TET पेपर लीक में वरुण ने UP सरकार को घेरा:कहा- रसूखदारों पर एक्शन कब होगा, छोटी मछलियों पर कार्रवाई से काम नहीं चलेगा

लखनऊएक वर्ष पहले

पीलीभीत के BJP सांसद वरुण गांधी ने योगी सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। UPTET का पेपर लीक होने पर कहा कि इस दल की छोटी मछलियों पर कार्रवाई से कोई काम नहीं चलेगा। बल्कि उन राजनैतिक व शिक्षा माफिया पर शिकंजा कसना चाहिए। जिन्होंने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।

वरुण गांधी ने कहा कि आखिर रसूखदारों पर एक्शन कब होगा। ज्यादातर शिक्षण संस्थानों के मालिक राजनैतिक रसूखदार है। बता दें कि कृषि कानून और किसानों के मुद्दे पर भी वरुण गांधी सरकार के खिलाफ असहज स्थिति उत्‍पन्‍न कर चुके हैं। अब उन्‍होंने UPTET परीक्षा रद्द होने के मसले पर यूपी सरकार पर निशाना साधा है। इससे पहले भी वरूण गांधी भाजपा को किसानों के मुद्दे पर कई चिट्‌ठी लिख चुके हैं।

पोस्ट कर कसा था तंज

वरूण गांधी ने किसान के फसल जलाने पर BJP को घेरा था। उत्तर प्रदेश के किसान श्री समोध सिंह पिछले 15 दिनों से अपनी धान की फसल को बेचने के लिए मंडियों में मारे-मारे फिर रहे थे, जब धान बिका नहीं तो निराश होकर इसमें स्वयं आग लगा दी। इस व्यवस्था ने किसानों को कहां लाकर खड़ा कर दिया है? कृषि नीति पर पुनर्चिंतन आज की सबसे बड़ी जरूरत है। पिछले दिनों ही वरूण गांधी तीन कृषि कानूनों को लेकर मुखर हैं। क्योंकि पीलीभीत तराई का क्षेत्र है और जहां किसान काफी निर्णायक हैं।

किसान महापंचायत का किया था समर्थन

वरुण ने 12 सितंबर को भी किसानों के मुद्दे उठाते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ को खत लिखा था। तब वरुण ने भूमिपुत्रों की बात सुनते की अपील करते हुए पत्र में 7 पॉइंट लिखे थे। वरुण गांधी ने इसमें गन्ना के दाम, बकाया भुगतान, धान की खरीदारी समेत 7 मुद्दों को उठाया था। 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में हुई महापंचायत में वरुण गांधी ने किसानों का समर्थन कर सरकार को असहज महसूस कराया था।

700 किसानों की बचाई जा सकती थी जान

प्रधानमंत्री के द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के अगले ही दिन ट्वीट कर वरुण गांधी ने कहा है था कि देश के किसानों ने भीषण वर्षा, तूफान और विपरीत मौसम का सामना करते हुए आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखा। इसके लिए किसानों को बधाई दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा है कि यदि कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला उचित समय पर कर लिया जाता तो उन 700 किसानों की जान बचाई जा सकती थी जिन्होंने इस आंदोलन की राह में अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

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