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शिवपाल यादव को विधानसभा में नहीं मिली आगे की सीट:अखिलेश यादव ने लिखी थी चिट्ठी; सोमवार से शुरू हो रहा है मानसून सत्र

लखमऊ3 महीने पहले
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प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव को विधानसभा में आगे की सीट नहीं मिलेगी। समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव ने विधानसभा अध्यक्ष को चिट्ठी लिखकर आगे की सीट देने की मांग की थी। पार्टी का कहना है कि वह वरिष्ठ सदस्य हैं और एक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ऐसे में उनको आगे की सीट दी जाए। बताया जा रहा है कि तकनीकी आधार पर यह पत्र गलत था। इसके चलते शिवपाल को आगे की सीट नहीं मिली।

बता दें कि विधानसभा में सपा की एक सीट बढ़ाई गई है। फिलहाल सपा को आवंटित 4 सीटों में खुद अखिलेश यादव, आजम खान, अवधेश प्रसाद और लालजी वर्मा बैठते हैं। अभी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडे और वरिष्ठ विधायक ओम प्रकाश सिंह भी दूसरी पंक्ति में बैठते हैं। सपा ने मांग की थी कि आगे की लाइन में उनकी सीट्स बढ़ाई जाए।

विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल से मुलाकात की थी।
विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल से मुलाकात की थी।

पहले से ही तय है सदस्यों के बैठने की जगह
असल में विधानसभा में ई-विधान सिस्टम लागू होने के कारण सभी सदस्यों के बैठने का स्थान तय कर दिया गया है। उनकी सीट पर लगा लैपटॉप तभी चालू होगा, जब अपनी तय सीट पर बैठेंगे। सदन नेता प्रतिपक्ष की सीट सबसे आगे रहती है। इसी पर अखिलेश यादव बैठते हैं। उनके पीछे की पंक्ति में शिवपाल यादव बैठते हैं। चूंकि विपक्ष में सपा ही मुख्य दल है। कांग्रेस के दो और बसपा के एक विधायक ही हैं। ऐसे में सपा समय-समय पर अपने सदस्यों को आगे-पीछे बिठाने के लिए स्पीकर से अनुरोध करती रही है।

कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार को घेरेगा विपक्ष

विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, महिला उत्पीड़न की घटनाओं में वृद्धि, किसानों की समस्याओं, संविधान की अनदेखी आदि का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाएगा।
विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, महिला उत्पीड़न की घटनाओं में वृद्धि, किसानों की समस्याओं, संविधान की अनदेखी आदि का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाएगा।

सोमवार से शुरू होने वाले यूपी के विधानमंडल सत्र से पहले रविवार को कार्य मंत्रणा की बैठक हुई। बैठक में विपक्ष के प्रमुख नेता शामिल हुए। इसमें सपा ने आजम खान के खिलाफ दर्ज फर्जी मुकदमों की जांच कराने का अनुरोध किया। विपक्ष कानून-व्यवस्था समेत अन्य मुद्दों को लेकर BJP पर हमलावर रहेगा। सपा, बसपा और कांग्रेस हाल में हुए लखीमपुर खीरी, गोंडा समेत अन्य घटनाओं और महंगाई, बेरोजगारी को लेकर घेराबंदी करेंगे।

मनोज पांडेय बोले- जनहित से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाएंगे

मानसून सत्र से पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक हुई। बैठक में सपा नेताओं और आजम खान के खिलाफ दर्ज फर्जी मुकदमों की जांच कराने का अनुरोध किया गया।
मानसून सत्र से पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक हुई। बैठक में सपा नेताओं और आजम खान के खिलाफ दर्ज फर्जी मुकदमों की जांच कराने का अनुरोध किया गया।

विधानसभा में सपा के मुख्य सचेतक मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार लगातार फेल हो रही है। विपक्ष जनहित से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाएगा। कांग्रेस विधायक वीरेंद्र चौधरी का कहना है कि सदन में कानून-व्यवस्था, महंगाई, महिला उत्पीड़न, सूखे के कारण परेशान किसानों के मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस बार कम से कम 10 दिन का सदन का सत्र होना चाहिए।

उधर, बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह ने कहा कि इस समय कानून-व्यवस्था बड़ा मुद्दा है। लखीमपुर प्रकरण सभी ने देख ही लिया। इसके अलावा महंगाई से जनता की हालत खराब है। ये मुद्दे सदन में उठाए जाएंगे।

22 सितंबर को महिलाओं के मुद्दों पर होगी चर्चा
मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा के लिए 22 सितंबर का दिन विशेष रूप से निर्धारित किया गया है। विधानसभा में इस तरह की यह नई पहल होगी। इस खास दिन सदन में सिर्फ महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। वहीं महिला विधायकों को ज्यादा से ज्यादा बोलने का मौका मिलेगा।

हंगामेदार होगा यह मानसून सत्र
सरकार के सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट ने माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2022 के मसौदे को भी मंजूरी दे दी है। इसे विधानसभा के इसी सत्र में पेश किया जाएगा। इस दौरान सदन के भीतर सरकार 100 दिन के उपलब्धियों का बखान भी कर सकती है। इस दौरान विपक्ष भी जोरदार तैयारी के साथ सदन में उतरेगा। यूपी में सूखे की स्थिति को लेकर भी कार्यवाही के दौरान हंगामा होने की उम्मीद है।

यूपी विधानसभा मानसून सत्र का कार्यक्रम

  • 19 सितंबर : सदन में निधन निर्देश पारित होंगे।
  • 20 सितंबर : औपचारिक कार्य अध्यादेश अधिसूचनाओं, नियमों आदि को सदन के पटल पर रखा जाएगा। विभिन्न विधेयक को भी यूपी सरकार सदन के पटल पर रखेगी।
  • 21 सितंबर : विधाई कार्य होंगे।
  • 22 सितंबर : विधाई कार्य होंगे और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी।
  • 23 सितंबर : विधाई कार्यों के साथ असरकारी दिवस को लेकर चर्चा होगी।