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सरकार्यवाह का चार दिवसीय लखनऊ दौरा:दत्तात्रेय होसबोले ने संगठन और सरकार की नब्ज टटोली, 4 दिन के मंथन में बदलाव नहीं विस्तार पर रहा फोकस

लखनऊ19 दिन पहले
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संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय ने अपने चार दिवसीय दौरे के दौरान चेहरा बदलने की बजाए संगठन के विस्तार पर ही फोकस किया। - Dainik Bhaskar
संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय ने अपने चार दिवसीय दौरे के दौरान चेहरा बदलने की बजाए संगठन के विस्तार पर ही फोकस किया।
  • पार्टी सूत्रों के अनुसार संघ न तो संगठन का चेहरा बदलने को लेकर उत्सुक है न ही सीएम
  • चार दिन की मैराथन बैठक में होसबोले ने संगठन के विस्तार पर ही ज्यादा फोकस किया

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की टॉप लीडरशिप अभी से सक्रिय हो गई है। आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले पिछले दिनों लखनऊ के चार दिवसीय दौरे पर आए थे। हालांकि सामान्य तौर पर यह जानकारी सामने आयी कि लखनऊ उनका केंद्र है और उनका यह दौरा पहले से प्रस्तावित था इसलिए वह यहां पहुंचे थे। राजनीतिक हलकों में उनके दौरे के कई सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं।

पार्टी के सूत्रों की माने तो होसबोले ने चार दिनों तक संघ के पदाधिकारियों के साथ कई बैठकें की लेकिन इसमें सबसे ज्यादा फोकस बदलाव की बजाए मंत्रिमंडल के विस्तार, संगठन के काम में तेजी और पूरब से पश्चिम तक सियासी समीकरण साधने पर था। इस बीच इस बीच भाजपा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल सन्तोष सोमवार को लखनऊ आ रहे हैं। उनकी संगठन के नेताओं के साथ बैठक होनी है। होसबोले के जाने के बाद इनका दौरा काफी अहम माना जा रहा है।

संघ से जुड़े सूत्रों की माने तो दत्तात्रेय की इस चार दिवसीय बैठक में इस बात पर मंथन किया गया कि जिला पंचायत चुनाव में पार्टी की रणनीति क्या होगी, संगठन के काम को और कैसे तेज किया जाएगा क्योंकि चुनाव नजदीक हैं। योगी मंत्रिमंडल में होने वाले संभावति विस्तार पर भी चर्चा हुई। लेकिन एक बात पर सहमति बनी किसी को हटाने की बजाए पश्चिम और पूरब के सियासी समीकरण को साधने के लिए नए चेहरे जातिगत समीकरणों के हिसाब से रखे जाएं।

संघ के एक पदाधिकारी ने बताया, "ज्यादा जोर मंत्रिमंडल के विस्तार और जिला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव को लेकर था। संघ का मानना है कि जिला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव में यदि भाजपा को सफलता मिलती है तो विधानसभा चुनाव से पहले यह बूस्टर डोज का काम करेगी। कार्यकर्ता भी मोबालाइज होगा और उनके अंदर उत्साह का संचार होगा। पहला फोकस जिला पंचायत चुनाव पर ही था।"

उन्होंने कहा, मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना है लेकिन अभी नहीं। विधानसभा चुनाव में जाना है तो किसी मंत्री को हटाने की संभावना कम ही है। बैठक में मंत्रियों के कामकाज को लेकर भी चर्चा हुई। योगी कैबिनेट में पश्चिमी यूपी से चेतन चौहान, विजय कश्यप को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था लेकिन दोनों का कारोना से निधन हो चुका है। इनके रिप्लेसमेंट को लेकर पश्चिमी उप्र के कुछ नामों पर चर्चा हुई है।''

चेहरा बदलने के मूड में नहीं है संघ

संघ के इस पदाधिकारी ने बताया कि आरएसएस फिलहाल न तो संगठन का चेहरा बदलने के मूड में है न ही सरकार का। इससे जनता के बीच गलत संदेश जाएगा। जिस तरह वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह को बदलने की कोई ठोस वजह नहीं है उसी तरह सीएम का चेहरा भी नहीं बदलने जा रहा है। चुनावी वर्ष में इस तरह के बड़े बदलाव की संभावनाएं कम ही रहती हैं।

हालांकि भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने इस बात पर सहमति जतायी कि होसबोले का दौरे के सियासी मायने तो हैं लेकिन फिलहाल ज्यादा फोकस संघ, बीजेपी के कामकाज और विस्तार को लेकर हुई। भाजपा नेता ने बताया कि हां यह सच है कि विजय कश्यप संघ, चेतन चौहान, कमला रानी वरूण की जगह नए नामों मंथन चल रहा है लेकिन यह पूरी तरह जातिगत समीकरणों के आधार पर ही होगा।

बिगड़ती छवि से परेशान हैं सीएम योगी और उनकी टीम 9

वहीं दूसरी तरफ शासन से जुड़े एक वरिष्ठ आएएस अधिकारी की माने तो चार साल में ऐसा पहली बार हो रहा है कि सरकार अपनी छवि को लेकर अंदरखाने काफी परेशान है। सीएम योगी और उनकी टीम 9 के अधिकारी सरकार की छवि को बनाने का पूरा प्रयत्न कर रहे हैं लेकिन भाजपा के विधायकों, सांसदों और मंत्रियों के विरोध के सुर ने ही सरकार का जायका बिगाड़ दिया है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में काफी मिस मैनेजमेंट भी देखने को मिला।

यह पूछे जाने पर कि सांसद, विधायक और मंत्रियों ने तो अधिकारियों की तरफ से किए जा रहे मिसमैनेजमेंट को लेकर सवाल खड़े किए थे, इस पर इस अधिकारी ने कहा ''महामारी में अधिकारियों पर भी दबाव काफी ज्यादा है। संसाधन तो सरकार को लाने हैं। कोरोना की पहली लहर ठंडी होने के बाद सरकार के पास वक्त था कि वह अपनी तैयारियों को अमली जामा पहनाती लेकिन वह चुनाव में व्यस्त रही।''

बकौल आईएएस अधिकारी, ''अचानक कोरोना की दूसरी लहर के आने से सरकार और अधिकारियों को संभलने का मौका नहीं मिला। अचानक आक्सजीन और वेंटिलेटर की डिमांड हर तरफ से बढ़ने लगी। जाहिर सी बात है कि मुश्किल समय में लोग अपने विधायक और सांसद को ही पकड़ते हैं लेकिन वो भी अपने आपको मदद करने की स्थिति में नहीं पा रहे थे। क्योंकि जिला प्रशासन के पास आक्सीजन और वेंटिलेटर ही नहीं थे।''

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