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प्रदेश में बिजली संकट गहराया:उर्जा मंत्री बोले- कोयले की कमी ने बढ़ाई बिजली कटौती, दूसरे विकल्पों की हो रही व्यवस्था

लखनऊ9 दिन पहले
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ऊर्जा मंत्री ने बताया कि कोयले - Dainik Bhaskar
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि कोयले

कोयले की कमी से उप्र में बिजली संकट गहरा गया है। स्थिति यह है कि उप्र के खुद शहरों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर जगहों पर तय शिड्यूल के तहत प्रॉपर सप्लाई नहीं हो पा रही है। स्थिति यह है कि खुद ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने प्रॉपर सप्लाई न होने पर उपभोक्ताओं से खेद प्रकट किया है। उप्र में करीब 2 करोड़ 90 लाख उपभोक्ता है। जिनसे 23 करोड़ की आबादी को बिजली मिलती है। लेकिन पिछले कुछ दिन से बिजली समस्या लगातार बढ़ रही है।

ट्वीट कर दी जानकारी

ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने गुरुवार ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। देश में बिजली का संकट लगातार गहराता जा रहा है। इसका असर उप्र पर भी पड़ रहा है। ऊर्जा मंत्रालय ने पहले ही जानकारी दे दी थी कि कोयले की लगातार कमी हो रही है। इसकी आपूर्ति नहीं होने के कारण बिजली का संकट काफी बड़ा हो सकता है। हालांकि श्रीकांत शर्मा ने कहा है कि समस्या का समाधान कर लिया जाएगा। बिजली के संकट को ज्यादा बड़ा नहीं होने दिया जाएगा।

श्रीकांत शर्मा ने ट्वीट कर बताया कि 'प्रिय उपभोक्ता, विभिन्न कारणों से विद्युत उत्पादन इकाइयों में कोयले की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे निर्बाध विद्युत आपूर्ति में व्यवधान आ रहा है। आपको हो रही असुविधा के लिए खेद है। यह समस्या जल्द दूर कर आपूर्ति सामान्य की जाएगी।' इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि 'संयुक्त सचिव, कोयला मंत्रालय की अध्यक्षता में गठित सब ग्रुप, सप्ताह में दो बार कोल आपूर्ति की निगरानी कर रहा है। केंद्र सरकार व कोल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से आपूर्ति सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अन्य स्रोतों से बिजली खरीद की जा रही है।'

बढ़ गई है बिजली की खपत

ऊर्जा मंत्रालय ने दो दिन पहले ही बता दिया था कि कोयले से बनने वाली बिजली का उत्पादन ठप हो सकता है। क्योंकि, कोयले का स्टॉक काफी कम बचा है। गौरतलब है कि भारत में 70 फीसदी बिजली अभी तक कोयले से ही बनाई जाती है। अभी तक कुल 135 थर्मल पावर प्लांट्स में से 72 के पास दो दिन का स्टॉक बचा है। जबकि, 50 के पास फिलहाल दस दिनों का स्टॉक है। लेकिन, बिजली खफत को देखते हुए संकट कभी गहरा सकता है। ऊर्जा मंत्रालय ने पहले ही बताया था कि कोरोनाकाल में जब लोग घरों में थे तो बिजली का उपयोग काफी बढ़ गया था। मंत्रालय की दी जानकारी के अनुसार 2019 में अगस्त-सितंबर के दौरान खुल खपत जहां 10 हजार 660 करोड़ प्रति यूनिट हर महीना थी तो अब यह आंकड़ा करीब साढ़े बारह हजार करोड़ यूनिट प्रति महीने पहुंच गया है।

बारिश से खादान में पानी भरा

अधिकारियों ने बताया कि कोयले का उत्पादन नहीं होने के कारण इसकी सप्लाई नहीं हो रही है। इसका सबसे बड़ा कारण है भारी बरसात का होना। उन्होंने बताया कि बरसात इतनी मूसलाधार हुई है कि हर खादान में पानी भरा हुआ है। यह संकट यूपी ही नहीं पूरे देश मं है। अधिकारियों की मानें तो बरसात के दौरान काम करना खतरे को न्यौता देना है। यही कारण है कि जिस तरह की मांग की जा रही है, उसकी तुलना में हम सप्लाई नहीं दे पा रहे हैं।

त्यौहारों में बढ़ जाता डिमांड

इस बीच नवरात्रि के साथ ही त्यौहारी सीजन भी शुरू हो गया है। ऐसे में बिजली की मांग और बढ़ने वाली है। इसको देखते हुए सरकार की परेशानियां बढ़ गईं हैं। हालांकि, मंत्री ने दावा किया है कि सरकार लगातार कोशिश कर रही है। संकट नहीं आने दिया जाएगा।

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