलग है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को 17 सितंबर को गांव के बाहर से गिरफ्तार कर लिया।

भास्कर की टीम पूरे मामले की पड़ताल करने शहर से 35 किलोमीटर दूर पीड़िता के गांव पहुंची। गांव के अंदर जाते ही हमें पुलिस की टीमें दिखाई दीं। गांव को छावनी में बदल दिया गया है। मामला दो समुदायों से जुड़ा होने के कारण माहौल तनाव भरा है। यहां 10 से ज्यादा PAC और 20 पुलिस के जवान तैनात हैं। पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है। हमने 1-1 करके लोगों से बात की। आइए जानते हैं पीड़ित परिवार, आरोपी परिवार और गांव वालों का क्या कहना है…

पढ़िए 12 सितंबर के वो 30 मिनट, जिसमें मां के सामने बेटी के साथ गलत काम और मारपीट हुई...

ये फोटो अस्पताल की है। बेटी के शव के पास मां बैठी हुई है।
ये फोटो अस्पताल की है। बेटी के शव के पास मां बैठी हुई है।

अपनी बेटी के शव के पास बैठी मां ने रोते हुए बताया, "मैं घर के पास पहुंची, तो अंदर से मेरी बेटी के चिल्लाने की आवाज आ रही थी। मैं सारा सामान बाहर छोड़कर घर के अंदर भागी। घर का दरवाजा अंदर से बंद था। मैं पीछे वाले रास्ते से घर के अंदर गई। वहां देखा सलीमुद्दीन और आशिफ मेरी बेटी के साथ गलत काम कर रहे हैं। मुझे देखकर आशिफ मेरे पास आया और मेरा मुंह दबा लिया। जब मैंने चिल्लाना शुरू किया तो आशिफ ने मुझे बहुत मारा।"

उन्होंने कहा, "सलीमुद्दीन मेरी बेटी को बाल पकड़कर मारने लगा। वो उसे बोल रहा था कि चिल्लाना बंद कर वरना जान से मार दूंगा। तभी आशिफ ने मुझे जमीन पर गिराकर मेरी बेटी के पास चला गया। दोनों मेरे सामने मेरी बेटी को लात से मार रहे थे। दुपट्टे से उसका गला दबा रहे थे। मैं रोक रही थी, तो मुझे भी मार रहे थे। शोर सुनकर जब गांव के लोग आने लगे, तो दोनों मेरी बेटी के हाथ पर धारदार हथियार मारकर मौके से भाग गए।"

पीड़िता की मां ने बताया कि मेरी बेटी की शादी पास के गांव में तय हुई थी। हमारे सारे सपने अधूरे रह गए।
पीड़िता की मां ने बताया कि मेरी बेटी की शादी पास के गांव में तय हुई थी। हमारे सारे सपने अधूरे रह गए।

मां ने कहा, "मेरी बेटी के मुंह, नाक और हाथ से बहुत खून निकल रहा था। मैं चाहती हूं कि मेरी बेटी को मारने वालों को फांसी की सजा मिले। इन लोगों ने मेरी बेटी को मार दिया है। मेरी बेटी की शादी तय थी। दो महीने बाद उसकी शादी थी। शादी का सामान भी आ चुका था। अब हम उस सामान का क्या करेंगे। जिन लड़कों ने मेरी बेटी के साथ गलत काम किया है, वो लोग सबको डराते हैं। गांव में उनके समुदाय के लोग ज्यादा हैं, इसलिए ज्यादा कोई कुछ बोल नहीं रहा है। सब लोग उनसे डरते हैं।''

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मां का आरोप- पुलिस ने केस को बदलवा दिया
मां का कहना है, "मामले में पुलिस ने केस बदलवा दिया। हमने जो बोला, उसके हिसाब से कुछ भी FIR नहीं लिखी गई। हम लोग बेटी को इलाज के लिए CHC ले गए थे। वहां से डॉक्टर ने उसको जिला अस्पताल ले जाने के लिए बोला। लेकिन पानी बहुत गिर रहा था, इसलिए वापस घर ले आए। पुलिस को मामले की जानकारी थी। उसके बाद भी बेटी का मेडिकल नहीं करवाया गया। पुलिस मामले को दबाने में लगी हुई है।"

अब पढ़िए इस मामले में आरोपी सलीमुद्दीन की मां का क्या कहना है...

आरोपी सलीमुद्दीन की मां कहती हैं, "मेरे बेटे को फंसाया जा रहा है। मेरा बेटा तो घर के अंदर गया तक नहीं था। लड़की की मां ने मेरे बेटे को पत्थर मारा था। जिसमें वह घायल हो गया था। हंगामे के बाद हम लोग लड़की के घर गए थे। वहां पर लड़की हमें ठीक लग रही थी। अभी 3 दिन पहले लड़की की हालत खराब हुई है। पुलिस को मामले में सही से जांच करनी चाहिए। सच सामने आएगा। मेरे बेटे ने कुछ नहीं किया है। हम लोग तो इन लोगों को पहले से जानते हैं। पता नहीं ये लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं।'' इतना कहने के बाद वह सिर पकड़कर रोने लगी।

पढ़िए इस मामले में पड़ोसियों और गांव वालों का क्या कहना है...

जिस गांव में घटना हुई है, वह मुस्लिम बाहुल्य है। गांव में 400 परिवार मुस्लिम के हैं, जबकि 200 परिवार हिंदू के हैं। पीड़िता के पड़ोसी ने दबी जुबान में कहा, "गांव में लड़कियों का जीना मुश्किल है। दोनों लड़के सलीमुद्दीन और आशिफ पहले भी लड़कियों को परेशान करते रहे हैं। इन दोनों का गांव में व्यवहार भी लोगों से अच्छा नहीं था। अक्सर ही इनका विवाद होता रहता है।"

घटना के बाद से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। कोई भी घर के बाहर दिखाई नहीं दे रहा है।
घटना के बाद से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। कोई भी घर के बाहर दिखाई नहीं दे रहा है।

वहीं, गांव के कुछ लोगों का कहना है, "लड़कों को फंसाया जा रहा है। हम लोग इन लोगों को पहले से जानते हैं। ये लोग ऐसा नहीं कर सकते। दोनों लड़के अपने पिता के साथ काम करते हैं। परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे।" सभी से बात करने के बाद हम लोगों ने गांव का मुआयना किया। हम लोगों के सामने कड़ी सुरक्षा के बीच पीड़िता का शव गांव लाया गया। 15 मिनट के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए भी भेज दिया गया।

पीड़िता के रिश्तेदारों ने बताया, "वह 8वीं तक पढ़ी थी। उसकी और पढ़ने की इच्छा थी। मगर, घर के हालात ऐसे नहीं थे जो बेटी को आगे पढ़ाया जाता। इसके पिता की मौत कई साल पहले ही हो चुकी है। बड़ा भाई मजदूरी करता है। मां भी कुछ काम करती है, उसी से घर का खर्चा चलता है।"

मामला दो समुदायों के बीच होने के कारण गांव में तनाव है। गांव में बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स लगा दी गई है।
मामला दो समुदायों के बीच होने के कारण गांव में तनाव है। गांव में बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स लगा दी गई है।

पीड़िता का 12 सितंबर का एक वीडियो सामने आया है। अब पढ़िए उसने क्या बताया था...

"12 सितंबर को मेरा भाई सुबह मिल पर मजदूरी करने के लिए निकल गया। मां कुछ सामान लेने बाजार गई थी। मैं किचन में खाना बना रही थी। तभी किसी के घर के अंदर कूदने की आवाज आई। मैं बाहर निकली, तो देखा सलीमुद्दीन और आशिफ सामने खड़े थे। मैं उनको देखकर अंदर आने लगी तो आशिफ ने मुझे पीछे से पकड़ लिया।"

उसने बताया था, "वो मुझे छोड़ नहीं रहा था। सलीमुद्दीन मेरे मुंह में कपड़ा लगाने लगा। मैं चिल्लाने लगी तो दोनों ने मुझे जान से मारने की धमकी दी। दोनों ने मुझे बहुत मारा। दोनों मुझे गलत नीयत से छू रहे थे। वो लोग मुझे लिटाने लगे, तो मैंने पास में रखी ईंट उनके सिर पर मार दी। जिसके बाद दोनों ने मुझे लात से मारना शुरू कर दिया।"

चौकी इंचार्ज सस्पेंड, बिसरा प्रिजर्व किया गया
मामले में शनिवार को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद चौकी इंचार्ज सुनील कुमार सिंह को सस्पेंड कर दिया है। डॉक्टरों के पैनल ने शव का पोस्टमॉर्टम किया। इसमें शरीर पर दो चोट के निशान मिले हैं। जोकि ओल्ड इंजरी है। मौत का सही कारण पता करने के लिए बिसरा प्रिजर्व किया गया है। खुद एएसपी अरुण सिंह इस मामले की जांच कर रहे हैं।

शुरू में मारपीट की धाराओं में पुलिस ने दर्ज किया था केस
मामले में पुलिस ने पहले आईपीसी की धारा-323, 504 और 506 लगाई थी। पुलिस पर दबाव बढ़ने और लड़की की मौत के बाद धारा-324 और 304 जोड़ी। एक्सपर्ट बताते हैं कि 323, 504 साधारण मारपीट में धाराएं लगाई जाती हैं। 506 धमकी देने में लगाई जाती है। साथ ही, किसी को इतना मारना कि उसकी मौत हो जाए तो धारा-324 लगाई जाती है। अगर पीड़ित की मौत हो जाए तो धारा-304 यानी गैर-इरादतन हत्या लगाई जाती है।

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