बच्चे का दिल शरीर के बाहर धड़क रहा...:ललितपुर में जन्मे बच्चे का दिल छाती के बाहर, डॉक्टर बोले- ये इक्टोपिया कोर्डिस बीमारी है...सिविल, मेडिकल कॉलेज और एम्स से लौटाया गया

ललितपुर2 महीने पहले
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समाजसेवी व सीएमएस बच्चे की मदद को आगे आए हैं। - Dainik Bhaskar
समाजसेवी व सीएमएस बच्चे की मदद को आगे आए हैं।

ललितपुर जिले के सिविल अस्पताल में जन्मे एक बच्चे का दिल शरीर के बाहर धड़क रहा है। मासूम की हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उपचार के लिए झांसी मेडिकल कालेज रेफर किया था। झांसी में चिकित्सकों ने इलाज करने से इन्कार कर दिया। अब समाजसेवी व सीएमएस बच्चे को इलाज के लिए एम्स भिजवाया। वहां भी डॉक्टरों ने इलाज से इंकार कर दिया है। अब परिजन निजी एंबुलेंस से बच्चे को लेकर वापस आ रहे हैं। उनका कहना है कि हम बच्च को लेकर डीएम से मिलेंगे और इलाज की गुहार लगाएंगे।

25 अगस्त को बच्चे को हुआ था बच्चे का जन्म

कोतवाली सदर क्षेत्र के ग्राम रोड़ा निवासी अरविंद की पत्नी बबलेश को 25 अगस्त को प्रसव पीड़ा हुई। परिजन महिला को जिला अस्पताल ले गए, जहां उसने एक बच्चे को जन्म दिया। लेकिन बच्चे को देखकर चिकित्सक व परिजन आश्चर्यचकित रह गए। क्योंकि बच्चे का दिल बाहर निकला हुआ था और धड़क रहा था। बच्चे की हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे उपचार के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज भेज दिया, लेकिन वहां चिकित्सकों ने उसका इलाज करने से मना कर दिया। जिसके चलते परिजन ललितपुर महिला जिला चिकित्सालय वापिस आ गए और बच्चे को फिर से एसएनसीयू में भर्ती कर लिया गया।

दिल्ली इलाज के लिए भेजा

तीन दिन से परिजन पुत्र के इलाज के लिए मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री से गुहार लगा रहे हैं क्योंकि इलाज में 7-8 लाख से अधिक का खर्च आ रहा है। शुक्रवार की रात समाजसेवियों व सीएमएस डॉ. हरेंद्र हरेंद्र चौहान की मदद से एम्स दिल्ली भेजा है। महिला जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. हरेन्द्र चैहान ने बताया कि बच्चे को इक्टोपिया कोर्डिस की बीमारी से ग्रस्त है, जिसके चलते उसका दिल बाहर धड़क रहा है। उन्होंने बताया कि एम्स में उसका इलाज हो सकता है। एम्बुलेंस से बच्चे को दिल्ली एम्स भेजा गया है।

क्या होता है इक्टोपिया कोर्डिस?

इक्टोपिया कोर्डिस एक प्रकार का जन्म दोष है, जिसमें हृदय जन्म के समय शरीर में अपने नियत स्थान में न होकर, बल्कि छाती के अगले हिस्से की ओर उभर आता है या कभी छाती के आस-पास के हिस्सों में पाया जाता है। इस बीमारी के सही कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है। ज्यादातर ऐसे मामलों में बच्चे की जन्म के बाद मृत्यु हो जाती है, लेकिन कभी-कभी इसका ऑपरेशन सफल भी होता है।

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