2 मंत्री, 5 विधायकों के इस्तीफे की असल कहानी:सबने कहा- OBC-SC की उपेक्षा से छोड़ी भाजपा, हकीकत- इनका MY फैक्टर के बिना चुनाव जीतना मुश्किल था

लखनऊ14 दिन पहलेलेखक: अभिषेक जय मिश्र

चुनाव आते ही बड़े नेता सुरक्षित ठिकाने की तलाश में दलबदल का दांव खेलने लगे हैं। भाजपा का खेमा छोड़ने वाले 2 मंत्री OBC-SC की उपेक्षा का बिगुल बजा रहे हैं। हकीकत उनकी खुद की विधानसभा सीटों से शुरू होती है। बिना MY फैक्टर के उनका चुनाव जीतना थोड़ा मुश्किल था। MY फैक्टर, यानी मुस्लिम-यादव। यही वजह है कि मंत्री-विधायकों ने दलबदल की हैट्रिक लगा दी है। इस कतार में कुछ और नाम भी हैं।

आइए आपको भाजपा के 2 मंत्री और 5 विधायकों के दलबदल के पीछे की असल कहानी बताते हैं...

स्वामी प्रसाद मौर्य :
परंपरागत पडरौना पर MY फैक्टर से 46% वोट पक्के

भाजपा से इस्तीफे के बाद अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ ये तस्वीर ट्वीट की।
भाजपा से इस्तीफे के बाद अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ ये तस्वीर ट्वीट की।

योगी कैबिनेट में श्रम मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा छोड़ दी। वे 3 बार पडरौना सीट से विधायक रहे। 2 बार बसपा, एक बार भाजपा के टिकट पर। 2022 में उन्हें पडरौना सीट से ही चुनाव लड़ना है। इस सीट पर 19% ब्राह्मण भाजपा से नाराज हैं। दूसरी तरफ यादव, मुस्लिम और अन्य सामान्य जातियों का 27% वोट भी सपा के पक्ष में जाता हुआ दिख रहा है। कुल 46% वोटर्स के छिटकने का खतरा स्वामी नहीं उठाना चाहते थे, इसलिए स्वामी ने सपा का हाथ थाम लिया। फिर 18% SC और 18% OBC वोटर पहले से स्वामी प्रसाद के साथ है। साइकिल पर सवारी के बाद तकरीबन उनकी जीत तय है।

स्वामी ने बताई OBC, दलितों की उपेक्षा वजह
स्वामी प्रसाद ने इस्तीफे में लिखा था- मंत्री के रूप में विपरीत परिस्थितियों और विचारधारा में रहकर उत्तददायित्व का निर्वहन किया, लेकिन दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेरोजगार नौजवानों और व्यापारियों की उपेक्षा के कारण उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देता हूं।

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दारा सिंह चौहान :
मुख्तार सिंह के गढ़ की घोसी सीट पर है नजर

दारा सिंह ने सोची-समझी रणनीति के तहत भाजपा से इस्तीफा दिया है। वह अब मुख्तार अंसारी के गढ़ की घोसी सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। माना जा रहा है कि अगर दारा सिंह इस सीट से सपा के टिकट पर लड़ते हैं तो उनकी जीत एकदम पक्की होगी। वहीं, सपा भी मुख्तार अंसारी के परिवार की आपराधिक छवि से दूर रहने के लिए दारा सिंह को टिकट दे सकती है।

उनकी मौजूदा सीट मऊ की मधुबन विधानसभा भी सपा के साथ जाने से मजबूत हो रही है। यह सीट मुस्लिम बाहुल्य है और मुख्तार अंसारी की सीट है। नंबर 2 पर यादव आते हैं। चौहान और राजभर भी प्रभाव रखते हैं। यानी हिसाब सीधा है, जिसके मुस्लिम-यादव-राजभर उसकी जीत पक्की। इसमें चौहान भी जोड़ दिए जाएं तो 2 लाख से ज्यादा वोटर हो जाते हैं। इसलिए दारा सिंह चौहान की नजर मधुबन से ज्यादा घोसी सीट पर है।

दारा ने कहा- OBC को सम्मान नहीं
दारा सिंह ने योगी को भेजे इस्तीफे में लिखा- मैंने अपनी जिम्मेदारी पूरे मन से निभाई, पर सरकार किसानों, पिछड़ों, वंचितों, बेरोजगारों की उपेक्षा कर रही है। इसके अलावा पिछड़ों और दलितों के आरक्षण को लेकर जो खिलवाड़ हो रहा है, उससे मैं आहत हूं। इसी वजह से मंत्रिमंडल से इस्तीफा देता हूं।

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अवतार सिंह भड़ाना :

जेवर में गुर्जर और मुस्लिम अवतार के साथ

अवतार सिंह भड़ाना के बाद जयंत चौधरी ने ये तस्वीर ट्वीट की।
अवतार सिंह भड़ाना के बाद जयंत चौधरी ने ये तस्वीर ट्वीट की।

गुर्जर समुदाय के बड़े नेता अवतार सिंह भड़ाना के रालोद में शामिल होने के बाद जेवर विधानसभा सीट का जातीय समीकरण बदल गया है। गुर्जर वोटर्स के बीच मजबूत जनाधार अवतार का है। जेवर सीट पर उन्हें गुर्जर वोटर्स का सपोर्ट मिलना भी तय है। साथ ही सपा और रालोद गठबंधन की वजह से मुस्लिम, SC और अन्य जातियों के वोटर भी उनके लिए मददगार साबित होंगे। पिछले 2 चुनावों में भी यहां मुकाबला कांग्रेस-बसपा और भाजपा इन तीनों पार्टियों के बीच ही रहा है। 2017 में भी मुख्य मुकाबला BSP और BJP में देखने को मिला था। पहली बार यहां सपा-रालोद का गठबंधन फाइट में आ चुकी है। 85 हजार गुर्जर और तकरीबन इतने ही मुस्लिम वोटर यहां सरकार का रुख तय कर देंगे।

किसानों की उपेक्षा होने से छोड़ी पार्टी
अवतार सिंह भड़ाना किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे थे। वो किसानों की उपेक्षा होने से खुद को आहत बता रहे हैं। उन्हें गुर्जर समुदाय का बड़ा नेता माना जाता है। वह पिछले कुछ समय से समुदाय को एकजुट करने की कोशिशों में जुटे हुए थे।

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चुनाव से पहले इन विधायकों ने भी बदला पाला

बिल्सी सीट पर भाजपा छोड़ने के बाद MY फैक्टर राधा कृष्ण शर्मा के पक्ष में है।
बिल्सी सीट पर भाजपा छोड़ने के बाद MY फैक्टर राधा कृष्ण शर्मा के पक्ष में है।

सबसे पहले बात करते हैं BJP विधायक राधा कृष्ण शर्मा की। लखनऊ में पार्टी मुख्यालय पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुद राधा कृष्ण शर्मा को अपनी पार्टी की सदस्यता दिलाई। बदायूं को समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। भारतीय जनता पार्टी ने बदायूं के बिल्सी में 1993 के बाद पहली बार मोदी लहर में 2017 में जीत दर्ज की थी। आरके शर्मा यहां विधायक चुने गए थे। शर्मा ने मतदान के 21 दिन पहले ही टिकट मिलने के बाद भी जीत दर्ज की थी। अब बदले हुए सियासी समीकरणों में बिल्सी सीट पर MY फैक्टर ही काम आना है।

इसके अतिरिक्त, बांदा के तिंदवारी सीट से ‌BJP विधायक बृजेश प्रजापति ने भी अपना इस्तीफा दे दिया है। साथ में शाहजहांपुर की तिलहर सीट से विधायक रोशनलाल वर्मा और कानपुर के बिल्हौर के विधायक भगवती प्रसाद सागर ने भी ठीक चुनाव से पहले भाजपा का साथ छोड़ा है।

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