जब DIG ने नरेंद्र गिरि के खिलाफ दिया था धरना:2004 में मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव से हुई थी शिकायत, DIG तत्काल सस्पेंड कर दिए गए थे

प्रयागराज/लखनऊ2 महीने पहले
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महंत नरेंद्र गिरि व मुलायम सिंह यादव। - Dainik Bhaskar
महंत नरेंद्र गिरि व मुलायम सिंह यादव।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की बीते 20 सितंबर को प्रयागराज में मौत हो गई। घटना में सामने आए सुसाइड नोट से धीरे-धीरे आत्महत्या के पीछे की गुत्थी खुलने लगी है। इस बीच 17 साल पहले का एक मामला फिर से चर्चा में छा गया। जब साल 2004 में तत्कालीन DIG प्रयागराज आरएन सिंह, महंत नरेंद्र गिरि के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे। तब मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव ने नरेंद्र गिरी के कहने पर DIG को तत्काल सस्पेंड कर दिया था।

पढ़ें क्या था पूरा मामला....
निराश्रितों को भोजन वितरण के लिए पंडाल लगाने का था मामला

बताया जाता है कि, साल 2004 में यहां DIG रेंज आरएन सिंह थे। वह अक्सर हनुमान मंदिर जाते थे। मंदिर और बाहर भी कर्मचारियों के साथ सफाई करते और झाड़ू भी लगाते थे। मंदिर के सामने की जमीन पर वह निराश्रितों को भोजन वितरण के लिए पंडाल लगाना चाहते थे, लेकिन उन्हें रोक दिया गया। इससे DIG, महंत नरेंद्र गिरि के विरोध में उतर आए। उन्होंने इस पर प्रशासन से हस्तक्षेप की बात की, लेकिन डीआईजी का मसला होने के बावजूद कुछ नहीं हुआ।

वजह थी नरेंद्र गिरि की सत्ता तक सीधी पहुंच और प्रभाव। इसके विरोध में डीआइजी ने ऐसा कदम उठाया कि शासन प्रशासन के आला अधिकारी भी सन्न रह गए। वह मंदिर के सामने तपती धूप में जमीन पर धरने पर बैठ गए। मामला टीवी पर खबर सुर्खियों में आ गया और फिर धरना देने वाले DIG को सस्पेंड कर दिया गया।

मिन्नतें करते रहे, हाथ पैर जोड़े टस से मस नहीं हुए डीआईजी

एसएसपी समेत तमाम अधिकारी धरना स्थल पर पहुंचे और मिन्नतें कीं, हाथ पैर जोड़े, लेकिन DIG टस से मस नहीं हुए। नरेंद्र गिरी ने इसकी शिकायत उस वक्त मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह से की तो वह भी DIG पर काफी नाराज हुए। उन्होंने DIG आरएन सिंह को सस्पेंड कर दिया। तब जाकर यह विवाद शांत हुआ।

पूर्व डीजीपी ने बताई पूरी बात

पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने बताया, '2004 में मेरी पोस्टिंग यूपी-नेपाल बॉर्डर पुलिस में थी। मुझे याद है कि प्रयागराज में आरएन सिंह धरने पर बैठे थे। मैंने तब भी कहा था कि सर्विस अफसर या रिटायर्ड अफसर को धरना प्रदर्शन शोभा नहीं देता है। हम लोग गवर्नमेंट सर्वेंट कंडक्ट रूल से सर्विस के दौरान या सर्विस के बाद भी बंधे हैं।

ऐसा मठ ढूंढना मुश्किल है, जिसके बारे में आरोप न लगे हों। हमारा काम दर्शन करना है। आप पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी हैं। अगर आपको कोई शिकायत हो तो आप शासन-प्रशासन से कह सकते हैं, लेकिन धरना-प्रदर्शन करना वरिष्ठ पद पर शोभा नहीं देता है। सर्विस पुलिस अफसरों को धरना प्रदर्शन नहीं देना चाहिए। अगर कोई मामला हो तो उसकी शिकायत देकर सीआईडी, एंटी करप्शन या लोकायुक्त से जांच करा लें।

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