योगी सरकार के टॉप-10 डिफॉल्टर डिपार्टमेंट:10 दिन में शिकायतें सुलझानी थीं, योगी के रिव्यू में 6 साल में 10 हजार से ज्यादा शिकायतें पेंडिंग मिलीं

लखनऊ5 महीने पहलेलेखक: विनोद मिश्र

योगी सरकार 2.0 के 100 दिन पूरे होने वाले हैं। सीएम की प्राथमिकताओं में समस्याओं का तेज निस्तारण रहा है। अब पिछले 6 साल में पेंडिंग शिकायतों की तरफ देखें तो तस्वीर ठीक उलट मिलती है। सरकार के 10 डिपार्टमेंट में वर्ष 2017 से 10558 शिकायतों की सुनवाई नहीं हुई है।

सीएम योगी ने 25 मई 2022 को विभागों की समीक्षा की। इस रिव्यू में आंकड़े सामने आए। कई मामलों में अधिकारियों के मार्क करने के बाद भी समस्या नहीं सुलझ सकी है। मतलब ये कि आपने शिकायत की। उसे अधिकारी एक-दूसरे को मार्क करते रहे, लेकिन आपकी समस्या जस की तस बन रही।

योगी सरकार के टॉप-10 डिफॉल्टर डिपार्टमेंट कौन से हैं...

शिकायतों के निस्तारण के लिए 7 से 30 दिन का समय तय
डिपार्टमेंट को डिफॉल्टर कैसे माना जाता हैं? दरअसल, तय समय सीमा के अंदर अगर शिकायत का पूरी तरह से निस्तारण नहीं होता है, तो इसको डिफॉल्टर कहा जाता है। अलग-अलग शिकायतों को निस्तारित करने के लिए 7 दिन से लेकर 30 दिन तक का समय तय है।

3 तरीकों से होती हैं शिकायतें
योगी सरकार में जनता की समस्याओं की सुनवाई के लिए नियम तय हैं। सीएम हर रोज लखनऊ में जनता दरबार लगाते हैं। विभाग की समस्या के लिए आम जनता यूपी सकार की जनसुनवाई-समाधान वेबसाइट https://www.jansunwai.up.nic.in पर भी शिकायत कर सकती है। सीएम योगी हेल्पलाइन नंबर 1076 पर सीधे फोन करके भी शिकायत कर सकती है। यहां आने वाली शिकायतों को 7 से 30 दिन के अंदर निस्तारण करना होता है।

जिलों में भी सुनी जाती हैं समस्या
हर जिले में जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व पुलिस अधीक्षक, पुलिस कमिश्नरेट में पुलिस आयुक्त अपने कार्यालय में सभी कार्य दिवस में सुबह 10 से 11 बजे तक जनसुनवाई कर रहे हैं।

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