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UP में धर्मांतरण मामले में ATS का बड़ा खुलासा:धर्मांतरण के विदेशी फंड से दिल्ली दंगे के आरोपियों को छुड़ाने के लिए खर्च हुए थे 60 लाख रुपए, गुजरात पुलिस लखनऊ पहुंची

लखनऊ2 महीने पहले

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण मामले में गुजरात के वडोदरा से गिरफ्तार सलाउद्दीन शेख की संस्था AFMI (अमेरिकन फेडरेशन ऑफ मुस्लिम्स ऑफ इंडियन ओरिजिन) की जांच से बड़ा खुलासा हुआ है। एजेंसियों का दावा है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर चल रहे अवैध धर्मांतरण के लिए विदेशों से आने वाले फंड का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों में हो रहा था। ATS की जांच में सामने आया कि 2019 में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में दिल्ली में हुई हिंसा के दंगाइयों को छुड़ाने के लिए इसी फंड से 59.94 लाख रुपए खर्च किए गए थे।

यूपी और गुजरात ATS की जॉइंट जांच में पता चला कि मजलूमों की मदद के नाम पर सलाउद्दीन जैनुद्दीन शेख की संस्था AFMI विदेशों से चैरिटी फंड जुटाती थी। इस संस्था को दुनिया के कई देशों से पांच साल में 27.30 करोड़ रुपए मिले। इसमे 19.30 करोड़ संस्था के खाते में आए और 8 करोड़ रुपए हवाला के जरिए भेजे गए थे।

मस्जिदें बनवाने और धर्मांतरण के लिए IDC को दिए थे 5.91 करोड़
जांच में पता चला कि 2017 से संचालित AFMI को ज्यादातर फंडिंग दुबई से की जा रही थी। सलाउद्दीन ने इन पांच साल में अवैध रूप से मस्जिदों का निर्माण करवाने और गैर मुस्लिमों का धर्म परिवर्तन करवाने के लिए 5.91 करोड़ रुपए नोएडा में संचालित उमर गौतम की संस्था इस्लामिक दावा सेंटर (IDC) को दिया था। उमर गौतम ने इन रुपयों का इस्तेमाल कहां-कहां किया है इसकी पड़ताल अभी चल रही है।

दंगाइयों को छुड़ाने के लिए विदेशी फंडिंग से खर्च हुए थे 59.94 लाख
जांच में यह भी सामने आया कि सलाउद्दीन और उमर गौतम की संस्थाएं 2019 नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में देश भर में हिंसा भड़काने में मदद कर रही थी। दिल्ली के शाहीनबाग में हुए प्रदर्शन में भीड़ जुटाने के लिए यह रुपए खर्च कर रहे थे। इस दौरान हुए दंगे में आगजनी और तोड़फोड़ के बाद गिरफ्तार आरोपियों को छुड़ाने का पूरा खर्च इन्होंने ही उठाया था। सलाउद्दीन की संस्था को मिले विदेशी फंड से आरोपियों को छुड़ाने में वकील की फीस और अन्य खर्च के लिए 59.94 लाख रुपए दिए गए थे।

उमर गौतम जेल में है। इसकी संस्था इस्लामिक दावा सेंटर (IDC) को करीब छह करोड़ रुपए मिले थे।
उमर गौतम जेल में है। इसकी संस्था इस्लामिक दावा सेंटर (IDC) को करीब छह करोड़ रुपए मिले थे।

बनवाया गया था 1.65 करोड़ रुपए का फर्जी बिल
ATS की अब तक की पड़ताल में सामने आया कि AFMI के खाते में आए 19.30 करोड़ रुपयों में से ज्यादातर खर्च संस्था की तरफ से गुजरात और राजस्थान के गरीबों के सहायतार्थ दिखाया गया है। इसमें कपड़े, दवाएं, शिक्षा और घरेलू जरूरत के सामान की खरीद दिखाई गई है, जबकि खरीद न करके व्यापारियों को कमीशन देकर उनसे फर्जी बिल बनवाया गया और उन्हीं को चेक देकर कैश लिया गया था। अब तक 1.65 करोड़ रुपए के फर्जी बिल की जानकारी सामने आई है। पुलिस बिल बनाने वाले व्यापारियों से पूछताछ कर रही है।

गुजरात में दर्ज हुआ अवैध धर्मांतरण के मामले में पहला केस
जांच में फंडिंग का अवैध धर्मांतरण और देश विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल की जानकारी के बाद इस मामले में मंगलवार को गुजरात में पहला केस दर्ज किया गया। यह केस उमर गौतम और सलाउद्दीन जैनुद्दीन शेख के खिलाफ ATS थाने में दर्ज किया गया है। यूपी ATS जून में केस दर्ज कर अभी तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें 6 के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई है।

आरोपियों की रिमांड के लिए लखनऊ पहुंची गुजरात ATS की टीम
जांच में यह भी पता चला कि सलाउद्दीन इस अवैध धर्मांतरण सिंडिकेट का सबसे अहम किरदार था। वहीं मौलाना उमर गौतम को फंड मुहैया करवाता था। पांच साल के दरम्यान उमर गौतम सलाउद्दीन से मिलने 5 बार वडोदरा गया था। एटीएस ने उसकी हर बार की लोकेशन ट्रेस कर ली है। दोनों आरोपी लखनऊ की जेल में हैं। इनकी रिमांड के लिए गुजरात एटीएस की एक टीम लखनऊ पहुंच चुकी है। दोनों को वडोदरा ले जाकर और साक्ष्य जुटाए जाएंगे।

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