महिला जालसाज ने कारोबारियों से ठगे 1.37 करोड़ रुपये:लखनऊ पुलिस कमिश्नर के पांच महीने चक्कर काटने के बाद दर्ज हुई FIR

लखनऊ7 महीने पहले
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महिला जालसाज ने रियल एस्टेट कंपनी बनाने का झांसा दिया था। - Dainik Bhaskar
महिला जालसाज ने रियल एस्टेट कंपनी बनाने का झांसा दिया था।

लखनऊ की एक महिला जालसाज ने लखीमपुर के पांच कारोबारियों से एक करोड़ 37 लाख 50 हजार रुपये ठग लिए। जालसाज महिला ने पीड़ितों को जमीनें दिखाई और रियल एस्टेट कम्पनी खोलने का झांसा देकर शिकार बनाया। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित लखनऊ के थानों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन पुलिस उनकी नहीं सुन रही थी।

इसके बाद वे पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर से मिले। वह भी पीड़ितों को टरकाते रहे। काफी दबाव पर पांच महीने बाद बाद हसनगंज थाने में मामले की रिपोर्ट दर्ज की गई। लखीमपुर खीरी निवासी शाबान, मुश्ताक, फैजल किरमानी, मुरसलीन और यूनुस का अपना कारोबार करते हैं।

पीड़ितों के मुताबिक उनकी मुलाकात लखनऊ में हसनगंज की रहने वाली मेराज की पत्नी ऊषा चौधरी से हुई। ऊषा ने उन्हें एक रियल एस्टेट कंपनी खोलने का झांसा दिया। इसके लिए कई जगह जमीन भी दिखाई। ऊषा ने कारोबारियों को रियल एस्टेट कंपनी में हिस्सेदारी देने की बात कही। शर्त के मुताबिक, सबने अपने नाम से पर्सनल और हाउसिंग लोन लेकर रकम ऊषा को दे दी।

अपने खाते में जमा करवाकर हड़प ली सारी रकम

पीड़ितों के मुताबिक ऊषा चौधरी ने सभी से अलग-अलग तारीख में रुपये अपने खाते में जमा कराया। शाबान से 40 लाख, मुश्ताक से 31 लाख, फैजल से 29 लाख, यूनुस से 20 लाख और मुरसलीन से 17.50 लाख रुपये लिए थे। सभी ने यह रुपये बैंक से लोन लेकर दिए थे। आरोप है कि जालसाजी में ऊषा के साथ बैंक के कर्मचारी भी मिले थे।

ऊषा चौधरी ने बैंक कर्मचारियों को लोन के खातों में कारोबारियों के मोबाइल नंबर न देकर दूसरे मोबाइल नंबर डाले, जो उसके पास थे। इससे ओटीपी ऊषा चौधरी के नंबर पर आता रहा और वह रकम निकलती रही।

कंपनी में हिस्सा भी नहीं मिला और बैंक ने भेजा रिकवरी नोटिस

कारोबारियों के मुताबिक, काफी समय बीत जाने के बाद भी प्लॉटों की बिक्री में कोई हिस्सा नहीं मिला और न ही उनकी पूंजी ही वापस मिली। इसके बाद उन्होंने ऊषा से अपनी हिस्सेदारी के बारे में बातचीत करनी शुरू की। अपने हिस्से के लिए दबाव बनाया। इस पर शुरूआत में टालमटोल करती रही।

उसने कारोबारियों को झांसा दिया कि वह उनकी ईएमआई की रकम खुद जमा करती रहेगी। कुछ की ईएमआई जमा करने के बाद उसे बंद कर दिया। इस पर सभी को बैंक ने रिकवरी नोटिस भेज दिया। उधर, अपना रुपया मांगने पर ऊषा जान से मारने और फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी देने लगी।

अगस्त से ही पुलिस कमिश्नर कार्यालय का चक्कर काट रहे थे पीड़ित

पीड़ितों के मुताबिक, उन्होंने ऊषा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए वे पहले हसनगंज थाने पहुंचे। वहां पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो 13 अगस्त को पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर से मिले। पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने जांच कर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।

मगर, लखनऊ की हसनगंज पुलिस को मुकदमा दर्ज करने में पांच महीने का समय लग गया। पीड़ितों की तहरीर पर एक जनवरी को यह मुकदमा दर्ज किया गया। प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार सोनकर के मुताबिक मामले की जांच की जा रही है।