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इस अस्पताल को स्ट्रेचर नहीं, नाव की जरूरत:लखीमपुर खीरी के जिला अस्पताल गेट पर चार महीनों से भरा है गंदा पानी, मरीज और तीमारदार परेशान; अफसर कर रहे अनदेखी

लखीमपुर खीरी2 महीने पहले
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बारिश के चलते ठेले पर अपने लेकर अपनी बच्चे को दिखाने जाती महिला। - Dainik Bhaskar
बारिश के चलते ठेले पर अपने लेकर अपनी बच्चे को दिखाने जाती महिला।

लखीमपुर खीरी जिला अस्पताल के मेन गेट में करीब चार महीनों से बारिश का पानी भरा हुआ है। जिसके चलते मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को दैनिक भास्कर की टीम ने अस्पताल पहुंचकर हकीकत परखी। जिला अस्पताल गेट में घुसते ही एक युवक तीमारदार को लेकर आ रहा था। वह परेशान दिख रहा था। टीम ने जब उससे पूछा- क्या स्ट्रेचर चाहिए। यह सुनकर तीमारदार दबी हुई आवाज में बोला- स्ट्रेचर नहीं साहब, अब नाव की व्यवस्था करवा दीजिए...तंज कसकर वह अपने मरीज को लेकर सरकारी सिस्टम को कोसता हुआ अंदर चला गया।

जिम्मेदार कर रहे अनदेखी

जिम्मेदारों से जब इस समस्या को लेकर सवाल पूछा जाता है तो उनके पास एक ही जवाब है। अस्पताल की पुरानी इमारतें तोड़ी जाएंगी। यहां मेडिकल काॅलेज की बिल्डिंग बनेंगी। पुरानी बिल्डिंग कब टूटे और नई बने इसका कुछ पता नहीं है। इसलिए मरीज व उनके तीमारदार उसी गंदे पानी में उसी गंदे पानी से गुजरने को मजबूर हैं। जिसके चलते संक्रमण और दूसरी गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा भी बना हुआ है।

गंदे पानी से होकर तीमारदारों को डेली गुजरना पड़ता है।
गंदे पानी से होकर तीमारदारों को डेली गुजरना पड़ता है।

वार्डों में घुस जाता है पानी

लखीमपुर खीरी की करीब 44 लाख आबादी है। जो जिला अस्पताल पर डिपेंडेंट है। क्षेत्रफल के हिसाब से जिले की सीमाएं नेपाल बार्डर तक जुड़ी है। इस लिहाज से काफी दूर दूर के मरीज यहां इलाज कराने आते है। उनके साथ में तीमारदार भी आते हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से करीब चार महीने से अस्पताल में बरसात का गंदा पानी भरा है। मरीजों और तीमारदारों को उसी में होकर निकलना पड़ता है। सोमवार को हुई झमाझम बारिश से यह गंदा पानी जिला अस्पताल में बने वार्डों में भी घुसने लगा।

जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान, लगातार अनदेखी कर रहे हैं।
जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान, लगातार अनदेखी कर रहे हैं।

कई मरीज गिरकर हो चुके घायल

जल निकासी की व्यवस्था न होने से जनरल वार्ड, आई वार्ड, सेफ्टिक वार्ड, मेडिकल वार्ड, काॅर्डियोलॉजी वार्ड, और सिटी स्कैन,अल्ट्रासाउंड एवं कोविड टीका लगवाने जाने के लिए इसी गंदे पानी मे होकर जाना पड़ता है। पानी काफी समय से भरा है। तो इसमें दलदल भी हो गया है। जिसमँ गिरकर कई बार मरीज व तीमारदार घायल भी हो चुके है। वार्डों के सामने जलभराव होने से अस्पताल में भर्ती मरीज व तीमारदार परेशान हैं। लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

गंदे पानी से संक्रामक रोगों का खतरा

जिला अस्पताल में यह बरसात का गंदा पानी हर वर्ष बारिश के दिनों में भर जाता है जो कि बरसात के महीने गुजर जाने के बाद भी भरा रहता है। इससे जहरीले मछर भी पैदा हो रहें हैं। जिनसे संक्रमण रोगों का भी खतरा बना रहता है। उधर कीड़े मकोड़े भी पानी से निकल कर वार्ड में भर्ती मरीजों के पास पहुच जाते है। भर्ती मरीजों का कहना है। कि अस्पताल प्रशासन जब तक नई बिल्डिंग नही बन रही है। तब तक पानी निकासी की ही व्यवस्था करा दे जिससे हम लोगों को थोड़ी राहत मिल सके।

जिला अस्पताल में अंदर जाने में अक्सर मरीज गिरकर घायल हो जाते हैं।
जिला अस्पताल में अंदर जाने में अक्सर मरीज गिरकर घायल हो जाते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री के सामने उठा था पानी का मुद्दा

अभी कुछ दिन पहले जिले के दौरे पर आए स्वाथ्य मंत्री जय प्रताप सिंह के सामने अस्पताल में भरे गंदे पानी का मुद्दा उठाया गया था। मंत्री से लोगों ने अस्पताल का निरीक्षण करने के लिए निवेदन किया था, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल की दयनीय हालत देखने के लिए अस्पताल नहीं गए थे। जिस पर लोगों ने नाराजगी भी जाहिर की थी। हालांकि मंत्री ने पानी निकासी की व्यवस्था कराने की बात कही थी, लेकिन अभी तक पानी जस की तस भरा हुआ है। वहीं जिला अस्पताल में जलभराव को लेकर जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉक्टर संतोष मिश्रा ने बताया कि जलभराव को लेकर कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। मगर इस पर किसी ने संज्ञान नहीं लिया है। मरीजों से ज्यादा हमारे स्टाफ को भी परेशानी होती है, जो गंदे पानी में निकलकर मरीजों की देखभाल करते हैं

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