यूपी में नहरों की कटान पर लगेगी रोक:रुकेगी पानी की बर्बादी, एकेटीयू आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक साधनों से करेगा मदद

लखनऊ2 महीने पहले

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी (AI) से प्रदेश में नहरों का कटान रोकने की बड़ी तैयारी की जा रही है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक साधनों से सिंचाई व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा रहा है। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने मंगलवार को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय यानी AKTU से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा की।

जलशक्ति मंत्रालय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल वाटर मैनेजमेंट के लिए करना चाहता है। दावा है कि सिंचाई में तकनीकी के उपयोग से बहुत जल्द बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। विभाग की योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को बढ़ावा देने की तैयारी में हैं।

AKTU में वाटर मैनेजमेंट की जानकारी लेते हुए जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह।
AKTU में वाटर मैनेजमेंट की जानकारी लेते हुए जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह।

नहरों की कटान रोकने में मदद करेगा AI
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से नहरों का कटान रोका जा सकेगा। नहरों का रखरखाव भी बेहतर होगा। जल-शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने AKTU के विशेषज्ञों से इस पर चर्चा भी की। स्वतंत्र देव सिंह ने कहा, "खेत और किसान सरकार की प्राथमिकता में है। सिंचाई व्यवस्था इसका आधार है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक साधनों का उपयोग कर सिंचाई और जल संसाधन विभाग प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाएगा।"

नहरों की कटान को रोकने में AI कैसे काम करेगा? AKTU के विशेषज्ञ जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को जानकारी देते विशेषज्ञ।
नहरों की कटान को रोकने में AI कैसे काम करेगा? AKTU के विशेषज्ञ जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को जानकारी देते विशेषज्ञ।

कैसे मदद करेगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस?
उत्तर-प्रदेश की नहरों में होने वाले कटान से पानी की बर्बादी को रोकने के लिए यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली जाएगी। AI के जरिए यह सेकंड में पता चल जाएगा कि नहर में ब्रेक-डाउन या कटान कहां हुई है। यह नहर परियोजना नेटवर्क पर होने वाले खतरों की निरंतर निगरानी करके आंकड़ों और गतिशीलता के विश्लेषण द्वारा 'ग्रेस्पॉट्स' की पहचान भी करेगी।

जल प्रबंधन में भी होगा तकनीकी का इस्तेमाल
सरकार प्रदेश में जल प्रबंधन को लेकर कई तरह की योजनाएं चला रही है। जिसमें सबसे महत्वाकांक्षी योजना हर घर जल है। आने वाले समय में प्रदेश के हर घर में नल के माध्यम से पानी की सप्लाई होगी। साथ ही नदियों की सफाई प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में है। ऐसे में तकनीकी सहयोग और विशेषज्ञों की राय की महत्वपूर्ण भूमिका है।

इसी को ध्यान में रखते हुए जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने प्रदेश में नदियों, नालों, तालाबों, कुंओं आदि के सफाई पर विषय विशेषज्ञों से विस्तार से चर्चा की और कहा कि सरकार की मंशा है कि प्रदेश में जल प्रबंधन का कार्य तेजी से हो। इस कार्य में विशेषज्ञ और तकनीकी सहयोग जरूरी है। इस दिशा में एकेटीयू का सहयोग भी जरूरी है। यहां के विशेषज्ञ अपने अनुभव और शोध के जरिए निश्चित ही लाभ पहुंचाएंगे।

उत्तर-प्रदेश में है नहरों का जाल
नहरों के वितरण एवं विस्तार की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का स्थान सबसे ऊपर है। यहां की कुल सिंचित भूमि का लगभग 30 प्रतिशत भाग की सिंचाई नहरों से ही होती है। यहां की नहरें भारत की सबसे पुरानी नहरों में से एक हैं।

उत्तर प्रदेश की प्रमुख नहरों और बांध

1. ऊपरी गंगा नहर

  • जगह: हरिद्वार (उत्तराखंड), गंगा नदी
  • किन जिलों को मिलता है फायदा: सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, एटा, फिरोजाबाद, इटावा, मैनपुरी, कानपुर, फतेहपुर, गाजियाबाद और फर्रुखाबाद

2. मध्य गंगा नहर

  • जगह: बिजनौर, गंगा नदी
  • किन जिलों को मिलता है फायदा: बुलंदशहर, अलीगढ़, गाजियाबाद, हाथरस, मथुरा और फिरोजाबाद

3. निचली गंगा नहर

  • जगह: नरोरा (बुलंदशहर), गंगा नदी।
  • किन जिलों को मिलता है फायदा: बुलंदशहर, फतेहपुर, प्रयागराज, अलीगढ़, मैनपुरी, गाजियाबाद, एटा, फिरोजाबाद, कानपुर और फर्रुखाबाद

4. रामगंगा नहर

  • जगह: कालागढ़ (पौढ़ी), रामगंगा नदी
  • किन जिलों को मिलता है फायदा: बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद और रामपुर

5. पूवी यमुना नहर

  • जगह: फैज़ाबाद (सहारनपुर)/ यमुना नदी
  • किन जिलों को मिलता है फायदा: सहारनपुर, मुज़फ्फरनगर, मेरठ गाजियाबाद और दिल्ली

6. आगरा नहर

  • जगह: ओखला (दिल्ली के पास), यमुना नदी।
  • किन जिलों को मिलता है फायदा: दिल्ली, गुरुग्राम, भरतपुर और आगरा

7. शारदा नहर

  • जगह: बनवासा (नेपाल सीमा) / शारदा नदी।
  • किन जिलों को मिलता है फायदा: पीलीभीत, बरेली, शाहजहांपुर, लखीमपुर,सीतापुर, हरदोई, बाराबंकी, उन्नाव, लखनऊ, रायबरेली, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और प्रयागराज।

8. सरयू या घाघरा नहर

  • जगह: कतरनिया (बहराइच)/ घाघरा।
  • किन जिलों को मिलता है फायदा: बहराइच, श्रावस्ति, बलरामपुर, गोंडा और बस्ती।

9. घाघरा नहर

  • जगह: मिर्जापुर/घाघरा (सोन की सहायक नदी)
  • किन जिलों को मिलता है फायदा: सोनभद्र और मिर्जापुर।

10. बेतवा नहर

  • जगह: पारीक्षा (झांसी)/ बेतवा।
  • किन जिलों को मिलता है फायदा: झांसी, हमीरपुर और जालौन।