सावधान! सर्च इंजन से मिला नंबर खाली कर देगा अकाउंट:कस्टमर केयर नंबर मिलाने पर आ रहे ठगों के फोन, हेल्प के नाम पर साइबर ठगी

लखनऊएक वर्ष पहले
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इस समय लोगों की हर समस्या का समाधान सर्च इंजन बन गया है। किसी भी हेल्प के लिए लोग तुरंत ही सर्च इंजन पर जाते हैं। आजकल इसी पर साइबर ठगों का पहरा है। अब तक साइबर ठग फोन कर एटीएम और पिन के नंबर मांगते थे। लेकिन, अब कस्टमर केयर बनकर ये साइबर ठग एकाउंट खाली कर दे रहे हैं।

साइबर ठग सभी सर्च इंजनों पर अपने लिंक और मोबाइल नंबर डाल रखे हैं। इससे कोई भी ग्राहक जब किसी कंपनी के हेल्पलाइन नंबर की तलाश करता है तो ठगों के नंबर उसे आसानी से ऊपर दिखने लगते हैं। साइबर ठग अपना एड लगातार बूस्ट कराते रहते हैं। जिससे उनका नंबर सर्च इंजन पर सबसे ऊपर आता है।

लोग ठग के नंबर को असली कस्टमर केयर का हेल्पलाइन नंबर समझकर डायल करते हैं। इसके बाद साइबर ठगों की गैंग एक्टिव हो जाती है। फोन करने वाले को बातों में फंसाकर उनका एकाउंट साइबर ठग साफ कर देते हैं। लखनऊ में ऐसे ही साइबर ठगी के शिकार हुए वैज्ञानिक मनोज शुक्ल और मड़ियांव के हनुमान प्रसाद बानगी भर हैं।

ससुर को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए किया था फोन
हजरतगंज निवासी मनोज रमेश शुक्ल पेशे से वैज्ञानिक हैं। उन्होंने सात नवंबर को कपूरथला स्थित सुकृति हॉस्पिटल का कस्टमर केयर नंबर खोजकर फोन किया था। जहां उन्हें अपने ससुर को इलाज के लिए भर्ती कराना था। इसके कुछ ही देर बाद एक नंबर से फोन आया। जिसने खुद को अस्पताल कर्मी बताते हुए रजिस्ट्रेशन के नाम पर मोबाइल पर एक गूगल पे लिंक भेजा और पांच रुपए का टोकन पेमेंट करने कहा। रमेश के पैसा भेजते ही उनके खाते से 49980 रुपए कट गए।

पर्सनल लोन के लिए लगाया फोन, ठग ने कर दिया खाता साफ
मड़ियांव के बलराम निवासी हनुमान प्रसाद ने पिछले महीने गूगल पर सर्च कर हीरो फाइनेंस पर्सनल लोन के कस्टमर केयर पर कॉल कर पर्सनल लोन चुकाने के लिए बात की। इसी बीच उनकी कॉल कट गई और दूसरी तरफ से फोन आया। जिसने कंपनी का एजेंट बनकर उनकी पूरी डिटेल लेकर लोन का पैसा (50 हजार रुपए) अपने खाते में जमा करवा लिया।

साइबर ठगी होते ही इस नंबर पर करें फोन
साइबर ठगी का शिकार होने की जानकारी होते ही 155260 हेल्पलाइन नंबर पर या https://cybercrime.gov.in/ पर जाकर भी शिकायत करें। यहां शिकायत दर्ज कराने के बाद ऑनलाइन फ्राड की ट्रांजेक्शन आईडी के जरिए लेनदेन को रोक दिए जाएगा।

फर्जी लिंक में रैंडम नंबर और अक्षर होंगे
साइबर अपराधी फर्जी वेबसाइट्स में अधिकतर रैंडम नंबर और अक्षर (http://1e36c17728d5.nmr[.]io/xxxbank जैसे) होते हैं। वहीं HTTP प्रोटोकॉल पर बेस्ड (http://1e36c17728d5.nmr[.]io/xxxbank/) लिंक का प्रयोग करते हैं। कभी कस्टमर केयर नंबर पर फोन मिलाने के बाद ऐसे लिंक भेज कर पैसे का लेनदेने करने को कहें तो सतर्क हो जाएं।

साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

  • बैंक से खाते की केवाईसी अपडेट कराने के लिए कभी भी किसी से व्यक्तिगत जानकारी/ओटीपी/सीवीवी/पिन नंबर नहीं मांगा जाता।
  • किसी के कहने से कोई भी ऐप डाउनलोड न करें।
  • किसी भी बेवसाइट पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से पहले अच्छी तरह जांच लें।
  • ऑनलाइन सेवाएं देने वाली कंपनियों और सरकारी विभाग के कस्टमर केयर का नंबर आधिकारिक वेबसाइट से ही लें।
  • अनजान व्यक्ति/अज्ञात मोबाइल नंबर से भेजी गई लिंक पर क्लिक न करें।
  • सरकारी उपक्रम, वेबसाइट या फंड की आधिकारिक वेबसाइट से ही ट्रांजेक्शन करें। वॉलेट और केवाईसी का अपडेट ऑथराइज्ड सेंटर पर जाकर ही कराएं।
  • सोशल एकाउंट और बैंक खातों का पासवर्ड स्ट्रांग बनाएं, जिसमें नंबर अक्षर और चिह्न तीनो हों। साथ ही टू-स्टेप-वेरीफिकेशन लगाए रखे।

इन साइट्स से हो रही ज्यादा ठगी

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