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KGMU और PGI के डरावने आंकड़े:केजीएमयू में 500 और पीजीआई में 300 मरीजों की कोरोना से हुई मौत; 13 महीनों में 2424 मरीजों ने दम तोड़ा

लखनऊएक महीने पहले
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लखनऊ में एक साल के भीतर 2424 लोगों की मौत हो गई। - Dainik Bhaskar
लखनऊ में एक साल के भीतर 2424 लोगों की मौत हो गई।

उत्तर प्रदेश में कोरोना से संक्रमित होने के आंकड़े पहले की तुलना में कम आ रहे हैं। इसी बीच राजधानी लखनऊ के दो नामचीन अस्पतालों के डरावने आंकडे़ सामने आए हैं। आंकड़ों के अनुसार पिछले 14 महीने में कोरोना के दौरान इलाज में सबसे ज्यादा मौत केजीएमयू और पीजीआई जैसे संस्थानों बेहतरीन संस्थानों में हुई है। दोनों ही संस्थानों को मिलाकर 22 मई तक 898 मरीजों को मौत हुई है। इस दौरान केजीएमयू 4 598 पीजीआई में 300 मरीजों की मौत हो चुकी है।

वहीं, मई की तुलना में अप्रैल में अप्रैल में ज्यादा मौत हुई है। अप्रैल के महीने में शहर के विभिन्न अस्पतलों को जोड़ दिया जाए तो 832 मरीजों ने दम तोड़ा। विशेषज्ञों का भी कहना है कि इस बार कोरोना न केवल अधिक संक्रामक बल्कि घातक भी है। जिसकी वजह से अधिक मौतें देखी गई है।

बड़े संस्थानों में हुई ज्यादा मौतें

इस बीच, 22 मई तक 583 रोगियों की कोरोना संक्रमण के कारण मौत हुई है। मौतों के आंकाड़ों पर गौर करें तो केजीएमयू, पीजीआई और लोहिया संस्थान में ही एक हजार से ज्यादा मौत हो चुकी है। लेकिन मरीजो की भर्ती और मृतकों का अनुपात देखे तो सबसे अधिक टीएसएम मेडिकल कॉलेज में कोरोना मरीजों की मौत हुई है। यहां 1045 मरीजो को भर्ती किया गया जिसमें से 212 ने दम तोड़ दिया। यानी करीब 21 प्रतिशत मरीज की मौत हुई।

एरा और लोक बंधु का बेहतर रहा रिकॉर्ड
अस्पतालों में मरीजों की संख्या देखे तो केजीएमयू के बाद सबसे ज्यादा लोग एरा मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुए। यहां 2763 मरीज को भर्ती किया गया था, इसमें 236 लोगों की जान गई। वहीं, लोक बंधु अस्पताल में भी 1819 में 132 लोगों की जान गई।

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