इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में पढ़ाई सस्ती, हॉस्टल महंगा:टॉप 5 केंद्रीय विश्वविद्यालयों से AU की कोर्स फीस 50% सस्ती, लेकिन हॉस्टल फीस ढाई गुना ज्यादा

2 महीने पहलेलेखक: देवांशु तिवारी / राजेश साहू

‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’ कहे जाने वाले इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय का माहौल गर्म है। 400% फीस बढ़ोतरी के बाद स्टूडेंट्स लगातार विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, छात्रों के विरोध को दरकिनार कर विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर संगीता श्रीवास्तव ने दावा किया है कि साल 1922 के बाद अब इस साल यूनिवर्सिटी की फीस बढ़ाई है। ये फीस देश के दूसरे केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तुलना में काफी कम है।

यूनिवर्सिटी की कोर्स फीस पर वीसी का दावा भले ही सही हो, लेकिन यहां रहकर पढ़ना पूरे देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सबसे महंगा है। हमने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की नई फीस की तुलना देशभर के बड़े केंद्रीय विश्वविद्यालयों के फीस स्ट्रक्चर से की है। इसके बाद हॉस्टल की महंगी फीस से जुड़े आंकड़े ग्राफिक के जरिए बताए हैं।

  • आइए बारी-बारी सभी के बारे में जानते हैं...

शुरुआत में यूनिवर्सिटी में बढ़ाई गई कोर्स फीस से...

विश्वविद्यालय का तर्क- फीस बढ़ोतरी सरकार पर निर्भरता कम करने की कोशिश
फीस बढ़ोतरी पर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि सरकार की तरफ से विश्वविद्यालयों को आदेश मिला है कि उन्हें अपने स्तर पर फंड का इंतजाम करना होगा। इसलिए हमने कोर्सेस की फीस बढ़ाकर सरकार पर निर्भरता कम करने की कोशिश की है। पिछले 110 साल से हर महीने छात्रों से ली जाने वाली ट्यूशन फीस 12 रुपए थी। बिजली का बिल, हॉस्टल मेंटेनेंस फीस का बढ़ाया जाना जरूरी था।

7.5 करोड़ रुपए हुआ यूनिवर्सिटी का बकाया बिजली बिल

विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी के विरोध में मशाल जुलूस निकालते छात्र।
विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी के विरोध में मशाल जुलूस निकालते छात्र।

यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, यहां का कुल बकाया बिजली बिल 7.5 करोड़ रुपए पहुंच चुका है। यूनिवर्सिटी में कुल 20 हॉस्टल हैं, जिनमें 30 हजार स्टूडेंट्स रहते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि कोरोना काल में भी छात्रों ने बिजली का खूब इस्तेमाल किया, लेकिन कोई भी बिल भरने को तैयार नहीं हुआ। बकाये पैसे का बोझ बढ़ता जा रहा है, यूनिवर्सिटी की बिजली कभी भी कट सकती है।

  • यहां तक आपने फीस बढ़ोतरी पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष जाना। आगे आंदोलन कर रहे छात्र संगठनों की बातों पर सिलसिलेवार चलते हैं...

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया यानी NSUI : छात्र संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, "इलाहाबाद यूनिवर्सिटी कोई मॉल तो है नहीं कि आप यहां आचार, मट्ठा बेच रहे हैं। यूनिवर्सिटी से जो लड़के पढ़कर निकलते हैं, वही आगे चल कर अधिकारी बनते हैं। आप यहां ह्यूमन रिसोर्स को डेवलप कर रहे हैं। अगर आप इसे धन उगाही की नजर से देखेंगे, तो अपने लक्ष्य से भटक जाएंगे। वीसी मैडम का लड़का तो बाहर की यूनिवर्सिटी में पढ़ता है, यहां गरीब घर के लड़के आते हैं। वह तो आ ही नहीं पाएंगे।" अखिलेश ने यूनिवर्सिटी की महंगी हॉस्टल फीस का भी मुद्दा उठाया।

NSUI के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव।
NSUI के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी ABVP: यूनियन के कार्यकर्ता अतेंद्र सिंह ने कहा, "फीस बढ़ाने का फैसला पूरी तरह से गलत है। अगर फीस बढ़ानी थी, तो यूनिवर्सिटी प्रशासन को बात करनी चाहिए थी। छात्र संघ के पदाधिकारी, पीएचडी स्कॉलरों के सामने प्रस्ताव आता तब जाकर सही रहता।"

विरोध प्रदर्शन के बीच आत्मदाह की कोशिशों के सवाल पर अतेंद्र कहते हैं, "हमारा संगठन इसका समर्थन नहीं करता। लड़ाई जिंदा रहकर ही लड़ी जा सकती है। आप विश्वविद्यालय बंद करवा दीजिए। चक्का जाम कर दीजिए। लेकिन आत्महत्या नहीं करिए। इससे यूनिवर्सिटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन आपके परिवार पर जरूर इसका असर पड़ेगा।"

ABVP के छात्रनेता अतेंद्र सिंह का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की हॉस्टल फीस पूरे देश में सबसे महंगी है। गरीब परिवार का बच्चा यहां रहकर पढ़ ही नहीं सकता है।
ABVP के छात्रनेता अतेंद्र सिंह का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की हॉस्टल फीस पूरे देश में सबसे महंगी है। गरीब परिवार का बच्चा यहां रहकर पढ़ ही नहीं सकता है।

समाजवादी छात्रसभा: छात्रनेता शुभम ने बताया, "यहां पढ़ाई करने वाले छात्रों की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं रही है। अगर अब फीस बढ़ा दी जाएगी, तो बच्चे आगे कैसे पढ़ाई कर पाएंगे। फीस न बढ़ती, तो छात्र मिट्टी का तेल पीने पर मजबूर न होते।"

फीस बढ़ोतरी के खिलाफ इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ एकजुट हुए SP, NSUI, ABVP के छात्र नेता।
फीस बढ़ोतरी के खिलाफ इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ एकजुट हुए SP, NSUI, ABVP के छात्र नेता।
  • अब देश की बड़ी यूनिवर्सिटीज और AU की हॉस्टल फीस से जुड़े आंकड़े देख लेते हैं...
ये सभी विश्वविद्यालयों में ली जाने वाली सालाना हॉस्टल फीस है।
ये सभी विश्वविद्यालयों में ली जाने वाली सालाना हॉस्टल फीस है।

आखिर में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में बीते 15 दिनों में कब और क्या हुआ, यह भी जान लीजिए...

  • 6 सितंबर: फीस वृद्धि के विरोध में पांच छात्र (आयुष प्रियदर्शी, अभिषेक यादव, राहुल सरोज, मनजीत पटेल और गौरव गौड़) आमरण अनशन पर बैठे।
  • 7 सितंबर: इलाहाबाद विश्वविद्यालय कैंपस में हजारों छात्रों ने पैदल मार्च किया और नारेबाजी की।
  • 8 सितंबर: फीस वृद्धि के विरोध में छात्र नेताओं ने बैठक कर निर्णय लिया कि यदि फीस में कमी नहीं की गई, तो हम सामूहिक रूप से प्राणों की आहूति देंगे।
  • 9 सितंबर: NSUI के प्रदेश अध्यक्ष और छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में छात्रों ने अधिष्ठाता छात्र कल्याण को दो घंटे तक बंधक बनाया।
  • 10 सितंबर: अनशनरत छात्र गौरव गौड़ की हालत बिगड़ गई तो उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे आक्रोश मार्च निकालने की रणनीति बनाई गई।
  • 11 सितंबर: विश्वविद्यालय परिसर में सैकड़ों छात्रों ने आक्रोश मार्च निकाला। अनशन कर रहे छात्र मनजीत और राहुल सरोज की हालत बिगड़ी और दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
  • 13 सितंबर: सपा प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय लोक दल और छात्र संगठन ने समर्थन दिया।
  • 14 सितंबर: आम आदमी पार्टी का समर्थन भी मिला।
  • 15 सितंबर: छात्रों ने मशाल जुलूस निकाला।
  • 16 सितंबर: प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर छात्रों का समर्थन दिया। शिवपाल यादव की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने समर्थन दिया। अनुराग यादव नाम के छात्र की हालत बिगड़ी।
  • 17 सितंबर: छात्र नेताओं ने बैठक कर अगली रणनीति बनाई।
18 सितंबर को छात्रों ने भैंस के आगे बीन बजाई और विरोध प्रदर्शन किया।
18 सितंबर को छात्रों ने भैंस के आगे बीन बजाई और विरोध प्रदर्शन किया।
  • 19 सितंबर: आदर्श भदौरिया नाम के छात्र ने मिट्टी का तेल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया।
  • 20 सितंबर: छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किया। आर या पार मंगलवार का नाम देते हुए और उग्र विरोध प्रदर्शन किया। एक छात्र ने मिट्‌टी का तेल पी लिया और एक छात्र कुलपति कार्यालय की छत पर चढ़कर कूदने का प्रयास किया।
  • 21 सितंबर: समाजवादी छात्रसभा के छात्र नेता अजय यादव सम्राट ने आरोप लगाया कि उसके घर पर शासन-प्रशासन ने PDA और पुलिस की टीम भेजकर वीडियो ग्राफी की है। उसे डर है कि उसके घर पर बुलडोजर चलाया जाएगा।
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