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कोरोना के ट्रीटमेंट में KGMU का परचम:KGMU ने इम्यूनोग्लोब्लिन थेरेपी के जरिए कोरोना मरीजों के सफल इलाज का किया दावा; गंभीर मरीजों के इलाज में ज्यादा कारगर

लखनऊ20 दिन पहले
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केजीएमयू में इम्यूनोग्लोब्लिन थेरेपी के जरिए कोरोना मरीजों के सफल इलाज का दावा - Dainik Bhaskar
केजीएमयू में इम्यूनोग्लोब्लिन थेरेपी के जरिए कोरोना मरीजों के सफल इलाज का दावा

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय (KGMU) में कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में इंट्रावेनस इम्यूनोग्लोब्लिन थेरेपी (IVIG) के सफल प्रयोग किया गया है। दावा है कि यह एंटी वॉयरल दवा कोरोना संक्रमण में अधिक कारगर है। डॉक्टरों की यह स्टडी 'द जनरल ऑफ इंफेक्शियस डिजीज' में प्रकाशित हुई है।

KGMU के मेडिसिन विभाग के डॉ. डी हिमांशु के मुताबिक, संस्थान में भर्ती 100 मरीजों का चयन किया गया। शोध में 67 पुरुष व 33 महिला मरीज को शामिल किया गया। इन मरीजों की उम्र 18 से 80 वर्ष की बीच रही। कोरोना पीड़ित इन मरीजों के फेफड़ों में निमोनिया का भी असर था। ऐसे में 50-50 मरीजों को दो ग्रुपों में बांटा गया।

एक ग्रुप के 50 मरीजों को इंट्रावेनस इम्यूनोग्लोब्लिन थेरेपी दी गई। वहीं दूसरे 50 मरीजों को कोरोना की अन्य दवाएं दी गईं। ऐसे में थेरेपी देने वाले मरीजों में तेजी से सुधार मिला। IVIG थेरेपी कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में ज्यादा कारगर है।

पोस्ट कोविड कंप्लीकेशन्स की भी आशंका कम

इस थिरेपी के दुष्प्रभाव भी मरीज पर कम देखने को मिले। वहीं संक्रमण की पुष्टि के 48 घंटे के भीतर थेरेपी दे दी जाए तो और भी बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इस शोध को 'द जनरल ऑफ इंफेक्शियस डिजीज' में प्रकाशित किया गया है।

डॉ. डी हिंमाशु के मुताबिक थेरेपी वाले मरीजों में बुखार जल्द सामान्य हुआ। उनके शरीर में ऑक्सीजन के स्तर में तेजी से सुधार देखने को मिला। फेफड़े में रिकवरी होने से सांस लेने की प्रक्रिया में सुधार हुआ। काफी हद तक वेंटिलेटर सपोर्ट लेने से बचाव हुआ। कुछ ही मरीज वेंटिलेटर पर गए और कम समय में ही ठीक हो गए।

22 लाख कोरोना टेस्ट करने वाले देश का पहला संस्थान बना KGMU

संस्थान में अब तक 22 लाख नमूनों की जांच की जा चुकी है। वहीं कोरोना की जीनोम सिक्वेंसिंग भी की जा रही है। इसके 120 नमूनों के टेस्ट हो चुके हैं। ट्रॉमा सेंटर में भर्ती होने वाले मरीजों की कोरोना रिपोर्ट पांच से छह घंटे में मुहैया कराई जा रही है। शेष मरीजों को 12 घंटे बाद रिपोर्ट व जीन सिक्वेंसिंग टेस्ट में सात से 15 दिन के वक्त लगता है। वहीं अब केजीएमयू में कोरोना की जांच का इंतजार घटेगा।इसके लिए लैब में ऑटोमेटिक मशीनें लगाई गई हैं।ऐसे में संस्थान में जांच की क्षमता डबल हो गई।

केजीएमयू में प्रदेश भर से कोरोना जांच के लिए नमूने आ रहे हैं। यहां 24 घंटे कोरोना की जांच हो रही है।वहीं कोरोना की संभावित तीसरी लहर में सैंपल अधिक आने की उम्मीद है।माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. अमिता जैन के मुताबिक अभी प्रतिदिन छह से आठ हजार नमूनों की जांच हो रही थी। कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर लैब की क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में ऑटोमेटिक मशीन बढ़ा दी गई है।अब रोजाना 15 हजार नमूनों की जांच हो सकेगी।

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