CM योगी के निर्देशों का नहीं हो रहा पालन:कोरोना ने छीन लिया माता-पिता का साया, सहायता की राह देख रहे लखनऊ के अनाथ बच्चे; फीस न भर पाने से स्कूल ने निकाला

लखनऊ6 महीने पहले
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हुस्नआरा के साथ सानिया। - Dainik Bhaskar
हुस्नआरा के साथ सानिया।

उत्तर प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी रुप देने में विभागों की सुस्ती जरूरतमंदों पर भारी पड़ रही है। इसकी नजीर हालही में शुरू हुई कारोना काल में अनाथ हुए बच्चों के संरक्षण की योजना है। सीएम योगी के ऐलान के बाद भी घोषणा के बाद लखनऊ के जिला पोषण विभाग की चाल इतनी धीमी है कि अब तक महज 105 बच्चों को चिंहित किया जा सका है, जबकि राजधानी के हर इलाके में ऐसे तमाम बेसहारा बच्चे मदद न मिल पाने की वजह से खानाबदोश जिंदगी जीने पर मजबूर हैं। ऐसे ही तीन बच्चों को दो वक्त का निवाला देने वालों ने बुधवार को दैनिक भास्कर से संपर्क किया।

डालीगंज के हसनगंज में रामाधीन सिंह रोड निवासी भोले शंकर बाजपेई की कोरोना की पहली लहर पिछले साल जुलाई में मौत हो गई थी। इसके थोड़े दिन बाद उनकी पत्नी मिनाक्षी भी संक्रमण से लड़ते हुए मर गईं। दंपती अपने पीछे दो 12 साल की बेटी प्रियमांसी और 6 साल के बेटे शिवाय को छोड़ गए। दोनों बच्चे रामराम बैंक चौराहा स्थित सेंट एंथनी स्कूल में पढ़ाई करते थे। माता-पिता की मौत के बाद इन बच्चों का एक मात्र सहारा 65 वर्षीय दादी मधुबाला बची जो खुद बेटे और बहू पर आश्रित थीं।

बुजुर्ग दादी के लिए दोनों बच्चों को दो वक्त की रोटी दे पाना मुश्किल था तो स्कूल की फीस कहां से भरती। लिहाजा स्कूल ने बच्चों को निकाल दिया। तीन दिन पहले मधुबाला को कोरोना काल अनाथ हुए बच्चो को सरकार की तरफ से मिलने वाली मदद की जानकारी हुई। मधुबाला का कहना है कि बच्चों की हालत देखी नहीं जाती। इंतजार में हूं की शायद सरकार का कोई मुलाजिम इन बच्चों की भी खोज खबर लेने आएगा।

बेटी को समाज सेविका और बेटे को मामा दे रहे दो वक्त का निवाला

हसनगंज खदरा के मक्कागंज में रहने वाली समाज सेविका हुस्नाआरा सिलाई कढ़ाई करके अपना परिवार चलाती हैं। कुछ दिन पहले वह कानपुर के बाबूपुरवा स्थित मायके गईं तो कोरोना से अनाथ हुए दो बच्चों की पीड़ा देख उनका दिल दहल गया। 12 साल की सानिया और 8 साल के अरहान के पिता शाहिद की कोरोना के पिछली लहर में मौत हुई थी। उनकी पत्नी फरजाना मेहनत मजदूरी करके बच्चों का पेट पाल रही थी। पिछले महीने कोरोना ने मां फरजाना साया भी बच्चों के सिर से छीन लिया।

मोहल्ले में घरों से मिल रही दो वक्त रोटी खाकर खानाबदोश जिंदगी जी रहे बच्चों को हुस्नआरा ने सहारा दिया। उनके कहने पर अरहान को उसके मामा अपने साथ ले गए और सानिया अब हुस्नआरा के सहारे जी रही है। हुस्नाआरा ने बताया कि अनाथ बच्चों के लिए शुरु हुई योजना की मदद सानिया को कब मिलेगी इसी की राह देख रही हूं।

जिला प्रोबेशन अधिकारी सुधाकर पाण्डेय का कहना है कि जिले में 105 बच्चों को चिंहित करके योजना का लाभ देने की प्रक्रिया शुरु की जा चुकी है। बाकी बच्चों की तलाश चल रही है। प्रदेश भर में 2110 बच्चों को चिंहित किया जा चुका है।

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