अयोध्या में दलित जमीन घोटाले में नया खुलासा:DM अनुज झा ने पहले दलित की जमीन बता खारिज किया; फिर किसके दबाव में खुद ही महर्षि विश्वविद्यालय का प्रस्ताव भेजा

लखनऊ10 दिन पहले

अयोध्या में महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय के लिए दलितों की जमीन लेने के मामले में सरकार अयोध्या मंडल के आयुक्त को पद से हटा चुकी है। लेकिन जमीन के लेन-देन के समय डीएम रहे अनुज झा पर भी इस मामले में सवाल उठने लगे हैं। विश्वविद्यालय बनाने के प्रस्ताव को पहले दलित की जमीन बताकर डीएम अनुज झा ने खारिज कर दिया था।

फिर एक साल में दोबारा महेश योगी विश्वविद्यालय के लिए 20.59 एकड़ जमीन का प्रस्ताव शिक्षा विभाग को डीएम ने जांच कराकर शासन को भेज दिया। डीएम अनुज झा के भेजे गए प्रस्ताव में यह बात सामने आई कि, अयोध्या के मांझा बरेहटा में दलित रोंघई की 21 बीघा भूमि को महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट को दान देने के मामले को अवैध घोषित कर दिया गया है। जो दलित की जमीन होने के बावजूद ट्रस्ट ने 1993 में बिना डीएम की अनुमित के ही दान में ले ली थी। दैनिक भास्कर के पास ट्रस्ट के भेजे गए जमीन के कागजात है। इसमें गाटा संख्या मौजूद है।

तत्कालीन डीएम अनुज झा ने कब क्या किया?

  • तत्कालीन डीएम अनुज झा ने अगस्त 2020 में महर्षि महेश योगी ट्रस्ट की 13 बीघे जमीन को यह कहते खारिज कर दिया था कि, इसमें दलित की जमीन शामिल है।
  • इसके एक साल बाद ही डीएम अनुज झा ने DISO व अन्य संबंधित से ट्रस्ट को भेजे गए प्रस्ताव की जांच कराई। उन्होंने 29 जनवरी 2021 को अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग को अयोध्या में महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यायल की स्थापना के लिए DPR का प्रस्ताव भेजा था।
  • डीएम ने प्रस्ताव में यह लिखा कि, जमीन संबंधित मामले की जांच जिला विद्यालय निरीक्षक एवं सहायक अभिलेख अधिकारी, अयोध्या से कराई गई।
  • इस प्रस्ताव को जांच रिपोर्ट के साथ डीएम अनुज झा ने शासन को भेज दिया है। तत्कालीन डीएम अनुज झा ने कहा था कि हमने जो प्रस्ताव भेजा है, उसमें जांच किए गए अधिकारियों को दलित की जमीन नहीं मिली थी।
  • अयोध्या में महर्षि महेश योगी ट्रस्ट के पास सैकड़ों एकड़ की जमीन है। जांच करने वाले अधिकारियों को एक भी गाटा जमीन नहीं मिली जो दलित के नाम रही।

विश्वविद्यालय के लिए शासन को भेजी गई जमीन की डिटेल

महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट का सामने आया नाम
लेन-देन के इस नेटवर्क के केंद्र में महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट (MRVT) है। ट्रस्ट ने 1990 के दशक की शुरुआत में, राम मंदिर स्थल से 5 किमी से भी कम दूर बरहटा मांझा गांव में भूमि के बड़े हिस्से का अधिग्रहण किया था। अयोध्या के आसपास के गांवों की इस भूमि में से, लगभग 21 बीघा दलितों से केवल 6.38 लाख रुपए में खरीदी गई थी। इस जमीन का मूल्य वर्तमान सर्कल रेट पर 4.25 करोड़ रुपए से 9.58 करोड़ रुपए के बीच है।

जमीन खरीदने वाले ही जांच करने वालों के करीबी

कम से कम चार खरीदार, दलित निवासियों से भूमि के ट्रांसफर की जांच कर रहे अधिकारियों के करीबी संबंधी हैं। अयोध्या में जमीन खरीदारों में स्थानीय विधायक, नौकरशाहों के करीबी रिश्तेदार, स्थानीय राजस्व अधिकारी जो खुद जमीन के लेनदेन से जुड़े थे, उन्होंने भी यहां जमीनें खरीदीं।

सरयू तट पर 100 एकड़ में पांच मंजिला राम दरबार भी नहीं बन सका
महर्षि महेश योगी ने अयोध्या के दशरथ समाधि से लेकर गुप्तारघाट के बीच सही उत्तर पर 30 साल पहले साढ़े 400 बीघा भूमि खरीदी थी। चकबंदी न होने के कारण सरयू तट पर 100 एकड़ में पांच मंजिला राम दरबार भी नहीं बन सका है। इस राम दरबार में विश्व के सभी देशों के प्रतिनिधि एवं राजाराम का दरबार लगाया जाना था। इस बीच इन योजनाओं के लागू न होने के बाद बाद महर्षि महेश योगी संस्थान से जुड़े लोगों ने महर्षि महेश योगी ट्रस्ट की जमीन बेच दी और दान दे दी। महर्षि महेश योगी से जमीन लेने वालों में कई आला अधिकारियों के साथ-साथ अयोध्या के महंत भी शामिल रहे। आसपास के जिलों के संतों की भी नजर से भी यह भूमि अछूती नहीं रही।

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