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राजधानी में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का हाल:पांच साल बाद भी दो लाख से ज्यादा घरों से कूड़ा नहीं उठ रहा, अफसर बोले- जल्द होगा सुधार

लखनऊ7 दिन पहले
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पांच साल पहले 2016 स्मार्ट सिटी और स्वच्छता को लेकर अभियान चलना शुरू हुआ था लेकिन स्थिति यह है कि अभी तक डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम शत प्रतिशत नहीं चालू हो पाया है। - Dainik Bhaskar
पांच साल पहले 2016 स्मार्ट सिटी और स्वच्छता को लेकर अभियान चलना शुरू हुआ था लेकिन स्थिति यह है कि अभी तक डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम शत प्रतिशत नहीं चालू हो पाया है।

नगर निगम की सूची में 6 लाख घर जहां से हाउस टैक्स आता है। इसमें से करीब 2 लाख घरों से डोर टू डोर कूड़ा नहीं उठ रहा है। पिछले एक साल में नगर निगम इसके लिए चार करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च कर करीब 400 गाड़ियां खरीद चुका है। लेकिन अभी पूरी कामयाबी नहीं मिल पाई है । इससे शहर की सफाई व्यवस्था बेहतर नहीं हो रही है। बारिश में यह स्थिति और ज्यादा खराब हो गई है। पांच साल पहले 2016 स्मार्ट सिटी और स्वच्छता को लेकर अभियान चलना शुरू हुआ था लेकिन स्थिति यह है कि अभी तक डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम शत प्रतिशत नहीं चालू हो पाया है।

नगर निगम के आंकड़ों में अभी भी 60 से 65 फीसदी तक ही घरों से डोर टू डोर कूड़ा लिया जा रहा है। जबकि मौजूदा समय शहर में कूड़ा उठाने के लिए छह सौ छोटी गाड़ियां लगाई गई है। मानक के हिसाब से एक गाड़ी एक हजार घर से कूड़ा उठा सकती है । हालांकि कोई भी गाड़ी 700 से ज्यादा घरों तक नहीं पहुंच पा रही है। पार्षदों की शिकायत है कि उसमें भी यह लोग एक कॉलोनियों में नियमित नहीं जाते है। यहां तक की घर - घर जाने के बजाए एक जगह गाड़ी खड़ी कर खड़े हो जाते है। इस्माईलगंज प्रथम की पार्षद अमिता सिंह बताती हैं कि उनके यहां अगर लोग खुद गाड़ी तक न जाए तो यह लोग कभी भी 50 फीसदी घर वालों के दरवाजे तक नहीं पहुंचते है।

मौके पर अक्सर गायब रहते कर्मचारी
नगर निगम लखनऊ में 1200 कर्मचारी कूड़ा उठाते है लेकिन मौके पर बहुत कम लोग मिलते है। स्थिति यह है कि एक ही मोहल्लें के एक गली में टीम जाती है लेकिन दूसरी गली में निजी कूड़ा वालों की मदद लेनी पड़ती है। स्थिति यह है कि निजी कूड़ा उठाने वाले अगर न आए तो लोग सड़क पर ही कूड़ा डालने लगते है। पुराने लखनऊ के हैदरगंज एक, दो और तीन वार्ड में अक्सर यह समस्या आती है।

इन इलाकों में सबसे खराब स्थिति है

कानपुर रोड एलडीए कालोनी, साउथ सिटी, राजाजीपुरम, जानकीपुरम, विकासनगर, अलीगंज, त्रिवेणीनगर, आलमबाग क्षेत्र व पुराने लखनऊ की स्थिति सबसे खराब है। यहां पर नियमित ईकोग्रीन की गाड़ी पहुंची ही नहीं है। स्थानीय निवासियों ने नगर निगम के अधिकारियों को कई बार फोन भी करते है लेकिन मदद नहीं मिलती है। यहां तक की अब पार्षदों की भी कोई सुनवाई नहीं बची है।

1200 मीट्रिक टन कूड़ा शहर में निकलता है

आम दिनों में करीब 1200 मीट्रिक टन कूड़ा शिवरी प्लांट पहुंचता है। जहां इसके निस्तारण की मशीनें लगी है। लेकिन अभी भी इसमें नगर निगम की डोर टू डोर टीम 700 मीट्रिक टन से ज्यादा कूड़ा नहीं उठा पाती है। बाहरी लोग करीब 500 मीट्रिक टन कूड़ा डंपिंग जोन पर डाल देते है। उसकी मदद से यह काम होता है। लखनऊ में विकास नगर सेक्टर चार, जानकीपुरम समेत कई डंपिंग जोन पर पूरे दिन कूड़ा गिरते रहता है, जबकि दोपहर 12 बजे के बाद कूड़ा डंपिंग जोन पर नहीं आना चाहिए।

क्या कहते जिम्मेदार
इस मामले में नगर निगम के पर्यावरण अधिकारी पंकज भूषण का कहना है कि इसमें स्थिति सुधरी है। करीब 35 फीसदी तक आंकड़े सुधरे हैं। करीब 65 फीसदी घरों कूड़ा उठने लगा है। आने वाले दिनों में इसमें और सुधार होगा। इसको लेकर प्लानिंग की जा रही है। जल्द ही रिजल्ट दिखेगा।