क्या मोहनलालगंज में सड़कों की बदहाली बनेगी चुनावी मुद्दा ?:यहां सड़कों पर हैं गड्ढे ही गड्ढे, केंद्रीय मंत्री की बैठक में भी उठ चुका है मुद्दा

मोहनलालगंज, लखनऊ10 दिन पहले
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जर्जर और खस्ताहाल सड़कों की समस्या मोहनलालगंज के कुछ इलाकों में लोगों की परेशानी का सबब बन रही है। - Dainik Bhaskar
जर्जर और खस्ताहाल सड़कों की समस्या मोहनलालगंज के कुछ इलाकों में लोगों की परेशानी का सबब बन रही है।

जर्जर और खस्ताहाल सड़कों की समस्या मोहनलालगंज के कुछ इलाकों में लोगों की परेशानी का सबब बन रही है। केन्द्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर की चौपाल में भी यह मुद्दा मुख्य रुप से छा चुका है। फिर भी गड्डा मुक्ति अभियान को अमलीजामा पहनाने में लोक निर्माण विभाग की लापरवाही मौजूदा विधानसभा चुनाव में सत्तासीन दल के विरुद्ध विपक्षी दलों के लिए मुख्य मुद्दा बन रहे हैं। लिहाजा सत्ताधारी और विपक्षी दलों के नेताओं के बीच इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर गरमागरम बहस का दौर जारी है।

गंगाखेड़ा गांव को डामर रोड लोक निर्माण विभाग के अधिकारी पांच वर्ष में भी पूरा नहीं कर सके। ग्रामीणों को अधूरी पड़ी खस्ताहाल रोड से परेशानी झेलकर आवागमन करना पड़ रहा है। अतरौली-कुबहरा रोड निर्माण की क्षेत्रीय दर्जनभर गांव के लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। ट्रैफिक लोड के मद्देनजर इस निर्माणाधीन रोड का कार्य अब तक चलने की स्थिति में नहीं पहुंच सका। तहसील बार एसोसिएशन के पूर्व कोषाध्यक्ष मनोज कुमार के मुताबिक माह भर से रोड निर्माण कार्य भी बन्द पड़ा है।

निगोहां-बेनीगंज रोड का निर्माण कार्य के लिए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की पैरवी भी बेकार जा रही है। तमाम कोशिशों के बावजूद भी लोनिवि अब तक इस रोड का निर्माण कार्य शुरु कराने में फेल रहा। सिसेण्डी-मदाखेड़ा, शारदा नहर-अचली खेड़ा रोड भी गड्ढों की भरमार है। नगराम-निलमथा रोड पर हाल ही में भरे गए पैच चुनावी बेला पर ही टूटकर गड्ढों में तब्दील हो रहे हैं। सर्वाधिक सुर्खियों में रहे नगराम-गंगागंज रोड की हालत पांच वर्ष बाद भी सुधर नहीं सकी।

कुछ दिन पहले केन्द्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर की जनसुनवाई चौपाल में इस शिकायतों को लेकर लोक निर्माण विभाग के अफसरों को फटकार भी पड़ी थी। फिर भी सुधार नहीं आ सका है। इन सड़कों की बदहाली के मुद्दे विधानसभा चुनाव में क्षेत्रीय सियासतदारों के बीच तीखी बहस की वजह बन रहे हैं। विपक्षी दल जहां सत्ताधारी दल पर मोहनलालगंज क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं। वहीं सत्ताधारी दल के नेता यहां पार्टी का एमएलए नहीं होने से क्षेत्रीय समस्याओं की सही तरीके से पैरवी नहीं होने का आरोप मढ़ कर पलटवार कर रहे हैं।