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BSP महासचिव सतीश मिश्रा का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू:बोले- मेरी पत्नी और बेटे ने सिर्फ मंच शेयर किया, वे पार्टी मेंबर नहीं; यदि बसपा खत्म हो गई तो हमारे 'प्रबुद्ध मॉडल' को BJP और दूसरे दल कॉपी क्यों कर रहे?

लखनऊ14 दिन पहलेलेखक: आदित्य तिवारी

उत्तर प्रदेश में 2022 का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे सियासी पारा भी गर्म हो रहा है। बसपा ने 2007 के सोशल इंजीनिरिंग फॅामूले को अपनाते हुए यूपी के सभी जिलों में प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन किया। आज लखनऊ में बसपा अध्यक्ष मायावती समापन करेंगी। ये उनका 2019 लोकसभा चुनाव के बाद पहला सबसे बड़ा सार्वजनिक मंच है। उनके साथ मंच पर महासचिव और प्रबुद्ध सम्मेलन के अगुवा सतीश चन्द्र मिश्रा भी रहेंगे।

इस सम्मेलन और आगे की रणनीति को लेकर पहली बार सतीश चंद्र मिश्रा से दैनिक भास्कर एक्सलूसिव बात की। इसमें उन्होंने योगी सरकार में ब्राह्मणों की स्थिति, अपने बेटे और पत्नी की बसपा के मंचों पर मौजूदगी और कई मामलों पर खुलकर बात की।

पढ़िए सतीश चंद्र मिश्रा से एक्सक्लूसिव बातचीत...

सवाल- क्या बसपा में परिवार वाद लौट आया है? पहले मायावती के भतीजे आए, इस बार आपकी पत्नी और बेटे भी मंच पर हैं?
यह बिल्कुल गलत है। ऐसा कभी नहीं था। हमारी पत्नी और बेटे का केवल मिशन इतना है कि बहन जी मुख्यमंत्री बनें। इसके लिए उन्होंने मंच शेयर किया। वह के परिवार के सदस्य होने के नाते बहुजन समाज पार्टी की सपोर्टर हैं। बहनजी परिवार वाद को बढ़ावा देने के फैसले के खिलाफ रही हैं।

सवाल: ब्राह्मण अब प्रबुद्ध क्यों हो गए? बसपा शासन में सबसे ज्यादा हरिजन एक्ट के केस हुए थे?
भाजपा सरकार के साढ़े चार साल में केवल ब्राह्मणों को ही मारा गया, सताया गया है। हरिजन केस करने की बात बिल्कुल गलत है। बसपा सरकार में इसके लिए एक विशेष गाइड लाइन जारी की गई थी, जिसकी जांच के बाद में सच्चाई मिलने पर ही कार्रवाई होती थी। यह केवल राजनीतिक दलों के आरोप है।

सवाल: बसपा के बाद भाजपा-सपा भी ब्राह्मणों का सम्मेलन करा रही है? क्या ब्राह्मण ही वोट का ट्रंप कार्ड हैं?
बसपा ने कभी भी किसी भी जाति को ट्रंप कार्ड नहीं बनाया है। भाजपा सरकार में ब्राह्मणों को टारगेट करते हुए उन पर अन्याय किया गया। एनकाउंटर में ब्राह्मणों को सबसे ज्यादा मारा गया है। रही बात ब्राह्मणों के वोट का ट्रंप कार्ड होने की तो जो सताया गया, जिस पर अत्याचार हुआ वह ही सच को जानता है। बसपा सभी दिन ब्राह्मणों के साथ रही है। हमारी पार्टी में सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की नीति के साथ कार्य और फैसले किए जाते हैं।

सवाल- बसपा इस बार दलितों का सम्मेलन क्यों नहीं कर रही है?
जल्द की सभी को पता चल जाएगा कि बसपा दलितों का सम्मेलन कब करेगी। अभी हम सबको प्रबुद्ध सम्मेलन की जिम्मेदारी दी गई है।

सवाल- ब्राह्मण नेताओं का आरोप है कि दलित अब सवर्ण हो गए हैं, भाजपा सरकार में दलित उत्पीड़न के सबसे ज्यादा केस दर्ज हुए हैं?
दलित सवर्ण हो गए यह कहने वाले ब्राह्मण नेता नहीं है। दलित का साथ देने वाले, उन्हें आगे बढ़ाने वाले सभी बसपा के साथ हैं। रही बात दलित उत्पीड़न की तो भाजपा सरकार में हुआ है यह बात तो बिल्कुल सत्य है। साढ़े चार साल की योगी सरकार में अगर किसी को टारगेट किया गया तो वह ब्राह्मण रहा है। उसके बाद दलित पर अत्याचार किया गया। उनकी जमीनें हड़प ली गईं, उन फर्जी मुकदमे लिखे गए हैं।

सवाल- बसपा के बड़े नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, क्या अब बसपा में सेकंड लाइन नहीं बची?
बसपा के जो भी नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, वह उनके निजी फैसले हैं। पार्टी में सभी नेता हैं, जो हमारी नेता बहन मायावती के साथ हैं। जो निकाले गए वह पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे। जिनको निकालने का फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वयं करती हैं।

सवाल- विपक्षी पार्टियां कह रही हैं कि अब तो बसपा खत्म हो गई?
ऐसा कहने वाले आज बसपा के प्रबुद्ध सम्मेलन मॉडल को अपनाने पर मजबूर हैं। उनके पास अपना कोई मुद्दा नहीं है। इसलिए बसपा के प्रबुद्ध सम्मेलन से सभी राजनीतिक पार्टियां घबरा गई हैं। खासकर भाजपा तो इतना सहम गई कि उनको जिले व विधानसभा वार प्रबुद्ध सम्मेलन करना पड़ रहा है।

सवाल- आपकी मुखिया मायावती और नेता 5 साल से जनता के बीच से गायब हैं, ऐसा क्यों?
यह कहना गलत है। समय-समय पर राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती पार्टी के पदाधिकारियों व जिले के नेताओं के साथ बैठकें करती रहती हैं। बीते दो साल से ज्यादा समय कोराना से पूरी दुनिया परेशान है। इसलिए जन सभा का आयोजन नहीं हो सका। लोकसभा 2019 के चुनाव में बहनजी कई जनसभाएं की थीं। आज मंगलवार को ही वह विचार संगोष्ठी को संबोधित करेंगी।

सवाल- जिला पंचायत चुनाव में आपकी पार्टी ने प्रत्याशी नहीं उतारे, क्या भाजपा को वॉकओवर देने का नहीं काम किया?
पंचायत चुनाव में हमारे सबसे ज्यादा सदस्य जीते। हमने मजबूती से चुनाव लड़ा, लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव इसलिए नहीं लड़ा, क्योंकि वहां पर गुंडागर्दी, सरकारी तंत्र का प्रयोग और महिलाओं के चीरहरण देखने तक को मिला जो बसपा को मंजूर नहीं है।

सवाल- आपकी पार्टी पर आरोप है कि आप पैसे लेकर विधानसभा सीटें बेचते हैं? प्रत्याशी तय करने का पैरामीटर्स क्या पैसा ही है?
यह सब केवल आरोप हैं, जो केवल दूसरे दलों के नेताओं के द्वारा लगाए जाते हैं। इसमें कोई सच्चाई नहीं है।

सवाल- आपके नेता और आप मीडिया में सीधे सवालों से क्यों बचते हैं, आपका कोई भी प्रवक्ता टीवी पर नहीं आता है?
सवाल के जबाव से बचने की बात होती तो हम आपसे बात नहीं कर रहे होते। हमारी पार्टी के भी प्रवक्ता नियुक्त किए गए हैं जो टीवी और अन्य मीडिया पर सवाल का जबाव देते हैं।

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