2 दिन में योगी को दूसरा झटका:स्वामी के बाद मंत्री दारा सिंह का इस्तीफा, वजह- मुख्तार अंसारी के गढ़ से चुनाव लड़ेंगे, यहां जीत के लिए सपा जरूरी

लखनऊ4 महीने पहले

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दो दिन में दूसरा बड़ा झटका लगा है। कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के अगले ही दिन बुधवार को वन मंत्री दारा सिंह चौहान ने भी इस्तीफा दे दिया। दारा सिंह ने सोची-समझी रणनीति के तहत भाजपा से इस्तीफा दिया है। वह अब घोसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। अभी तक यह सीट मुख्तार अंसारी के बेटे को मिलने की चर्चा है। माना जा रहा है कि अगर दारा सिंह इस सीट से सपा के टिकट पर लड़ते हैं तो उनकी जीत एकदम पक्की होगी।

वहीं, सपा भी मुख्तार अंसारी का मऊ और घोसी गढ़ होने की वजह से, उसकी आपराधिक छवि से दूर रहने के लिए दारा सिंह को टिकट दे सकती है। उनकी मौजूदा सीट मऊ की मधुबन विधानसभा भी सपा के साथ जाने से मजबूत हो रही है। हालांकि जातिगत समीकरणों के हिसाब से उनके लिए घोसी सीट ज्यादा सुरक्षित दिख रही है।

दारा ने वजह कुछ और बताई, पर अखिलेश ने इशारा कर दिया
दारा सिंह ने योगी को भेजे इस्तीफे में लिखा- मैंने अपनी जिम्मेदारी पूरे मन से निभाई, पर सरकार किसानों, पिछड़ों, वंचितों, बेरोजगारों की उपेक्षा कर रही है। इसके अलावा पिछड़ों और दलितों के आरक्षण को लेकर जो खिलवाड़ हो रहा है, उससे मैं आहत हूं। इसी वजह से मंत्रिमंडल से इस्तीफा देता हूं।

उधर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी दारा सिंह के उनकी पार्टी में शामिल होने का इशारा किया। अखिलेश ने कहा कि यूपी की जनता घृणा और नकारात्मक राजनीति से आजिज आ चुकी है। हमारी पार्टी सभी को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। हमें खुशी है कि स्वामी प्रसाद साथ आए, अब और भी लोग आए हैं। इससे हमारी पार्टी की लड़ाई आसान हो गई है।

दारा सिंह मऊ की मधुबन सीट से 2017 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर जीते थे। सही मायने में दारा सिंह ने क्षेत्र में अपने प्रभाव से भाजपा को जिताया था। यहां पहली बार भाजपा को जीत मिली। सपा को राजभर का साथ मिलने पर अब इस सीट पर गुणा-भाग बदल सकते हैं। जीत पक्की करने के लिए वह राह बदलते नजर आ रहे हैं।

आइए दोनों ही सीट पर जानते हैं, अब नए समीकरण कैसे बन रहे हैं, और दारा सिंह के लिए फायदेमंद कैसे साबित होंगे।

मधुबन विधानसभा सीट

  • 70 हजार दलित वोटर
  • 60 हजार यादव वोटर
  • 22 हजार मुस्लिम वोटर
  • 24 हजार चौहान वोटर
  • 25 हजार राजभर वोटर
  • 40 हजार में ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत और बनिया वोटर शामिल
  • कुल मतदाता - 3 लाख 93 हजार 299

समीकरण - इस सीट पर दलित वोटर सबसे ज्यादा हैं। दूसरे नंबर पर यादव आते हैं। अखिलेश और राजभर के गठजोड़ के बाद राजभर-यादव को मिलाकर देखें तो यह आंकड़ा 84 हजार पहुंच जाता है। ऐसे में, अगर चौहान और मुस्लिम वोटर भी साथ देते हैं तो सपा से लड़ने वाले उम्मीदवार की जीत पक्की है। दारा सिंह के पास 25 हजार चौहान वोटर भी हैं जो पिछली बार की तरह ही उनका साथ दे सकते हैं।

कौन जीता, कौन हारा

  • भाजपा के दारा सिंह चौहान ने कांग्रेस के अमरेश चंद्र पांडे को 29415 वोटों से हराया था।
  • पहली बार यह सीट भाजपा को मिली।
  • 2007 और 2012 में इस सीट पर बसपा का कब्जा था।
  • दोनों ही बार बसपा के उमेश चंद पांडे यहां से विधायक चुने गए।

अब बात घोसी विधानसभा सीट की करते हैं...

घोसी विधानसभा सीट

  • मुस्लिम - 60 हजार
  • यादव - 40 हजार
  • चौहान- 35 हजार
  • राजभर- 45 हजार
  • दलित- 40 हजार
  • अन्य अनुसूचित जाति - 20 हजार
  • कुर्मी- 4 हजार
  • सवर्ण- 40 हजार
  • निषाद- 15 हजार
  • मौर्य- 12 हजार
  • भूमिहार- 15 हजार
  • अन्य पिछड़े 20 हजार

समीकरण - यह सीट मुस्लिम बाहुल्य है। नंबर 2 पर यादव आते हैं। चौहान और राजभर भी प्रभाव रखते हैं। यानी हिसाब सीधा है, जिसके मुस्लिम-यादव-राजभर उसकी जीत पक्की। इसमें चौहान भी जोड़ दिए जाएं तो 2 लाख से ज्यादा वोटर हो जाते हैं। इसलिए दारा सिंह चौहान की नजर मधुबन से ज्यादा घोसी पर है।

दारा सिंह का मऊ समेत 20 जिलों में प्रभाव
सूत्रों के मुताबिक दारा सिंह चौहान सपा के टिकट पर मऊ की घोसी विधान सभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। यह सीट गठबंधन में ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा को मिलने वाली है, जहां से अभी तक मुख्तार अंसारी के बड़े बेटे अब्बास के चुनाव लड़ने की बात चल रही थी। दारा सिंह चौहान चौहान समाज के बड़े नेता है। इनका असर मऊ समेत 20 जिलों में है। ऐसे में बीजेपी इनको किसी भी स्थिति में नहीं छोड़ना चाहती है।

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