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UP विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोट बैंक पर निगाहें:भारत रत्न अंबेडकर को भुनाने की तैयारी में BJP सरकार, 50 करोड़ खर्च कर लखनऊ में बनवाएगी स्मारक; राष्ट्रपति कोविंद कर सकते हैं शिलान्यास

लखनऊएक वर्ष पहले
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उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले BJP सरकार पूरी तरह से चुनावी मोड में आ चुकी है। योगी सरकार अब लखनऊ के ऐशबाग में 50 करोड़ की लागत से भारत रत्न भीम राव अम्बेडकर मेमोरियल एंड कल्चरल सेंटर का निर्माण करवाएगी। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 28 जून को इसकी आधारशिला रख सकते हैं। शासन स्तर पर इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

BJP सरकार से जुड़े सूत्रों की माने तो दलित आइकॉन अंबेडकर की 45 फीट ऊंची प्रतिमा लगाई जाएगी। इसे बनाने का ऑर्डर दे दिया गया है जो दिसंबर से पहले बनकर तैयार हो जाएगी। अंबेडकर की पुण्य तिथि 6 दिसंबर को इसका उद्घाटन करवाए जाने की प्लानिंग है।

दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की सरकार ने यूपी के विभिन्न हिस्सों में अंबेडकर की प्रतिमाएं लगवाई गईं थीं। अंबेडकर की पत्नी रमा बाई के नाम पर लखनऊ में एक बड़ा स्मारक भी बनवाया गया है। अधिकारियों का दावा है की ऐशबाग में बनने वाला नया स्मारक कल्चरल और एजुकेशनल हब के तौर पर विकसित किया जाएगा।

भीमराव अम्बेडकर कल्चर मेमोरियल में मिलेंगी कई सुविधाएं

  • शासन से जुड़े एक वरिष्ठ IAS अधिकारी ने बताया, भारत रत्न अंबेडकर के नाम पर यह ऐतिहासिक मेमोरियल सेंटर होगा। यहां पर अंबेडकर की प्रतिमा के साथ ही डिजिटल लाइब्रेरी, म्यूजियम और शानदार एडिटोरियम भी बनाया जाएगा।
  • स्मारक में पूरे साल कल्चरल प्रोग्राम का आयोजन किया जाएगा। छात्रों के लिए सेमिनार के आयोजन किए जाएंगे। यहां छात्रों को अंबेडकर पर शोध करने के लिए जरूरी चीज मुहैया करवाएगी। यहां बनने वाली लाइब्रेरी को काफी रिच किया जाएगा और उसमे अंबेडकर से जुड़ी किताबों का संग्रह होगा।
  • अधिकारी ने बताया कि ऐसे प्रयास किए जाएंगे कि यह स्मारक 6 दिसंबर से पहले तैयार हो जाए। स्मारक के स्वायल टैस्टिंग का काम भी शुरू कर दिया गया है। अभी तक कि योजना के मुताबिक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 28 जून को इसका शिलान्यास करने वाले हैं।

स्मारकों और मूर्तियों पर खुद सवाल उठा चुकी है BJP

बीएसपी के कार्यकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने लखनऊ और नोएडा समेत कई शहरों में अंबेडकर पार्क बनवाने का काम किया था। मायावती ने तब लखनऊ में अपनी मूर्तियां भी लगवाई थीं, जिसको लेकर खुद बीजेपी ने ही सवाल खड़े किए थे। अब विरोधियों का कहना है कि नए स्मारक की बजाए क्या लखनऊ में बने पुराने स्मारकों को ही और विकसित नहीं किया जा सकता है। उसमें भी तो सरकार का पैसा लगा है। सरकार उन स्मारकों पर ध्यान भी नही दे रही है। सिर्फ चुनावी फायदे के लिए सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही है।

इस मामले को लेकर बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने कहा, ''बीजेपी हमेशा से बाबा साहब अम्बेडकर के आदर्शों को लेकर आगे बढ़ती रही है। यह पार्टी समाजवादियों की तरह नही है जो सरकार बनने पर अंबेडकर की मूर्तियों तोड़ने का काम करे। बीजेपी ने अंबेडकर से जुड़ी जगहों को धरोहर के तौर पर संरक्षित करने का काम किया है।''

BJP के आइकॉन गोडसे हैं, अंबेडकर नहीं: सपा
वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता राजीव राय ने योगी सरकार को निशाने पर लेते हुए इसे चुनावी कदम करार दिया। राजीव राय ने कहा, ''सरकार चाहे अंबेडकर की मूर्ति लगवाए या गांधी कि, इनकी पहचान गोडसे वालों से ही होगी। यूपी कि दिशा विहीन और सोच विहीन सरकार से और क्या उम्मीद की जा सकती है। ये लोग लखनऊ की धरोहर रिवर फ्रंट हो या पहले से बने अंबेडकर पार्क हो, उनको तो संरक्षित कर नहीं पा रही है। चुनाव से ठीक पहले दलित समाज को नया लॉलीपॉप पकड़ा रही है।''

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