UP में पुरानी पेंशन को चुनाव का मुद्दा बनाएंगे कर्मचारी:13 लाख कर्मचारी अक्टूबर से शुरू करेंगे आंदोलन, राजनीतिक दल से इसको घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग

लखनऊ3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
कर्मचारी संगठन बीते कई सालों से पुरानी पेंशन बहाली को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।- पुरानी फोटो - Dainik Bhaskar
कर्मचारी संगठन बीते कई सालों से पुरानी पेंशन बहाली को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।- पुरानी फोटो

चुनाव नजदीक आने के बाद ही एक बार फिर उप्र में पुरानी पेंशन का मामला गंभीर होते जा रहा है। पुरानी पेंशन नीति के पैरोकार अक्टूबर से इस मामले पर सरकार को घेरेंगे। इसबार भी इसकी अगुवाई अटेवा पेंशन बचाओं बहाली मंच की ओर से की जाएगी। दावा है कि इस लड़ाई में उप्र के 13 लाख कर्मचारी शामिल होंगे, जो कि पुरानी पेंशन नीति से वंचित हैं।

अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार 'बंधु का कहना है कि नई पेंशन नीति की विसंगतियां लगातार सामने आ रही हैं। सरकार की यह नीति हमारे बुढ़ापे की लाठी छीन रही है। मौजूदा समय कर्मचारियों और शिक्षकों की संख्या बहुत बड़ी है। इसको नजरअंदाज कर कोई भी पॉलिसी नहीं बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो हमारी मांगों को अनसुना करेगा हम उसे बाहर कर देंगे।

नई पेंशन व्यवस्था और निजीकरण कैंसर की तरह

कर्मचारियों का आरोप है कि मौजूदा समय विभागों में आउट सोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारी रखे जाते हैं। यह विभाग के लिए भी ठीक नहीं है। इसके बहुत ही दुखदायी परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि निजीकरण देश को बर्बादी के कगार पर लेकर जाएगा। हम एक ऐसी व्यवस्था की ओर जा रहे हैं, जहां पर आम आदमी का जीना दूभर हो जाएगा।

जनप्रतिनिधियों का भत्ता बढ़ता है तो हमारा क्यों नहीं

अटेव के प्रवक्ता राजेश कुमार का कहना है कि जनप्रतिनिधि अपना भत्ता बढ़ा लेते हैं, लेकिन कर्मचारियों की सुविधाओं पर कैंची चलाते हैं। सरकार कहती है कि कर्मचारियों को देने के लिए हमारे पास पैसा नहीं है। अगर सरकारी कर्मचारियों का भत्ता बढ़ता है तो कहा जाता है कि इतना भार बढ़ा लेकिन जब जनप्रतिनिधियों का भत्ता बढ़ता है तो यह सवाल क्यों नहीं आता?

चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनाएंगे

कर्मचारी संगठनों का दावा है कि पुरानी पेंशन को चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनाएंगे। उप्र में अभी 13 लाख कर्मचारी ऐसे हैं, जिनको पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिलता है। अगर हर कर्मचारी के परिवार में चार सदस्य भी जोड़ें तो करीब 52 लाख लोग सीधे प्रभावित हो रहे हैं। आप चुनावों को देखें तो पोस्टल बैलेट का असर पूरे चुनाव पर पड़ता है। पोस्टल बैलेट से सबसे ज्यादा मतदान सरकारी कर्मचारी ही करते हैं। ऐसे में सभी दल यह जानते हैं कि पुरानी पेंशन के मुद्दे पर वो पीछे हटेंगे तो उसके नतीजे भी भुगतेंगे।

नई पेंशन व्यवस्था ठीक है तो बदलाव क्यों किए जा रहे हैं

आनन्द मिश्रा ने कहा कि नई पेंशन व्यवस्था अगर ठीक है तो सरकार लगातार संशोधन क्यों कर रही है। एक पन्ने का जीओ आज गट्ठर का ढेर बन गया है। सरकार को बताना होगा कि ऐसा क्यों हो रहा। उन्होंने कहा कि सरकार के पास पेंशन देने से भार बढ़ रहा है तो नेताओं को क्यों दिया जा रहा है। इसका आंकड़ा क्यों नहीं जारी किया जाता है।

खबरें और भी हैं...