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लखनऊ:लखनऊ विश्वविद्यालय और आपदा प्रबंधन के बीच हुआ करार, आपदाओं से निपटने के लिए तैयार होगी छात्रों की फौज

लखनऊएक वर्ष पहले
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कुलपति प्रो0 आलोक कुमार राय और  राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ले जनरल आर पी साही के बीच एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किया गया। - Dainik Bhaskar
कुलपति प्रो0 आलोक कुमार राय और  राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ले जनरल आर पी साही के बीच एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किया गया।
  • विश्वविद्यालय के कुलपति आलोक कुमार राय और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बीच गुरुवार को हुआ करार
  • इसके तहत दोनों संस्थाएं अब इंटर एजेंसी ग्रुप के सक्रिय सहयोग से विश्वविद्यालयों में नेटवर्क बढ़ाएंगे

उत्तर प्रदेश की राजधानी में स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय अब अपने यहां छात्रों को इस कदर तैयार करेगा कि वो भविष्य में आने वाली महामारियों के दौरान आपदा प्रबंधन टीम के साथ कदम से कदम मिलाकर काम कर सकेंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय के पाठयक्रम में अब आपदा प्रबंधन से जुड़े विषयों को शामिल किया जाएगा। आपदा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को शामिल कर शिक्षकों छात्रों को इसके बारे में बेहतर जानकारी दी जाएगी। 

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 आलोक कुमार राय और  राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ले जनरल आर पी साही के बीच एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किया गया जो हस्ताक्षर की तिथि से लागू माना जायेगा। इस समझौते के मुताबिक दोनो संस्थायें इंटर एजेंसी ग्रुप के सक्रिय सहयोग से विश्वविद्यालयों का नेटवर्क विकसित करेंगे। 

कुलपति ने बताया- यह नेटवर्क प्रधानमंत्री के दस सूत्री एजेंडा (टीपीए) के 6वें बिंदु के आधार पर विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम और गतिविधियों में आपदा प्रबंधन के मुद्दों केा शामिल करेंगे और शिक्षकों, शोधकर्ताओं, छात्रों और उन सभी लोगों को संवेदनशील बनाने, और उनका मार्गदर्शन करने का कार्य करेंगे। इसके तहत दस सूत्री एजेंडा में कई विशेषताएं शामिल होंगी, जिसमें कोविड 19 जैसी महामारी शामिल हैं, जो राज्य और जिला स्तर के सभी विभागों द्वारा लागू किए जाएंगें।

ये हैं दस सूत्री एजेंडा

  • सभी विकास क्षेत्रों को आपदा जोखिम प्रबंधन के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।
  • गरीब घरों से लेकर एसएमई तक बहु-राष्ट्रीय निगमों से लेकर राष्ट्र-राज्यों तक सभी के लिए जोखिम कवरेज की दिशा में काम करना।
  • आपदा जोखिम प्रबंधन में महिलाओं की अधिक भागीदारी और नेतृत्व को प्रोत्साहित करना।
  • विश्व स्तर पर जोखिम मानचित्रण में निवेश करें। भूकंप जैसे खतरों से संबंधित जोखिमों के मानचित्रण के लिए, हमने मानकों और मापदंडों को स्वीकार किया है।
  • हमारे आपदा जोखिम प्रबंधन प्रयासों की दक्षता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करें।
  • आपदा मुद्दों पर काम करने के लिए विश्वविद्यालयों का एक नेटवर्क विकसित करना।
  • सोशल मीडिया और मोबाइल प्रौद्योगिकियों द्वारा प्रदान किए गए अवसरों का उपयोग करें।
  • स्थानीय क्षमता और पहल पर निर्माण।
  • आपदा से सीखने का अवसर व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हर आपदा के बाद, उससे सीखने वाले सबकों पर शोध पत्र होते हैं जो शायद ही कभी लागू होते हैं।
  • आपदाओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया में अधिक सामंजस्य लाना।

सस्टेनेबिलिटी के मुद्दों पर समावेशी विकास, ज्ञान और क्षमता निर्माण अत्यंत आवश्यक
कुलपति की माने तो यूनिवर्सिटी व शिक्षण संस्थाओं का नेटवर्क आपदा प्रबंधन में सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की योजनाओं के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा सेंडई फ्रेमवर्क के संकेतकों की देखरेख, निगरानी और विश्लेषण के लिए आपदा जोखिम प्रबंधन पर मा0 प्रधान मंत्री के दस सूत्री एजेंडा (टीपीए) के अनुसार आपदा जोखिम न्यूनीकरण (एसएफ डीआरआर) के लिए रूपरेखा और यदि आवश्यक हो तो मध्य-पाठ्यक्रम सुधार - मिड कोर्स करेक्शन - का सुझाव देगा। 

लखनऊ विश्वविद्यालय के तरफ से गतिविधियों का समन्वय करने के लिए नोडल अधिकारी के रूप में प्रोफेसर शीला मिश्रा, सांख्यिकी विभाग को नामित किया गया है तथा यूपीएसडीएमए की ओर से डॉ भानु संयोजक इंटर एजेंसी व सचिव पीजीवीएस को नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया गया है। एक सप्ताह के अंदर दोनो नोडल अधिकारी संयुक्त योजना प्रस्तुत कर कार्य प्रारम्भ कर देंगे।

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