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भ्रष्टाचार के डेवलपमेंट के लिए अफसर-कांट्रेक्टर्स बार-बार बढ़ाते रहे लागत:पहले 650 करोड़ मंजूर हुए थे, 6 महीने में लागत बढ़कर 1100 करोड़ और साल भर में 1500 करोड़ हो गई, डीपीआर के हिसाब से काम नहीं हुआ

लखनऊ24 दिन पहले
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शुरू में ही तय हो गया था कि रिवर फ्रंट  बड़ा घोटाला साबित होगा। - Dainik Bhaskar
शुरू में ही तय हो गया था कि रिवर फ्रंट बड़ा घोटाला साबित होगा।

रिवर फ्रंट सपा सरकार का बड़ा घोटाला साबित होगा। इसकी पटकथा प्रोजेक्ट शुरू होने के कुछ ही दिन के अंदर लिख दी गई थी। प्रोजेक्ट की लागत साल भर में दोगुनी से ज्यादा बढ़ा दी गई थी। जांच कमेटी की पड़ताल में यह बात सामने आई थी।

कमेटी की तरफ से जो रिपोर्ट दी गई थी, उसमें बताया गया था कि प्रोजेक्ट के लिए जो डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनी था, उसके हिसाब से कभी काम नहीं हुआ। पहले ही दिन से अधिकारी अपने हिसाब से मनमानी करने लगे थे। जांच रिपोर्ट में ऐसी कई महत्वपूर्ण कमियां बताई गई थी।

कितनी मिट्‌टी किस रेट पर ली पता नहीं

योजना के लिए कितनी मिट्‌टी किस रेट पर खरीदी गई थी, इसकी कोई जानकारी जिम्मेदार अधिकारी नहीं दे पाए थें। यहां तक की कितनी मिट्‌टी डाली गई यह भी कोई नहीं बता पाया था। मुख्य आरोपी रूप सिंह यादव ने इस पर जवाब दिया था कि कोई रेट अभी फिक्स नहीं है। कितना खर्च हो रहा यह बात परियोजना के पूरा होने के बाद पता चलेगा। यहां तक की प्रोजेक्ट का काम करवाने वाली कंपनी दूसरे प्रदेशों में ब्लैक लिस्टेड थी। कंपनी ने बड़े पैमाने पर काम दूसरे ब्लैक लिस्टेड ठेकेदारों को बांट दिया।

गोमती पुल का एक हिस्सा तो धंस गया था

गलत तरीके से काम होने की वजह से गोमती पुल का एक हिस्सा पूरी तरह से धंस गया था। इसमें सिंचाई विभाग का कार्यालय भी धंसा था। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है। इस दौरान उस समय करीब छह महीने तक पुल से आवागमन बाधित रहा। लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ा था।

पर्यावरण विभाग की एनओसी नहीं

नदी किनारे कोई प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले पर्यावरण विभाग की एनओसी लेनी होती है। लेकिन पूरे काम के दौरान एनओसी नहीं ली गई। यहां तक की उस समय के कई पर्यावरण जानकारों ने इस पर सवाल भी उठाया था। प्रोजेक्ट का कोई भी काम डीपीआर के तहत नहीं हो हुआ। शुरूआत से यह तय नहीं था कि परियोजना में क्या-क्या काम होने हैं।

भ्रष्टाचार के लिए बढ़ता गया बजट

भ्रष्टाचार के लिए बजट बढ़ता गया। शुरूआती डीपीआर में बजट करीब 650 करोड़ रुपए रखा गया था। लेकिन छह महीने बाद ही इसको बढ़ाकर करीब 1100 करोड़ रुपए कर दिया गया। अभी प्रोजेक्ट का एक साल भी नहीं बीता था कि बजट 1500 करोड़ रुपए हो गया। उसके बाद कहा गया था कि इसको पूरा करने के लिए अभी 948 करोड़ रुपए और चाहिए। सरकार ने इसके लिए अब तक कुल 1515 करोड़ करोड़ रुपए जारी कर दिए थे। इसमें से 1435 करोड़ रुपए खर्च हो गए है।

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