ललितपुर जिला अस्पताल में नवजात बच्चों की अदला-बदली:4 बेटियों के बाद अस्पताल में जन्मा बेटा, घर जाकर देखा तो निकली बेटी, 14 घंटे तक दो मां बनी रहीं देवकी और यशोदा

ललितपुर21 दिन पहले
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परिवार की शिकायत पर 14 घंटे बाद दोनों बच्चे अपनी असली मां के पास पहुंचाए गए। - Dainik Bhaskar
परिवार की शिकायत पर 14 घंटे बाद दोनों बच्चे अपनी असली मां के पास पहुंचाए गए।

ललितपुर में अस्पताल के एसएनसीयू से बच्चा बदले जाने का मामला गुरुवार को उस समय सामने आया जब एक महिला ने चार पुत्री के बाद अस्पताल में पुत्र को जन्म दिया । इसके बाद प्रसूता अपने घर भी पहुंच गई। 14 घंटे बाद उसे पता चला कि जो नवजात उसके पास है वह उसका बेटा नहीं, किसी और की बेटी है। यह सुनकर उसके होश उड़ गए, लेकिन बेटे को ले जाने वाली मां की ईमानदारी से उसकी असली मां मिल सकी । 14 घंटे तक बच्चे एक दूसरे की मां के पास रहे ।
कर्मचारियों ने दिया बच्चा
कोतवाली सदर अन्तर्गत ग्राम खुरा निवासी 32 साल की रचना कुशवाहा को बुधवार की दोपहर प्रसव पीड़ा हुई, जिसके बाद परिजन उसे उपचार के लिए जिला महिला अस्पताल ले गए। जहां रचना ने शाम साढ़े पांच बजे पुत्र को जन्म दिया। बच्चे को रही दिक्कत के बाद उसे डॉक्टरों ने एसएनसीयू में भर्ती करा दिया । इसके बाद रात साढ़े नौ बजे के दरम्यान महिला रचना की हालत बिगड़ गई । इसके बाद डॉक्टरों ने उसे झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। एसएनसीयू में भर्ती रचना के पुत्र को लेने उसकी जेठानी फूल कुंवर पहुंची और उसने कर्मचारियों से अपने बच्चे को मांगा। कर्मचारियों ने उसे बच्चा दे दिया। फूलकुंवर बच्चे और रचना को लेकर झांसी मेडिकल कॉलेज चली गईं।

अस्पताल में रचना ने बेटे को जन्म दिया था।
अस्पताल में रचना ने बेटे को जन्म दिया था।

तबियत खराब होने पर भर्ती कराया
बुधवार को ही थाना बानपुर क्षेत्र के ग्राम कचनोंदा निवासी 22 साल की राजकुमारी कुशवाहा ने भी बुधवार की दोपहर जिला महिला अस्पताल में दोपहर डेढ़ बजे के दरम्यान पुत्री को जन्म दिया था। उसकी पुत्री को उल्टियां होने के चलते चिकित्सकों ने एसएनसीयू में उसे भर्ती करा दिया था। रात 8 बजे जब राजकुमारी की मां एसएनसीयू में पुत्री को लेने पहुंची तो उसे उसका बच्चा दे दिया गया।
नवजात का डाइपर बदला, तो होश उड़े
गुरूवार सुबह 8 बजे के दरम्यान राजकुमारी कुशवाहा की मां ने बच्चे का डाइपर बदला तो उसके होश उड़ गये, क्योंकि उसने पुत्री को जन्म दिया था जबकि उसके हाथों में लड़का था। तत्काल वह बच्चे को लेकर एसएनसीयू में पहुंची और चिकित्सकों को जानकारी दी तो चिकित्सकों में खलबली मच गई। इसके बाद चिकित्सकों ने जानकारी कर ग्राम खुरा की आशा को सूचना दी।
रचना के परिजन अस्पताल पहुंचे
आशा ने बताया कि उसकी मरीज रचना को पुत्र पैदा हुआ था । रचना को फोन लगाया गया तो उसने बताया कि वह झांसी से घर आ गई है। उससे जब पूछा गया कि तुम्हारे पास जो बच्चा है वह लड़का है या लड़की। जब रचना के परिजनों ने डाइपर हटाकर देखा तो वह लड़की निकली, जिसके बाद वह लोग घबरा गये। तत्काल ही रचना की जिठानी फूलकुंवर अपने परिजनों के साथ मोटरसाइकिल से उस मासूम बच्ची को लेकर महिला अस्पताल पहुंचे और अपना पुत्र वापस लिया और उस बच्ची को राजकुमारी को सौंप दिया।
बेटा वापस मिलने पर जताई खुशी
इधर, रचना ने बताया कि उसकी शादी को 15 वर्ष हो गए हैं और उसकी पहली पुत्री 12 वर्ष पहले हुई थी। पुत्र के चाहत में चार पुत्रियां और हो गईं। वह पुत्र की चाहत में कई मन्दिरों में गई और कल उसकी मन्नत पूरी हुई और उसको पुत्र हुआ था लेकिन डॉक्टरों की लापरवाही से वह बदल गया था। जब उसे पता चला कि उसके पास जो बच्चा है वह उसका पुत्र नहीं दूसरे की पुत्री है तो उसके होश ही उड़ गये थे। पुत्र वापस मिलने पर परिजनों में खुशी छा गयी है।
राजकुमारी ने दिखाई ईमानदारी
कचनोंदा निवासी राजकुमारी कुशवाहा की ईमानदारी से बच्चे अपनी असली मां से मिल सके । राजकुमारी ने बताया कि बुधवार को उसने दूसरी पुत्री को जन्म दिया था। गुरुवार को सुबह जब उसकी मां ने बच्चे का डाइपर बदला तो पुत्री की जगह उसके पास पुत्र था । वह डर गई थी कि उसने पुत्री को जन्म दिया था । उसके पास जो वह लड़का है । जिसके बाद वह उसने खुद ही जाकर चिकित्सको को बताया कि उसकी पुत्री हुई थी न कि पुत्र हुआ था।
14 घंटे तक दूसरी मांओं के पास रहे बच्चे
इस बीच स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही से बच्चे 14 घंटे तक दूसरी मांओं के पास रहे। उन्होंने ने ही बच्चों को दूध पिलाया। संयोग से दोनों बच्चे कुशवाहा जाति के निकले । महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ.हरेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि एसएनसीयू में लापरवाही हुई है । उसकी जांच कराई जा रही है, जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कार्रवाई होगा।

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