पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Uttar pradesh
  • Lucknow
  • 12 Th Board Exam, Uttar Pradesh, Lucknow, Get The 12th Board Exam Done In Any Case, On What Basis Will The Children Get Admission In Graduation Without Numbers

लखनऊ के निजी स्कूलों का PM को पत्र:12 वीं बोर्ड की परीक्षा हर हाल में कराएं, बिना नंबरों के ग्रेजुएशन मेंं दाखिला किस आधार पर मिलेगा

लखनऊ5 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) और सीआईएससीई 12वीं की परीक्षा को रद्द किए जाने का फैसला हो चुका है लेकिन निजी स्कूल परीक्षा कराने की जिद पर अड़े हैं। कोरोना संक्रमण के कम होते ग्राफ के साथ ही उन्होंने परीक्षा को लेकर सरकार से पुनर्विचार किए जाने की मांग शुरू कर दी है।

अभी तक कई स्कूल संचालक दबी जुबान से सरकार के इस फ़ैसले पर नाराजगी जाहिर कर रहे थे, मगर अब देश के सबसे बड़े छात्र संख्या बल वाले स्कूल संचालक और शिक्षाविद डॉ जगदीश गांधी ने मुखर होकर आवाज उठानी शुरू कर दी है। डॉ गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हर हाल में परीक्षा कराए जाने की मांग की है। उनका तर्क है कि सामान्य छात्र तो इस फैसले से खुश होंगे मगर मेधावी छात्रो के लिए यह निर्णय ठीक नहीं है। उनका कहना है कि सरकार को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। स्कूल संचालकों का मानना है कि सीबीएसई12वीं की परीक्षाएं रद्द करने का असर स्नातक स्तर पर भी व्यापक रूप से पड़ेगा। स्नातक स्तर पर अभी तक मेरिट के आधार पर दाखिला लेने वाले शैक्षिक संस्थानों को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

मेधावी छात्रों के लिए हितकर नहीं है सरकार का फैसला

शुक्रवार को पीएम को भेजे पत्र में शिक्षाविद डॉ गांधी ने कहा कि बारहवीं के बोर्ड पेपर का कांसेप्ट कुछ इस प्रकार का होता था कि जो छात्र साधारण पढ़ाई करते थे, वो 60% से 80% तक नंबर ले आते थे, वहीं उनसे अधिक मेहनती छात्र 80 % से 90 % तक नंबर हासिल करने में सफल हो जाते थे। मगर मेधावी बच्चों का प्रतिशत 90 से 100 प्रतिशत के बीच माना जाता रहा है। परीक्षा रद्द होने की स्थिति में टॉपर बच्चों का कांसेप्ट खत्म हो जाएगा। देश मे कई ऐसे नामी विश्वविद्यालय हैं जो मेरिट के आधार पर छात्रों काे प्रवेश देते थे, उन विश्वविद्यालय के लिए भी ये एक बड़ा झटका हैं। जैसे दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेज में 99% से 95% के बीच अंक हासिल करने वाले बच्चो का ही दाखिला मिल पाता था। एग्जाम न होने के कारण अब अलग तरह की मुश्किल खड़ी होगी।

कोरोना जाने वाला नहीं, कब तक टाले जाएंगे बोर्ड एग्जाम

अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने भी सरकार से परीक्षाओं को लेकर लिए गए निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसा लगता है कि शिक्षा हमारी वरीयता सूची में आगे नही निचले पायदान पर है।चिकित्सकों का यह मानना है कि कोरोना अभी जाने वाला नही है, आखिर कब तक बोर्ड एग्जाम टाले जाएंगे? लखनऊ अवध कॉलीजिएट के प्रबंधक सरबजीत सिंह कहते हैं कि मेधावी बच्चों के लिहाज से यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। इसका असर दूरगामी होगी। शैक्षिक ढांचे को भी खासा प्रभावित करेगा।

सीबीएसई का तर्क- छात्रों की सुरक्षा के लिए ही हुआ है फैसला

सीबीएसई की रीजनल कोआर्डिनेटर श्वेता अरोड़ा का कहना है कि स्टूडेंट्स की सुरक्षा को वरीयता देते हुए यह कदम उठाया गया है। जो अभी भी बोर्ड एग्जाम देना चाहेंगे उनके लिए रास्ते बंद नही है और परिस्थितियां अनुकूल होने पर उन्हें आने वाले समय मे जरुर मौका मिलेगा।

खबरें और भी हैं...