लखीमपुर से अरदास की ग्राउंड रिपोर्ट:6 राज्यों से जुट रहे 30 हजार से ज्यादा किसान, लोगों के लिए 30 एकड़ में लगी धान की फसल कटवा दी

लखीमपुर2 महीने पहले

लखीमपुर हिंसा में 3 अक्टूबर को मारे गए 4 किसानों की अंतिम अरदास का कार्यक्रम घटनास्थल से कुछ दूरी पर आयोजित किया गया है। अंतिम अरदास और कलश यात्रा के मद्देनजर किसानों की तैयारी रविवार से शुरू हो गई है। प्रशासन ने भी अपनी कमर कस ली है।

आयोजकों का कहना है कि अंतिम अरदास कौड़ियाला घाट गुरुद्वारे में ही होना है। रविवार से ही वहां अखंड पाठ शुरू कर दिया गया है। प्रदेश के 6 राज्यों से 30000 से ज्यादा किसानों के आने की संभावना है। इसमें यूपी, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र और उत्तराखंड के किसान हैं।

तिकोनिया में कार्यक्रम आयोजक किसान नेता राम सिंह ढिल्लन ने बताया कि हमारा धरना प्रदर्शन 3 अक्टूबर को महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज प्ले ग्राउंड में था, लेकिन वह जगह काफी छोटी है। वहां इतनी बड़ी भीड़ नहीं पहुंच सकती है। ऐसे में हमने घटनास्थल से 500 मीटर दूर कक्कड़ फार्म हाउस पर दूसरे प्रदेश से आ रहे किसानों के ठहरने का इंतजाम किया है। यहां लगभग 30 एकड़ में धान की फसल लगी थी। किसानों के लिए उन्होंने वह फसल कटवा दी है। अब वहां तैयारियां चल रही है।

यह फार्म हाउस एक किसान का है, जहां लगभग 30 एकड़ में धान की फसल लगी थी। किसानों के लिए उन्होंने वह फसल कटवा दी है।
यह फार्म हाउस एक किसान का है, जहां लगभग 30 एकड़ में धान की फसल लगी थी। किसानों के लिए उन्होंने वह फसल कटवा दी है।

गुरुद्वारे के साथ-साथ कई जगह चलेगा लंगर

राम सिंह ढिल्लन ने बताया कि कक्कड़ फार्म हाउस पर किसानों के रुकने और लंगर की व्यवस्था भी की गई है। इसके साथ ही गुरुद्वारे में भी लंगर चलाया जाएगा। यही नहीं क्षेत्रीय लोगों ने भी जगह जगह लंगर चलाने का आश्वासन दिया है। साथ ही गाजीपुर बॉर्डर पर लंगर चलाने वाली कई संस्थाएं भी लखीमपुर पहुंचेंगी। किसानों को खाने-पीने में कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

2000 वालंटियर संभालेंगे व्यवस्था

लखीमपुर हिंसा में शहीद किसानों की अंतिम अरदास में शामिल होने आ रहे देश भर के किसानों की व्यवस्था की जिम्मदारी 2000 वालंटियर पर होगी। आयोजक राम सिंह ढिल्लन ने बताया कि यह दुःख की घड़ी है। हो सकता है कि भीड़ में कुछ अराजक तत्व भी हों जो माहौल बिगाड़ने का काम करे। ऐसे लोगों पर नजर रखने के लिए लगभग 2000 वालंटियर की टीम तैयार की गई है। साथ ही साथ हम प्रशासन का भी सहयोग करेंगे, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।

इसमें यूपी, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र और उत्तराखंड जैसे प्रदेश से 30000 से ज्यादा किसानों के आने की संभावना है।
इसमें यूपी, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र और उत्तराखंड जैसे प्रदेश से 30000 से ज्यादा किसानों के आने की संभावना है।

लखीमपुर पुलिस प्रशासन के सामने हैं चुनौती

लखीमपुर हिंसा के बाद किसान नेता राकेश टिकैत की दी हुई टाइम लाइन खत्म हो गई है। मांगों में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के पद से अजय मिश्र को हटाना शामिल है। हालांकि, ऐसा अभी हुआ नहीं है। लखीमपुर पहुंचने वालों में राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी और बलविंदर सिंह राजेवाल जैसे 80 किसान नेता भी शामिल होंगे। ऐसे में किसानों को संभालने में पुलिस प्रशासन के सामने कई चुनौतियां हैं।

  • किसानों के साथ सामंजस्य बनाकर पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्वक निपटाना होगा। देश भर से आए लोगों में कई ऐसे भी होंगे जिनमें किसानों की मौत को लेकर आक्रोश होगा।
  • आयोजन स्थल से महज तीन किमी दूर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र का पैतृक गांव बनवीरपुर है। ऐसे में वहां की सुरक्षा का जिम्मा भी पुलिस को उठाना होगा।
  • लखीमपुर में बड़ी संख्या में किसान इकठ्ठा हो रहे हैं। ऐसे में 3 अक्टूबर जैसी कोई हिंसा न होने पाए इसका भी पुलिस प्रशासन को ख्याल रखना होगा।
शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अर्ध सैनिक बलों की तैनाती कर दी गई है।
शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अर्ध सैनिक बलों की तैनाती कर दी गई है।

क्या हैं सरकार की तैयारियां

शहीद किसानों के लिए अंतिम अरदास को देखते हुए सरकार ने प्रदेश भर हिंसात्मक टकराव रोकने के लिए सरकार ने प्रदेश के 13 जिलों में 20 वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तैनात किए हैं। इन्हें 20 जिलों में अगले आदेश तक कैंप करने के लिए कहा है। अकेले लखीमपुर में 10 आईपीएस ऑफिसर अलग से लगाए हैं। टकराव की आशंका के तहत एहतियात के तौर पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी गई है। इधर, प्रदेशभर में 18 अक्तूबर तक पुलिसकर्मियों की छुट्टी बंद कर दी गई है।

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