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महिला ने लगाया उत्पीड़न का आरोप:लखनऊ में दो IAS अफसरों समेत 11 अधिकारियों-कर्मचारियों पर FIR दर्ज, महिला आयोग के दखल बाद हुई कार्रवाई

लखनऊएक महीने पहले
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एसीपी महानगर प्राची सिंह के अनुसार महिला ने पहले भी यौन उत्पीड़न की एक शिकायत की थी, जिस पर मामला कोर्ट में चल रहा है।  - Dainik Bhaskar
एसीपी महानगर प्राची सिंह के अनुसार महिला ने पहले भी यौन उत्पीड़न की एक शिकायत की थी, जिस पर मामला कोर्ट में चल रहा है। 
  • महानगर कोतवाली में आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ केस
  • साल 2019 से शिकायत दर्ज कराने के लिए दौड़ रही थी महिला

राजधानी लखनऊ में न्यू हैदराबाद स्थित राज्य नियोजन संस्थान की एक महिला अधिकारी की शिकायत पर दो IAS अफसरों समेत 11 कर्मचारियों पर महानगर कोतवाली में FIR दर्ज की गई है। महिला ने साल 2019 में शिकायत की थी कि झूठे आरोपों में फंसाकर उनके लैंगिक उत्पीड़न का प्रयास किया जा रहा है। मामले की जांच हुई तो आरोप सत्य साबित हुए। महिला आयोग के सख्त तेवर के बाद दो वर्तमान IAS और एक सेवानिवृत्त IAS व आठ अन्य कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, धमकाने और शिकायत पर कार्रवाई न करने का मामला दर्ज किया गया है। एसीपी महानगर प्राची सिंह के अनुसार महिला ने पहले भी यौन उत्पीड़न की एक शिकायत की थी, जिस पर मामला कोर्ट में चल रहा है।

ये हैं आरोपी, इन धाराओं पर मामला दर्ज

2012 बैच के IAS अधिकारी अंकित अग्रवाल, ज्ञान प्रकाश के अलावा 31 दिसंबर 2020 को राज्य नियोजन संस्थान के संयुक्त पद से रिटायर हुए IAS अधिकारी डॉक्टर सतवीर सिंह को FIR में नामजद किया गया है। इसके अलावा सैयद आफाक अहमद, डॉ. सतवीर सिंह, वरिष्ठ मूल्यांकन अधिकारी डॉ. सतराम, कनिष्ठ सहायक दिनेश कुमार, डॉ. राजेन्द्र यादव, डॉ. डी सरीन, उमेश कुमार, डॉ. गोविन्दा बाबू, वी. श्रीवास्तव पर मामला दर्ज हुआ है। इनके खिलाफ IPC की धारा 120 B आपराधिक साजिश रचने, 420 धोखाधड़ी, 467 मूल्यवान दस्तावेजों में हेरफेर, 468 फर्जी दस्तावेज बनाने, 471 जाली दस्तावेज को असल मान कर प्रस्तुत करना, 409 सरकारी धन का गबन, 504 अपमान करने और 506 धमकी देने के तहत FIR दर्ज हुई है।

दो साल तक परेशान किया जाता रहा
पीड़ित महिला का आरोप हैं कि, विभाग के दोनों IAS अफसरों से कार्रवाई के लिए 2019 से चक्कर लगाती रही, लेकिन इन लोगों ने पूर्व निदेशक के खिलाफ शिकायत पर ध्यान नहीं दिया। इससे उसका उत्पीड़न और बढ़ता गया। 2019 में निदेशक रहते हुए दोनों अफसरों ने उनको मानसिक रूप से काफी हानि पहुंचाई। कई तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर उनका उत्पीड़न किया। यह भी आरोप लगाया कि इन आरोपियों ने साठगांठ कर उसके खिलाफ फर्जी शिकायतें कराई। जिसमें कई फर्जी दस्तावेज भी लगाये गए। महिला आयोग ने भी इस मामले में पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी तब इस पर ही पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दिया है।

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